सिर्फ नए ऑर्डर देखकर स्टॉक खरीद रहे हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है, जानिए JSW Steel, Aptus और Delhivery के स्टॉक्स में क्या चल रहा है

कंपनियों के स्टॉक्स पर ऑर्डर बुक का असर दिख रहा है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ नए ऑर्डर को देख निवेश करना ठीक नहीं है। ऑर्डर मिलने से ज्यादा यह मायने रखता है कि उसके पूरे होने की रफ्तार क्या है

अपडेटेड May 22, 2024 पर 10:19 AM
Story continues below Advertisement
जेएसडब्ल्यू के मार्च तिमाही ने नतीजे कमजोर रहे हैं, इसके बावजूद स्टॉक्स रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं।
     
     
    live
    Volume
    Todays L/H
    Details

    कंपनियों को मिल रहे ऑर्डर्स का असर उनके शेयरों पर दिख रहा है। नए ऑर्डर मिलना किसी कंपनी के लिए अच्छी खबर है। लेकिन, मार्केट इस बात की अनदेखी कर रहा है कि ऑर्डर्स के समय पर पूरा होना भी जरूरी है। समय पर ऑर्डर पूरा नहीं होने का असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ता है। ब्लू स्टार के मैनेजिंग डायरेक्टर बी त्यागराजन ने दो हफ्ते पहले एक इंटरव्यू में इस बारे में बताया था।

    त्यागराजन ने कहा था कि अगर ऑर्डर कैश में कनवर्ट नहीं होता है तो उसका क्या फायदा। उनकी दलील सही है क्योंकि ऑर्डर समय पर पूरा होने पर ही उसका फायदा कंपनी को मिलेगा। उन्होंने कहा था कि उनका फोकस सिर्फ ऑर्डर की जगह उसके जल्द पूरा होने पर है। कुछ दूसरे एनालिस्ट्स ने भी कहा है कि कई कंपनियां आक्रामक रूप से उन ऑर्डर्स के लिए भी बोली लगा रही हैं, जिनमें फायदा नहीं है।

    JSW Steel

    जेएसडब्ल्यू के मार्च तिमाही ने नतीजे कमजोर रहे हैं, इसके बावजूद स्टॉक्स रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं। बुल्स का कहना है कि कोकिंग कोल की कीमतों में नरमी है, जिसका अच्छा असर JSW Steel के मार्जिन पर पड़ेगा। मार्च तिमाही में वॉल्यूम सेल्स स्ट्रॉन्ग रही। इस ट्रेंड के जारी रहने की उम्मीद है। बेयर्स की दलील है कि मार्च तिमाही में रियलाइजेशन कमजोर रही। मजबूत घरेलू मांग के बावजूद स्टील की कीमतों में स्थिरता है। इसकी वजह यह है कि चीन की कंपनियों की तरफ से डंपिंग का डर बना हुआ है। जेएसडब्ल्यू का कर्ज काफी ज्यादा बना हुआ है।


    Delhivery

    कंपनी के चौथी तिमाही के नतीजे निराशाजनक रहे। इसके बाद इसके शेयरों की पिटाई हुई। ब्रोकरेज फर्म Emkay Gloabl ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्ट्रॉन्ग बैलैंसशीट और घटते पूंजीगत खर्च से कंपनी पर प्रतिस्पर्धा का असर नहीं पड़ेगा। बेयर्स की दलील है कि पार्सल सेगमेंट में मार्च तिमाही में वॉल्यूम फ्लैट रहा। ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर ने कहा कि इसकी वजह ऑनलाइन डिलीवरी में सामान्य नरमी है। 28,000 करोड़ रुपये वाली वैल्यूएशन वाली Delhivery को प्रॉफिट कमाने में समय लग सकता है।

    यह भी पढ़ें: मार्च तिमाही के नतीजे से पहले Nykaa का बड़ा फैसला, ESOP के तहत जारी किए 4.05 लाख शेयर

    Aptus Value Housing Finance

    एसबीआई म्यूचुअल फंड ने Aptus Value Housing Finance में 3.6 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। ईस्ट ब्रिगेड कैपिटल ने इस कंपनी में 0.87 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी के एयूम की सीएजीआर FY24-25 में करीब 28 फीसदी बनी रहेगी। इसमें होम लोन और स्मॉल बिजनेस लोन का बड़ा हाथ होगा। एक्सिस सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में ऐसा कहा है। ग्रोथ ज्यादा रहने की उम्मीद है, क्योंकि कंपनी नए इलाकों में अपने बिजनेस का विस्तार कर रही है। बेयर्स दलील है कि आगे नेट इंटरेस्ट मार्जिन में कमी आ सकती है, क्योंकि इंटरेस्ट रेट्स के हाई बने रहने की उम्मीद है।

    हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।