ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडियन मार्केट्स में शेयर काफी महंगे हो गए हैं। इससे निवेशकों को निवेश के शेयरों का चुनाव करने में दिक्कत आ रही है। स्टॉक मार्केट्स की दिशा के बारे में भी संकेत नहीं मिल रहे हैं। घरेलू अर्थव्यवस्था की सेहत अच्छी है। लेकिन, मध्यपूर्व में बढ़ता तनाव ग्लोबल मार्केट पर असर डाल सकता है। अगर अमेरिकी मार्केट्स में गिरावट आती है तो उसका शेयर इंडियन मार्केट्स पर भी पड़ेगा। मनीकंट्रोल ने जेएम फाइनेंशियल एएमसी के सीआईओ (इक्विटी) सतीश रामनाथन से बातचीत की। उनसे पूछा कि अभी निवेशकों को निवेश में किन बातों का ख्याल रखने की जरूरत है।
कुछ साल पहले के मुकाबले पीई मल्टीपल ज्यादा
रामनाथन ने कहा कि यह सही है कि कुछ साल पहले के मुकाबले मार्केट का पीई मल्टीपल काफी ज्यादा है। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स अच्छी क्वालिटी वाली कंपनियों में निवेश करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, इस मार्केट में ज्यादा रिटर्न कमाना मुश्किल लग रहा है। फंड्स कम वैल्यूएशन वाली अच्छी कंपनियों की तलाश में है। हालांकि, वे क्वालिटी लीडरशिप वाली अच्छी कंपनियों के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं।
ऐसी कंपनियां हैं जिनकी वैल्यूएशन ज्यादा नहीं
उन्होंने कहा, "हम वैल्यूएशन पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। हमारा मकसद सही प्राइस पर अच्छी क्वालिटी की कंपनियों में निवेश करना होता है। अभी भी ऐसी कंपनियां हैं, जिनकी वैल्यूएशन ज्यादा नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि करेंट मार्केट में आप अल्फा की उम्मीद नहीं कर सकते। अल्फा का मतलब मार्केट के बेंचमार्क से ज्यादा रिटर्न हासिल करने से है। कैपिटल गुड्स और एनर्जी सेक्टर में ज्यादा ऐलोकेशन के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इकोनॉमी का प्रदर्शन अच्छा रहेगा। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर में कैपेसिटी बिल्डिंग और आधुनिकीकरण का हाथ होगा।
क्लीन एनर्जी में निवेश बढ़ाने की जरूरत
रामनाथन ने कहा कि जहां तक एनर्जी की बात है तो अभी ज्यादातर एनर्जी थर्मल पावर से आती है। थर्मल पावर के इस्तेमाल से प्रदूषण बढ़ता है। अगर हम कम प्रदूषण वाली क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाना चाहते हैं तो हमें नई तरह की एनर्जी, ट्रांसमिशन और कंजम्प्शन में निवेश बढ़ाना होगा। इसलिए एनर्जी थीम को ध्यान में रख हमने अपना निवेश प्लान बनाया है। उन्होंने कहा कि वह बिजनेसेज के कैश फ्लो पर करीबी नजर रखते हैं। हेल्थकेयर, फार्मा और कंजम्प्शन जैसे सेक्टर में अपने एलोकेशन को एडजस्ट करते हैं और ज्यादा महंगे हो चुके सेक्टर में निवेश घटाते हैं।