RBI को JM Financial Products (JMFPL) के कामकाज में कई तरह की गड़बड़ियां मिली हैं। इनमें KYC नियमों का उल्लंघन, एंटी-मनी लाउंड्रिंग (AML) और ग्रुप कंपनियों में ग्राहकों के डेटा की शेयरिंग शामिल हैं। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने इस एनबीएफसी के खिलाफ कदम उठाए हैं। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। एक सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि जांच में केंद्रीय बैंक को लोन मंजूर करने की प्रक्रिया में भी नियमों के उल्लंघन मिले हैं। RBI ने 5 मार्च को जेएमएफपीएल के खिलाफ कड़े कदम उठाए थे। कपनी को शेयरों और डिबेंचर में निवेश के लिए लोन देने से रोक दिया गया है। साथ ही वह बतौर कौलेटरल शेयर और डिबेंचर वह ग्राहकों को लोन नहीं देगी। केंद्रीय बैंक के ये फैसले तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।
RBI को मिली कई तरह की गड़बड़ियां
इस बार में राय जानने के लिए जेएमएफपीएल को कुछ सवाल भेजे गए थे, जिनके जवाब नहीं मिले। आरबीआई ने 5 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि एनबीएफसी के लोन प्रोसेस में कुछ गंभीर गड़बड़ियां मिली हैं। केंद्रीय बैंक ने गवर्नेंस से जुड़े मसलों पर भी चिंता जताई है। केंद्रीय बैंक ने कहा है, "आईपीओ फाइनेंसिंग और एनसीडी सब्सक्रिप्शंस के लिए लोन मंजूरी करने में गंभीर गड़बड़ियां देखने को मिली।"
SEBI ने कुछ जानकारियां आरबीआई को भेजी थी
SEBI ने जएमएफपीएल से जुड़ी कुछ जानकारियां RBI को भेजी थी। इसके आधार पर केंद्रीय बैंक ने कंपनी के बुक्स पर गौर किया। उसमें गंभीर किस्म की गड़बड़ियां मिलने के बाद कंपनी के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया गया। जांच में आरबीआई ने यह भी पाया कि कंपनी ने ग्राहकों के एक समूह की मदद कई बार की। उन्हें आईपीओ और एनसीडी इश्यू में निवेश करने के लिए पैसे उपलब्ध कराए गए। क्रेडिट अंडरराइटिंग में भी कमियां पाई गईं।
ग्राहकों को बताए बगैर मास्टर एग्रीमेंट कराए
केंद्रीय बैंक ने बताया है कि सब्सक्रिप्शन, डीमैट अकाउंट और बैंक अकाउंट्स के लिए अप्लिकेशंस के लिए कंपनी ने पावर ऑफ एटॉर्नी (POA) और मास्टर एग्रीमेंट का इस्तेमाल किया। बाद के कामकाज में ग्राहकों को शामिल किए बगैर उनसे मास्टर एग्रीमेंट ले लिए गए। इस तरह कंपनी खुद कर्ज देने और कर्ज लेने का काम कर रही थी। यह बैंक अकाउंट ओपनिंग में बतौर एरेंजर भी काम करती थी।
थर्ड पार्टी ऑडिट के बाद रोक हटाने पर पुनर्विचार
RBI ने कहा है कि जेएमएफपीएल पर लगाई गई रोक पर दोबारा विचार थर्ड पार्टी ऑडिट पूरी हो जाने के बाद किया जाएगा। इससे पहले कपनी को कामकाज से जुड़ी गड़बड़ियां ठीक करनी होगी और इस बारे में केंद्रीय बैंक को संतुष्ट करना होगा। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि कंपनी अपने मौजूदा लोन अकाउंट्स को सेवाएं जारी रख सकती है। इसके लिए वह सामान्य कलेक्शन और रिकवरी प्रोसेस का इस्तेमाल कर सकती है।
जेएम फाइनेंशियल ने किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया
उधर, आरबीआई की कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया में जेएम फाइनेंशियल ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है, "कंपनी के खिलाफ उठाए गए कदमों को पूरी तरह समझने के बाद हमारा यह मानना है कि लोन मंजूरी की हमारी प्रक्रियां में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। इसके अलावा, कंपनी ने नियमों का उल्लंघन भी नहीं किया है। हम यह भी बताना चाहते हैं कि गवर्नेंस का भी कोई मसला नहीं है और हम अपने सभी बिजनेसेज और कामकाज सही तरीके से करते हैं। कंपनी आरबीआई के निर्देश के मुताबिक अपने मौजूदा ग्राहकों को सेवाएं देती रहेगी।"
यह भी पढ़ें: JM Financial Products पर पिछले एक साल से थी SEBI की नजर, चल रही थी जांच