LIC के शेयरों में तेजी टिक नहीं पा रही है। गुरुवार को फिर इस शेयर में गिरावट देखने को मिली। 1:06 बजे LIC के शेयर का भाव 1.13 फीसदी की गिरावट के साथ 660.70 रुपये था। इससे पहले इस हफ्ते इस शेयर में तेजी दिखी थी। एलआईसी के शेयरों के इस साल की उम्मीद किसी की नहीं थी। पिछले महीने आए LIC के आईपीओ में बड़ी संख्या में इसके पॉलिसीहोल्डर्स सहित रिटेल निवेशकों ने पैसे लगाए थे।
इनवेस्टमेंट बैंकर जेपी मॉर्गन इंडिया का मानना है कि LIC के शेयरों के साथ मार्केट ने अच्छा सलूक नहीं किया है। यह शेयर 20 जून को गिरकर 650 रुपये पर आ गया था। जेपी मॉर्गन ने एलआईसी के शेयरों के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। उसने इस शेयर के लिए 840 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है।
एलआईसी के शेयर 17 मई को लिस्टिंग के बाद से 30 फीसदी से ज्यादा गिर गए हैं। जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "एलआईसी के नए बिजनेस की वैल्यू इसकी मौजूदा पॉलिसीज का सिर्फ 1 फीसदी है। ओल्ड पॉलिसीज के लिए 99 फीसदी वैल्यू के साथ हमें इसका प्राइस-टू-इम्बेडेड वैल्यू (P/EV) 0.75 गुना दिखाई देता है, जो बहुत कम है। अगर हम ग्रोथ जीरो मान लें तो भी यह बहुत कम है।"
जेपी मॉर्गन ने कहा है कि हाल में LIC की ग्रोथ में तेजी आई है। इस फाइनेंशियल ईयर और अगले दो फाइनेंशियल ईयर में सालाना आधार पर इसकी ग्रोथ 6 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले चार महीने में एलआईसी के रिटेल प्रीमियम की ग्रोथ इंडस्ट्री के मुकाबले ज्यादा रही है। यह 2019 के मुकाबले ज्यादा है।
ब्रोकरेज फर्म Macquarie ने एलआईसी के शेयर के लिए 1000 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह इस शेयर के मौजूदा प्राइस से 34 फीसदी ज्यादा है। इस ब्रोकरेज फर्म ने 'न्यूट्रल' रेटिंग के साथ मई में इस शेयर की कवरेज शुरू की थी। Emkay Global Financial Services ने भी इस शेयर के प्राइस में बड़ी गिरावट के बावजूद अपनी रेटिंग 'न्यूट्रल' बनाए रखी है।
LIC का आईपीओ 3 मई को ओपन हुआ था। यह 9 मई को बंद हुआ। सरकार ने इस कंपनी में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 21,000 करोड़ रुपये हासिल किए थे। एंकर इनवेस्टर्स ने एलआईसी के 5.93 करोड़ शेयर खरीदे थे। कंपनी ने 949 रुपये पर इनवेस्टर्स को शेयर जारी किए थे। एंकर इनवेस्टर्स में ज्यादा घरेलू फंड्स थे।
LIC के आईपीओ में देश और विदेश के एंकर इनवेस्टर्स ने पैसे लगाए थे। इनमें गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर, एसबीआई म्यूचुअल फंड, HDFC Mutual Fund और एक्सिस म्यूचुअल फंड शामिल थे। लेकिन, ज्यादा निवेश घरेलू म्यूचुअल फंडों ने किया था। इस इश्यू में म्यूचुअल फंड की 99 स्कीमों में 4000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे थे।
इस इश्यू में LIC के पॉलिसीहोल्डर्स ने खूब दिलचस्पी दिखाई थी। पॉलिसीहोल्डर्स का कोटा छह गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसकी वजह डिस्काउंट था। कंपनी ने अपने पॉलिसीहोल्डर्स को प्रति शेयर 60 रुपये का डिस्काउंट दिया था। रिटेल इनवेस्टर्स को प्रति शेयर 45 रुपये का डिस्काउंट मिला था। इस वजह से रिटेल इनवेस्टर्स ने भी इस इश्यू में अच्छी दिलचस्पी दिखाई थी।