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LIC की लिस्टिंग के बाद सरकार एक साल तक दोबारा शेयर नहीं बेचेगी, जानिए क्यों?

पांच फीसदी के नियम का मतलब है कि इश्यू 35,000 करोड़ रुपये का होगा, जिससे बाजार का रिस्पॉन्स कम रह सकता है। ब्लूमबर्ग ने 22 अप्रैल को कहा था सरकार एलआईसी के आईपीओ का आकार 40 फीसदी घटाकर 55,000-60,000 से 30,000 करोड़ रुपये कर सकती है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 25, 2022 पर 2:32 PM
LIC की लिस्टिंग के बाद सरकार एक साल तक दोबारा शेयर नहीं बेचेगी, जानिए क्यों?
अभी इश्यू के बाद ऑफर प्राइस पर कैलकुलेशन से कंपनी का कैपिटल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है तो उसके लिए 5,000 करोड़ रुपये मूल्य के या पांच फीसदी हिस्सेदारी के बराबर शेयर इश्यू करना जरूरी है।

सरकार 12 मई तक LIC का आईपीओ लाना चाहती है। इसकी वजह यह है कि इस तारीख के बाद अगर आईपीओ आता है तो सरकार को फिर से सेबी को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करना होगा। सरकार लिस्टिंग के एक साल बाद तक फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) नहीं लाना चाहती है। इसके लिए उसने सेबी से एप्रूवल मांगा है।

सूत्रों ने सीएनबीसी-टीवी18 को बताया है कि सरकार ने अनिवार्य पांच फीसदी लिस्टिंग फ्लोट के नियम से छूट के लिए सेबी से रिक्वेस्ट किया है। दरअसल, सरकार ने एलआईसी के आईपीओ का साइज घटा दिया है। इसे 5 फीसदी से घटाकर 3.5 फीसदी कर दिया है। इसकी मतलपब है कि सरकार अब एलआईसी में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी।

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अभी इश्यू के बाद ऑफर प्राइस पर कैलकुलेशन से कंपनी का कैपिटल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है तो उसके लिए 5,000 करोड़ रुपये मूल्य के या पांच फीसदी हिस्सेदारी के बराबर शेयर इश्यू करना जरूरी है। अगर इस कैलकुलेशन से बड़ी कंपनी के ऑफर का साइज इस सीमा से कम रहता है तो उसे सेबी से इसकी इजाजत लेनी होगी।

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