Kospi Vs Nifty: ग्लोबल मार्केट रिकॉर्ड हाई पर,लेकिन भारत रह गया पीछे!क्या जरूरी है पोर्टफोलियो में विदेशी निवेश का तड़का?
Kospi Vs Nifty: ताइवान के बाद अब साउथ कोरिया भी भारत के आगे निकल गया है। ग्लोबल मार्केट रैंकिंग में साउथ कोरिया नंबर 6 पर आ गया है। वहीं, भारत 7वें नंबर पर फिसल गया है। AI और चिप कंपनियों में जबरदस्त तेजी के दम पर कोरिया में ये तेजी आई है। KOSPI इस साल 100% से ज्यादा उछला है
Emerging Market : विजय मंत्री का कहना है कि ऐसा नहीं है कि भारत में ग्रोथ नहीं है। ग्रोथ का फायदा भारतीय कंपनियों को नहीं मिल रहा है। भारत में 15-20 अनलिस्टेड ग्लोबल कंपनियां हैं
Kospi Vs Nifty : पश्चिम एशिया तनाव और क्रूड में उछाल के बीच भारतीय बाजार अपने ऑल टाइम हाई से 10 फीसदी से ज्यादा करेक्ट हो चुके है। हालांकि FIIs की बिकवाली से जो झटके मिले उसे DIIs ने काफी हद तक संभाला है। दूसरी तरफ,तमाम कंफ्यूजन और तनावों के बीच ये उम्मीद कायम है कि ईरान डील जल्द होगी और बाजार के सेंटिमेंट सुधरेंगे।
इस बीच कोटक के उदय कोटक की तरफ से एक वेक-अप कॉल आई है। उनका कहना है कि IPL खत्म हो चुका है अब बिजनेस पर फोकस करें। वर्तमान चाहे जैसा भी हो भविष्य में निवेश करें।
उन्होंने भारतीय कंपनियों को गूगल से सीखने की नसीहत देते हुए कहा है कि सरप्लस में चल रही ये कंपनी अपनी ग्रोथ योजनाओं के लिए $80 बिलियन जुटाने की तैयारी में है। कंपनी का सालाना मुनाफा $160 बिलियन है। वहीं, इसको पिछली तिमाही में $62 बिलियन का मुनाफा हुआ था। कंपनी का मार्केट कैप $4.5 ट्रिलियन है। गूगल का मार्केट कैप भारत की सभी लिस्टेड कंपनियों से ज्यादा है। यह सभी कंपनियों के लिए एक वेक-अप कॉल है।
भारत मार्केट को एक और झटका
ताइवान के बाद अब साउथ कोरिया भी भारत के आगे निकल गया है। ग्लोबल मार्केट रैंकिंग में साउथ कोरिया नंबर 6 पर आ गया है। वहीं, भारत 7वें नंबर पर फिसल गया है। AI और चिप कंपनियों में जबरदस्त तेजी के दम पर कोरिया में ये तेजी आई है। KOSPI इस साल 100% से ज्यादा उछला है। ताइवान का मार्केट कैप 5.15 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। वहीं, साउथ कोरिया का मार्केट कैप 5.04 ट्रिलियन डॉलर और भारत का मार्केट कैप 4.84 ट्रिलियन डॉलर पर है।
दक्षिण कोरिया का रिटर्न धमाका
1 साल की अवधि में दक्षिण कोरिया सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से रहा है। जबरदस्त रिटर्न से KOSPI ने सबको हैरान कर दिया। निफ्टी के मुकाबले 1 साल में KOSPI ने बेहतर प्रदर्शन किया है। लेकिन सिर्फ 1 साल की कहानी देखना गलत है। लंबी अवधि में निफ्टी ने ज्यादा रिटर्न दिए हैं। वेल्थ क्रिएशन में भारत आगे रहा है।
KOSPI vs NIFTY: किसने बनाया ज्यादा पैसा?
मई 2009 से मई 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 15 साल के आंकड़ों का सच यह है कि भारत ने कोरिया को बहुत पीछे छोड़ा है। हर टाइम फ्रेम में Nifty 50 ने ज्यादा रिटर्न दिए हैं। इस अवधि की तुलना करें तो 3 साल, 7 साल, 10 साल और 15 साल, इन सभी टाइम फ्रेम पर निफ्टी ही विनर रहा है। 2011-2026 की अवधि में कोस्पी ने 23 फीसदी तो निफ्टी ने 400 फीसदी रिटर्न दिया है।
ऐसे में बाजार में अब क्या स्ट्रैटेजी रखनी चाहिए? इमर्जिंग सेक्टर लीडर्स कौन से होंगे। इन्हीं सब पर चर्चा के लिए आज सीएनबीसी-आवाज़ के साथ जुड़े विजय मंत्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट के सीईओ और फाउंडर विजय मंत्री और UTI AMC के सचिन त्रिवेदी।
विजय मंत्री की राय
विजय मंत्री का कहना है कि ऐसा नहीं है कि भारत में ग्रोथ नहीं है। ग्रोथ का फायदा भारतीय कंपनियों को नहीं मिल रहा है। भारत में 15-20 अनलिस्टेड ग्लोबल कंपनियां हैं। भारत में एप्पल,सैमसंग जैसी अनलिस्टेड ग्लोबल कंपनियां हैं। एप्पल ने पिछले 5 साल में 2 HUL खड़े कर दिए हैं। दक्षिण कोरिया पर कुल $900 बिलियन का कर्ज है। सिर्फ 2 कंपनियां ही कोरिया का 50% कर्ज चुका सकती हैं।
इंटरनेशनल इंवेस्टिंग आसान नहीं है। इंटरनेशनल इंवेस्टिंग काफी उतार-चढ़ाव वाला एसेट है। ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा होना चाहिए। इंटरनेशरल एक्सपोजर के लिए Edelweiss US Valueफंड अच्छा है। DSP Natural Resources भी बेहतर है। गिफ्ट सिटी में Parag Parikh, DSPफंड के जरिए एक्सपोजर ले सकते हैं। ध्यान रखें कि गिफ्ट सिटी में 2 साल टैक्स ज्यादा लगता है। 2 साल के बाद टैक्स कम लगता है। जब मार्केट खराब होता है SIP के यूनिट ज्यादा मिलते हैं।
करेंसी में गिरावट को लंबी अवधि के नजरिए से देखें। AI और सेमीकंडक्टर थीम पर कम ध्यान दें। AI से जुड़ी कंपनियां पहले ही काफी चल चुकी हैं। बड़ा पैसा बनाने के लिए इतिहास ना देखें,फ्यूचर पर ध्यान दें। भारत में अच्छा पैसा बन सकता है,SIP करते रहें।
सचिन त्रिवेदी की राय
हमें हर साल पॉजिटिव रिटर्न की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। रिटर्न कंपनियों के अर्निंग ग्रोथ पर निर्भर करता है। अगले साल 16-17% रिटर्न की उम्मीद है। पहले वैल्युएशन ज्यादा थे,अब करेक्ट हुए हैं। पहले अर्निंग में नरमी थी। अब इसमें सुधार की उम्मीद है। निगेटिव फैक्टर घट रहे हैं,निवेशित रहना बेहतर रणनीति होगी। बाजार में पॉजिटिव रुख से निवेशित रहना चाहिए।
सचिन त्रिवेदी ने आगे कहा कि प्राइवेट बैंक के वैल्युएशन बेहतर हैं। एनर्जी प्राइस में उछाल से महंगाई बढ़ने की आशंका है। RBI के दरें बढ़ाने से बैंकों को फायदा संभव है। IT सर्विसेज में वैल्युएशन सस्ते हुए हैं। IT सर्विसेज में ग्रोथ बढ़ेगी तो री-रेटिंग की संभावना है। फार्मा में करेंसी का फायदा मिल सकता है। फार्मा कंपनियों की घरेलू ग्रोथ अच्छी है। फार्मा कंपनियों के बैलेंसशिट मजबूत है। इनका रिटर्न रेश्यो भी अच्छा है। कंज्यूमर सर्विसेज में ग्रोथ के मौके हैं।
उन्होंने आगे कहा कि PE सिर्फ आज की तस्वीर पेश करती है। AI की अनिश्चितता के चलते वैल्युएशन सस्ते हुए हैं। 2 तिमाही से IT सर्विसेज की डील में बढ़ोतरी हुई है। पहले के मुकाबले IT सर्विसेज का रिस्क रिवॉर्ड बेहतर हुआ है। 10 साल में डिफेंस सेक्टर में बड़े मौके बनेंगे। ऑटो और इलेक्टॉनिक्स स्पेस भी पसंद हैं। कैमरा,मॉड्यूल और टीवी जैसी इंडस्ट्री की ग्रोथ बढ़ेगी।
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