Stock Market Strategy: अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों ने अमेरिकी स्टॉक मार्केट को करारा झटका दे दिया। अमेरिकी लेबर मार्केट में कमजोरी का यह आंकड़ा ऐसे समय में आया है, जब महंगाई दर अभी भी फेडर रिजर्व के 2 फीसदी के अपर लिमिट से ऊपर बनी हुई है। अब जेफरीज के एनालिस्ट क्रिस्टोफर वुड का कहना है कि ऐसे समय में इस बात की संभावना बन रही है कि अमेरिकी फेड इंफ्लेशन की बजाय लेबर मार्केट पर अधिक फोकस करेगा और ब्याज दरों में अधिक कटौती हो सकती है। जेफरीज के ग्रीड एंड फियर नोट के मुताबिक ब्याज दरों में कटौती का मतलब ये नहीं कि अमेरिकी शेयरों के लिए पॉजिटिव माहौल बन जाए। हालांकि भारत को लेकर क्रिस वुड पॉजिटिव दिख रहे हैं और उनका मानना है कि यहां तेजी दिख सकती है।
अमेरिका में रोजगार की क्या है स्थिति?
लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने 3 अगस्त को जो आधिकारिक आंकडे़ जारी किए, उसके मुताबिक जुलाई में 1.14 लाख नौकरियां ही तैयार हुईं जो जून की तुलना में काफी कम रहीं और मार्केट के अनुमान से भी। बेरोजगारी दर भी सितंबर 2021 के बाद से सबसे ऊंचे स्तर 4.3 फीसदी पर पहुंच गई। इससे मंदी की आशंका बनी है। अप्रैल 2023 में बेरोजगारी दर पांच दशक के निचले स्तर 3.4 फीसदी पर थी। जुलाई के पहले एक साल में औसतन 2.15 लाख नौकरियां तैयार हो रही थीं।
मार्केट पर क्या दिख सकता है असर?
अमेरिकी लेबर मार्केट में सुस्ती के इन आंकड़ों पर जेफरीज का मानना है कि अब अमेरिकी फेड इनफ्लेशन की बजाय लेबर मार्केट पर फोकस कर सकता है। अब मार्केट का अमुमान है कि इस साल के आखिरी तक ब्याज दरों में 1.16 फीसदी की कटौती हो सकती है। जून के रोजगार आंकड़ों से पहले यह अनुमान 0.86 फीसदी ही था। हालांकि क्रिस्टोफर वुड का कहना है कि इस कटौती से अमेरिकी शेयरों को फायदा ही मिले, ऐसा जरूरी नहीं है बल्कि रेट कट से एशियाई और विकासशील देशों के स्टॉक मार्केट को अच्छा फायदा मिल सकता है जिनके पास अधिक कटौती करने की गुंजाइश है। जेफरीज के एनालिस्ट क्रिस्टोफर वुड के मुताबिक भारतीय स्टॉक मार्केट में अधिक तेजी दिख सकती है क्योंकि यहां देशी निवेश का सपोर्ट काफी तगड़ा है जबकि जापान में ऐसा नहीं है। जेफरीज के ग्रीड एंड फियर ग्लोबल लॉन्ग रैली पोर्टफोलियो का करीब 26 फीसदी निवेश भारत में ही है।
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