US-Iran War की आंच, क्यों झुलस रहे बैंकिंग और NBFC स्टॉक्स, ये है बड़ी वजह

Why Banking and NBFC Stocks Fall: घरेलू स्टॉक मार्केट में मची हाहाकार के बीच बैंकिंग और एनबीएफसी स्टॉक्स धड़ाम हो गए। 12 दिग्गज सरकारी बैंकों के निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स धड़ाम हो गए तो एनबीएफसी स्टॉक्स भी बुरी तरह फिसल गए। जानिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई के बीच कच्चे तेल की उबाल में इनके शेयर क्यों फिसले हैं

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 1:10 PM
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Market Big Fall: कच्चा तेल प्रति बैरल $120 के करीब पहुंचा तो मार्केट में और हाहाकार मच गया।

Why US-Iran War imactad Banking Stocks: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई का असर कई सेक्टरों पर पड़ा है। सबसे ज्यादा असर तेल से जुड़े सेक्टरों पर दिखा, लेकिन इसका असर देश के बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर पर भी पड़ा। आज की बात करें तो 12 दिग्गज सरकारी बैंकों के निफ्टी इंडेक्स निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 6% से अधिक टूट गया। निफ्टी पीएसयू बैंक के सभी बैंक रेड जोन में है और उनके शेयरों में करीब 4% से 7% तक की गिरावट आई। सिर्फ यही नहीं NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) में भी बिकवाली का तेज दबाव दिखा और 6% तक फिसल गए।

इस कारण PSU Banks और NBFCs में आई गिरावट

पीएसयू बैंकों को देश के 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड में उछाल से झटका लगा जो फिलहाल 6.76% पर है। इसमें यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते आई। कच्चा तेल पश्चिमी एशिया में चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते वैश्विक बाजारों में उछलकर प्रति बैरल $120 के करीब पहुंच गया। पीएसयू बैंकों के पास आमतौर पर गवर्नमेंट सिक्योरिटीज का बड़ा पोर्टफोलियो होता है। इनमें से अधिकतर आमतौर पर होल्ड-टू-मैच्योरिटी (एचटीएम) रूप में रखे जाते हैं, लेकिन एक अहम हिस्सा अवेलेबल फॉर सेल (एएफएस) रूप में भी रखा जाता है। जब यील्ड बढ़ती हैं, तो बॉन्ड की कीमतें गिर जाती हैं, और ऐसे में बैंकों को अपने एएफएस (फाइनेंशियल सिक्योरिटीज) खाते पर मार्क-टू-मार्केट (एमटीएम) घाटा उठाना पड़ता है जिसका बैंक की अदर इनकम पर असर पड़ता है।


एनबीएफसी बाजार से पैसे जुटाकर ही लोन बांटते हैं, जैसे कि एनसीडी, बैंक लोन और कमर्शियल लोन। यील्ड ढ़ने पर इन सभी की कीमतें लगभग तुरंत बदल जाती हैं लेकिन उनके वेईकल फाइनेंस, एमएसएमई, एमएफआई और गोल्ड लोन जैसे सेगमेंट्स में लोन आमतौर पर ब्याज निश्चिर दर पर होता है। ऐसे में जब यील्ड बढ़ती है तो स्प्रेड सिकड़ता है और एसेट साइड में इसकी भरपाई न होने के कारण समस्या बढ़ जाती है। स्प्रेड आम तौर पर एनबीएफसी का कमाया हुआ प्रॉफिट मार्जिन होता है, जोकि ग्राहकों को दिए गए लोन पर मिले ब्याज दर और उसी धनराशि को उधार लेने के लिए पेमेंट की गई दर के बीच का अंतर है।

बैंकों और एनबीएफसी स्टॉक्स में गिरावट के पीछे एक और वजह तेल की ऊंची कीमतों के चलते महंगाई बढ़ने की रफ्तार के दबाव की आशंका है। इससे कंजम्प्शन को झटका लग सकता है और लेंडर्स की लोन ग्रोथ प्रभावित हो सकती है, जो सितंबर तिमाही के दौरान अधिकतर बैंकों के लिए दोहरे अंकों में थी।

ओवरऑल क्या है मार्केट की स्थिति?

ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई के दौरान खाड़ी के देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती की तो इसमें और उबाल आया। कच्चा तेल प्रति बैरल $120 के करीब पहुंचा तो मार्केट में और हाहाकार मच गया। घरेलू मार्केट में भी इसकी आंच महसूस हुई। इसकी आंच में घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) धड़ाम हो गए। सेंसेक्स 2494 अंक यानी 3% से अधिक फिसल गया तो निफ्टी 50 गिरकर 23,700 के नीचे आ गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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