स्टॉक मार्केट में अब तक कई फ्रॉड हो चुके हैं। इनमें हर्षद मेहता से लेकर को-लोकेशन स्कैम शामिल हैं। लेकिन, हम जिस स्कैम के बारे में बताने जा रहे हैं, उसके बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे। आपने सोचा भी नहीं होगा कि आज के जमाने में कोई कंपनी ऐसा साहस कर सकती है।
यह फ्रॉड ऊर्जा ग्लोबल (Urja Global) से जुड़ा है। इस कंपनी के एग्जिक्यूटिव्स को सेबी ने स्टॉक मार्केट में ऑपरेट करने से रोक दिया है। सेबी ने इस फ्रॉड के बारे में अपने ऑर्डर को अपनी वेबसाइट पर लोड किया है। यह फ्रॉड करीब तीन साल पहले हुआ था। ज्यादातर लोगों को इस फ्रॉड के बारे में पता नहीं है। इसकी वजह यह है कि ऊर्जा ग्लोबल एक छोटी कंपनी है।
उर्जा ग्लोबल ने जापान की कंपनी निप्पॉन शिनयाकु कंपनी लिमिटेड से समझौता किया था। उसने इस समझौते के बारे में 13 जुलाई, 2019 को बीएसई को बताया था। इसमें कहा गया था कि ऊर्जा ग्लोबल पांच साल तक निप्पॉन को एक प्रोडक्ट की सप्लाई करेगी, जिसका नाम Zacobite है। उसकी खरीद मूल्य 6.5 करोड़ डॉलर था। उसे (ऊर्जा) इस पर 10 फीसदी का कमीशन मिलने वाला था।
क्या आपने Zacobite के बारे में सुना है? आपने नहीं सुना होगा। इसकी वजह यह है कि इस नाम का कोई प्रोडक्ट या केमिकल है नहीं। गूगल सर्च में भी आपको इसके बारे में कुछ नहीं मिलेगा। पीरियोडिक टेबल में भी इसका नाम नहीं है। दरअसल, जब ऐसे किसी केमिकल का वजूद ही नहीं है तो फिर उसके बारे में आपको कैसे पता चलेगा। ऊर्जा ग्लोबल और निप्पॉन शिनयाकु की वेबसाइट पर भी इसका जिक्र नहीं है। पिछले तीन साल की ऊर्जा ग्लोबल की एनुअल रिपोर्ट्स में भी इसकी चर्चा नहीं है।
अब देखिए Zacobite का कमाल। जैकोबाइट के चलते ऊर्जा ग्लोबल की पावर अचानक बढ़ गई। इसके बारे में कंपनी के ऐलान करने के तीन दिन के अंदर उसके शेयर का प्राइस 2.17 रुपये से बढ़कर 3.05 रुपये पहुंच गया। 12 जुलाई को ऊर्जा के शेयरों का वॉल्यूम सिर्फ 1.6 लाख था। 16 जुलाी को यह बढ़कर 93.4 लाख पर पहुंच गया। इसे आप क्या कहेंगे? इनवेस्टर्स ने जैकोबाइट की सच्चाई जाने बगैर ऊर्जा के शेयर खरीदने शुरू कर दिए।
सेबी अपनी जांच में यह कनफर्म नहीं कर सका है कि ऊर्जा के शेयरों में आए उछाल से उसके एग्जिक्यूटिव्स को फायदा हुआ था या नहीं। लेकिन, उसने इस कंपनी के चार एग्जिक्यूटिव्स को दो साल के लिए स्टॉक मार्केट में ऑपरेट करने से रोक दिया है। उधर, जापान की कंपनी निप्पॉन ने Zacobite की सप्लाई के लिए ऊर्जा के साथ किसी तरह के समझौते से इनकार किया है।