LIC के शेयरों का आखिर क्या होगा? इस आईपीओ में बोली लगाने वाले इनवेस्टर्स की चोट पर मरहम कौन लगाएगा? शुक्रवार को भी इस शेयर में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। यह 1.11 फीसदी गिरकर 831 रुपये पर आ गया। कंपनी ने इनवेस्टर्स को 949 रुपये के प्राइस पर शेयर अलॉट किए थे। इश्यू प्राइस से यह शेयर 118 रुपये गिर गया है। एलआईसी ड्रीम आईपीओ था। फिर, इसकी ऐसी हालत क्यों हो रही है?
एलआईसी ने अपने पॉलिसीहोल्डर्स को ही सबसे ज्यादा चूना लगाया है। दरअसल, उसने पॉलिसीहोल्डर्स को प्रति शेयर 60 रुपये का डिस्काउंट दिया था। एक तो देश की सबसे बड़ी और पुरानी इंश्योरेंस कंपनी के रूप में एलआईसी का दमदार ब्रांड और दूसरा यह डिस्काउंट। दोनों ने मिलकर पॉलिसीहोल्डर्स पर जादू कर दिया। उन्होंने जमकर इस आईपीओ में बोली लगाई। पॉलिसीहोल्डर्स का कोटा छह गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हो गया। 60 रुपये डिस्काउंट के बाद उन्हें एक शेयर का प्राइस 889 रुपये पड़ा। अब 831 रुपये भाव आ जाने पर उनके पास इस शेयर को रखने के अलावा दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है।
रिटेल इनवेस्टर्स को एलआईसी ने प्रति शेयर 45 रुपये का डिस्काउंट दिया था। डिस्काउंट के बाद उन्हें एक शेयर का प्राइस 904 रुपये पड़ा था। यही प्राइस एलआईसी के एप्लॉयीज के लिए भी है, क्योंकि उन्हें भी प्रति शेयर 45 रुपये का डिस्काउंट मिला था। अब प्रति शेयर उन्हें 73 रुपये का लॉस हो रहा है। यह शेयर मंगलवार को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुआ था।
लिस्टिंग के दिन एलआईसी का शेयर करीब 8 फीसदी गिरकर बंद हुआ था। उसके बाद से लगातार गिर रहा है। अब इनवेस्टर्स यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह गिरकर कहां तक जाएगा। उन्हें इस गिरावट का कोई अंत नजर नहीं आ रहा। विनिवेश विभाग के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने लिस्टिंग के दिन कहा था कि इनवेस्टर्स को यह शेयर मीडियम से लेकर लॉन्ग टर्म तक रखना चाहिए।
सवाल है कि जिन पॉलिसीहोल्डर्स ने उधार लेकर इस शेयर में इनवेस्ट किया था, उनका क्या होगा? दरअसल, उन्हें एलआईसी के ब्रांड पर भरोसा था। एलआईसी के सरकारी कंपनी होने पर उन्हें इस आईपीओ पर भरोसा था। लेकिन, अब तो न कुछ सरकार कह रही है और न ही एलआईसी। इसके चलते इस आईपीओ में पैसे लगाने वाले पॉलिसीहोल्डर्स उलझन में हैं।