शेयर बाजार 20 साल से कुंभ मेले में लगा रहा डुबकी, Sensex ने 2004 से अब तक हर बार दिया नेगेटिव रिटर्न

Kumbh Mela and Sensex: दिलचस्प बात यह है कि कुंभ मेले के दौरान सेंसेक्स में गिरावट देखने को मिलती है, लेकिन उसके बाद बाजार में उछाल देखने को मिलता है। कुंभ खत्म होने के 6 महीने बाद, सेंसेक्स ने पिछले छह में से पांच मौकों पर पॉजिटिव रिटर्न दिया है और इसका औसत रिटर्न इस दौरान 8% का रहा है, जो अपने आप में काफी अच्छा रिटर्न है

अपडेटेड Jan 13, 2025 पर 7:12 PM
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Kumbh Mela and Sensex: सबसे बड़ी गिरावट 2015 के कुंभ मेले में आई थी, जब सेंसेक्स 8.29% गिर गया था

Kumbh Mela and Sensex: दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन 'महाकुंभ मेला' की आज 13 जनवरी से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शुरुआत हो चुकी है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा नदी में डुबकी लगा रहे है। इस बीच कुंभ मेला का शेयर बाजार से कनेक्शन जोड़ते हुए एक इंटरेस्टिंग रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि सिर्फ श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि शेयर बाजार भी कुंभ मेला के दौरान डुबकी लगाता है। पिछले 20 सालों में जब-जब कुंभ मेला आयोजित हुआ है, बीएसई सेंसेक्स ने उस दौरान नेगेटिव रिटर्न दिया है। इस रिपोर्ट को तैयार किया SAMCO सिक्योरिटीज के अपूर्व शेठ ने।

उन्होंने बताया कि साल 2004 से अबतक कुल 6 बार कुंभ मेले का आयोजन हो चुका है। और सेंसेक्स ने इन सभी मौकों पर नेगेटिव रिटर्न दिए हैं। कुंभ मेले की औसत अवधि 52 दिन होती है और पिछले 6 मेलों के आंकड़ों के मुताबिक, सेंसेक्स में इस दौरान औसतन 3.42% की गिरावट दर्ज की गई है।

उदाहरण के लिए, 2021 के कुंभ मेले में, जो 1 अप्रैल से 19 अप्रैल 2021 तक हरिद्वार में चला था, इस करीब 18 दिनों की अवधि में सेंसेक्स में 4.16% की गिरावट आई थी। सबसे बड़ी गिरावट 2015 के कुंभ मेले में आई थी, जो 14 जुलाई से 28 सितंबर 2015 तक नासिक में चला था। सेंसेक्स में इस दौरान 8.29% की गिरावट आई थी। वहीं 2004 के उज्जैन कुंभ मेले, 5 अप्रैल से 4 मई, करीब 29 दिनों के दौरान 3.29% की गिरावट आई थी।


2010 का हरिद्वार कुंभ मेला 14 जनवरी से 28 अप्रैल तक चला था और इस दौरान सेंसेक्स में 1.16 फीसदी की गिरावट आई थी। यह पिछले 6 कुंभ मेले में आई सबसे कम गिरावट है। प्रयागराज में इससे पहले 2013 में कुंभ हुआ था, जो 14 जनवरी से 11 मार्च तक चला और इस दौरान सेंसेक्स में 1.31 फीसदी की गिरावट आई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि "कुंभ मेला शेयर बाजार के निवेशकों को भी अपनी गलतियों को सुधारने और एक नई शुरुआत करने का मौका देता है। तेजी वाले बाजार यानी बुल मार्केट के दौरान निवेशक अक्सर जल्द मुनाफा कमाने के चक्कर में कई गलतियां कर बैठते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, निवेशकों को अपनी गलतियों का एहसास तब तक नहीं होता, जब तक कि बाजार में कोई करेक्शन या गिरावट न आ जाए। जैसे तीर्थयात्री गंगा में डुबकी लगाकर पवित्रता का अनुभव करते हैं। वैसे ही यह गिरावट भी निवेशकों के लिए एक 'रीसेट' की तरह काम करती है।"

दिलचस्प बात यह है कि कुंभ मेले के दौरान सेंसेक्स में गिरावट देखने को मिलती है, लेकिन उसके बाद बाजार में उछाल देखने को मिलता है। कुंभ खत्म होने के 6 महीने बाद, सेंसेक्स ने पिछले छह में से पांच मौकों पर पॉजिटिव रिटर्न दिया है और इसका औसत रिटर्न इस दौरान 8% का रहा है, जो अपने आप में काफी अच्छा रिटर्न है।

कुंभ के दौरान और उसके बाद शेयर बाजार के इस अजीबोगरीब ट्रेंड के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अपूर्व सेठ ने कहा कि कुंभ मेले के दौरान लाखों की संख्या में भारतीय भाग लेते हैं। इसके चलते कंज्पशन पैटर्न में अस्थायी रूप से एक बदलाव देखने को मिलता है और कुछ सेक्टर्स में आर्थिक गतिविधियां भी कम हो सकती है। शेयर बाजार पर भी शायद इसका असर हो। इसके अलावा ऐसे पर्व लोगों को मोहमाया से दूर जड़ों की ओर ले जाने वाले होते हैं, जो अनजाने में निवेशकों के जोखिम लेने के विचार को प्रभावित कर सकते हैं।

कुंभ मेले का आयोजन बृहस्पति ग्रह के 12 साल के चक्र और उसकी ग्रह स्थिति के आधार पर होता है। यह संकेत देता है कि इंसानों के व्यवहार की तरह ही शेयर बाजार की चाल भी कई बार आर्थिक तर्कों से परे हटकर दूसरे कारणों से प्रभावित होती है। ऐसे में निवेशकों को हमेशा शेयर बाजार में निवेशक में सर्तकता बरतनी चाहिए।

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