Kotak Mahindra Bank: कोटक महिंद्रा बैंक इस बात आकलन करने में जुटा है कि क्या किंगडन कैपिटल ने हिंडनबर्ग रिसर्च के साथ अपने संबंधों को लेकर उसे गुमराह किया। हिंडनबर्ग ने पिछले साल जनवरी में अपनी रिपोर्ट में अदाणी ग्रुप पर कॉरपोरेट गवर्नेंस नियमों के उल्लंघन और बाजार में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। सूत्रों के मुताबिक, बैंक इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि किंगडन द्वारा दी गई जानकारी गलत थी या सही। किंगडन का दावा है कि अदाणी ग्रुप की इकाइयों में उसके सभी ट्रेड 'प्रिंसिपल ट्रेड' थे।
मौजूदा नियमों के मुताबिक, किंगडन कैपिटल जैसे ऑफशोर फंडों को सिर्फ प्रॉपराइटरी ट्रेड की इजाजत है और वे किसी थर्ड पार्टी के बदले निवेश नहीं करते हैं। सेबी ने किंगडन कैपिटल को फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर (FPI) लाइसेंस दिलाने के मामले में कोटक महिंद्रा बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एक सूत्र ने बताया, 'आकलन के आधार पर कोटक यह फैसला करेगा कि किंगडन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की जाए या नहीं। सेबी की एक जांच में पाया गया है कि किंगडन कैपिटल का हिंडनबर्ग रिसर्च के साथ प्रॉफिट शेयरिंग एग्रीमेंट था, इसलिए इस अमेरिकी शॉर्ट सेलर के बदले ट्रे़ड में पैसा लगाया गया। लिहाजा, किंगडन के ट्रेड का एक हिस्सा हिंडनबर्ग से जुड़ा होगा और इसे प्रिंसिपल ट्रेड नहीं माना जा सकता।'
इस सिलसिले में कोटक महिंद्रा बैंक और किंगडन कैपिटल को भेजी गई ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला। सेबी द्वारा हिंडनबर्ग को भेजे गए कारण बताओ नोटिस के मुताबिक, किंगडन कैपिटल ने FPI लाइसेंस के साथ एक इकाई खरीदी थी, जिसे कोटक की सब्सिडियरी ने तैयार किया था और इसका इस्तेमाल अदाणी एंटप्राइजेज (Adani Enterprises) में शॉर्ट पोजिशन लेने में किया गया।
सूत्र ने बताया, ' फंड को भलीभांति इस बात की जानकारी थी कि अगर वह अपने हिंडनबर्ग के बीच संबंध के बारे में खुलासा करता तो कोटक FPI खाता नहीं बनाता, क्योंकि इसके तहत सिर्फ प्रिंसिपल ट्रे़ड की अनुमति है। लिहाजा, माना जा रहा है कि किंगडन ने जानबूझन इस संबंध को गुप्त रखा।'