SEBI on LTCG Tax: LTCG टैक्स को लेकर पिछले कई दिनों से हलचल तेज है। बीतें दिनों वित्त मंत्री के एक इशारे के बाद से मार्केट और निवेशकों के बीच खुशी का माहौल है। अब बाजार नियामक सेबी ने भी केंद्र सरकार को एक बड़ा प्रस्ताव भेजा है। दो सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI ने आगामी बजट से पहले सिफारिश की है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs/FPIs) पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए।
इसके साथ ही, सेबी ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी बड़ी राहत देने का सुझाव दिया है, ताकि रिटेल निवेशक लंबे समय तक भारतीय बाजार में बने रहें। वैसे ये सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं और अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय और केंद्र सरकार को ही लेना है। लेकिन भारतीय शेयर बाजार को फिर से नई रफ्तार देने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ये प्रस्ताव काफी अहम माना जा रहा है।
विदेशी निवेशकों पर टैक्स का बोझ कम करने की कोशिश
पिछले दो वर्षों में भारतीय इक्विटी बाजार ने अन्य उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। इस दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से लगभग 31 बिलियन डॉलर की रिकॉर्ड बिकवाली की है।
सेबी द्वारा पिछले दो सालों में FIIs के साथ की गई बैठकों में निवेशकों की सबसे बड़ी शिकायत भारत का जटिल और हाई टैक्स स्ट्रक्चर था:
मौजूदा टैक्स दरें: वर्तमान में भारतीय बाजारों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को 1 साल से अधिक समय तक शेयर रखने पर 12.5% LTCG टैक्स और 1 साल से कम समय पर 20% STCG टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और डिविडेंड पर विदहोल्डिंग टैक्स भी लागू होता है।
ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान: ब्रोकरेज फर्म IIFL के अनुसार, अगर सरकार कैपिटल गेन्स टैक्स को हटाती है तो विदेशी निवेशकों का रिटर्न 2.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकता है। वहीं जेफरीज का मानना है कि इससे भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह तेज होगा।
घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्या है खास प्रस्ताव?
रिटेल निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए SEBI ने सुझाव दिया है कि अगर कोई निवेशक एक म्यूचुअल फंड योजना से पैसा निकालकर दूसरी योजना में स्विच करता है, तो उसे टैक्स योग्य बिक्री न माना जाए, बशर्ते उसने उन यूनिट्स को कम से कम 1 साल तक होल्ड किया हो।
पिछले दो सालों में जहां MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स 40% चढ़ा है, वहीं निफ्टी 50 में लगभग 4.8% की गिरावट आई है। मॉर्निंगस्टार के आंकड़ों के अनुसार, लार्ज-कैप म्यूचुअल फंड्स का औसतन रिटर्न 1.6% घटा है।
वर्तमान में भारतीय म्यूचुअल फंड्स का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹82.6 लाख करोड़ पर पहुंच चुका है, जिसमें हर महीने लगभग ₹3,000 करोड़ का नया निवेश आ रहा है।