केवी कामत को बैंकिंग सेक्टर का व्यापक अनुभव है। आईसीआईसीआई के बदलाव और बाद में आईसीआईसीआई बैंक में उसके विलय में कामत की बड़ी भूमिका थी। 2015 से 2020 के बीच उन्होंने चीन में न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाई। 2020 में वह नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (एनएबीएफआईडी) की स्थापना के लिए इंडिया लौट आए। अभी वह जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के भी चेयरमैन हैं। 76 साल के कामत ने मनीकंट्रोल से बातचीत में इंडियन इकोनॉमी सहित कई मसलों पर व्यापक चर्चा की।
इंडिया जितनी बेहतर प्रदर्शन वाली दूसरी इकोनॉमी नहीं
उन्होंने कहा कि अभी दूसरी कोई इकोनॉमी नहीं है, जिसका प्रदर्शन इंडिया जितना बेहतर है। मुझे इंडिया जैसी बेहतर प्रदर्शन वाली इकोनॉमी की तलाश करने में दिक्कत आती है। इंडिया के लिए लंबी अवधि में ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं। यह लंबी अवधि 25 साल की है। इंडिया दुनिया में सबके लिए आर्थिक रूप से अहम होने जा रहा है। इंडिया ने इनफ्लेशन से बहुत अच्छी तरह से निपटा है।
चीन की इकोनॉमी के लिए राहत पैकेज जरूरी
क्या चीन में राहत पैकेज का इंडिया पर असर पड़ेगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि चीन की सरकार की कोशिश चाइनीज इकोनॉमी को फिर से तेज ग्रोथ के रास्ते पर लाने की है। चीन जैसी बड़ी इकोनॉमी जो करीब 18 लाख करोड़ डॉलर की है, राहत पैकेज जरूरी है। दुनिया में जिस तरह की घटनाएं घट रही है, उसमें राहत पैकेज चीन की इकोनॉमी को मजबूत बनाने का एक उपाय हो सकता है।
आरबीआई ने इकोनॉमी का बेहतर प्रबंधन किया
आरबीआई के बारे में उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने इकोनॉमी का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया है। सरकार और आरबीआई के स्तर पर इकोनॉमी का प्रबंधन बहुत अच्छा रहा है। कोविड की शुरुआत के बाद से अचानक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया। आबीआई की कोशिश इकोनॉमी को सपोर्ट करने की रही। हर कदम सही दिशा में उठाया गया।
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जरूरत पड़ने पर कंपनियां पूंजीगत खर्च बढ़ाएंगी
पूंजीगत खर्च के बारे में उन्होंने कहा कि इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग एक प्रमुख एरिया होगा। मेरा मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में पूंजीगत खर्च होगा। जहां तक मैन्युफैक्चरिंग में प्राइवेट पूंजीगत खर्च की बात है तो यह दो चीजों पर निर्भर करता है। सबसे जरूरी यह कि कैपेसिटी बढ़ाने में कितना समय लगने वाला है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपना करियर शुरू किया था तो ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट में 5-6 साल का समय लगता था। आधुनिकीकरण के बाद दो से ढाई साल का समय लगता है। प्लांट के आधुनिकीकरण में एक साल से कम समय लगता है। अभी कंपनियों के पास अतिरिक्त क्षमता है।