LTM Share Price: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपीमॉर्गन ने एलटीएम (पूर्व नाम एलटीआईमाइंडट्री) के शेयरों की रेटिंग को ओवरवेट से घटाकर न्यूट्रल की तो इसके शेयर धड़ाम हो गए। बीएसई पर ढाई फीसदी से अधिक फिसलकर यह एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। ब्रोकरेज फर्म ने इसके शेयरों के टारगेट प्राइस में भी कटौती की है। ऐसे में शेयरों दबाव दिखा। निचले स्तर पर शेयरों ने संभलने की कोशिश की लेकिन अब भी यह काफी कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 0.37% की गिरावट के साथ ₹3994.40 पर है। इंट्रा-डे में यह 2.69% टूटकर ₹3,901.45 तक आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। 19 जनवरी 2026 को यह एक साल के हाई ₹6430.00 पर था। इसे कवर करने वाले 43 एनालिस्ट्स में से 24 ने खरीदारी, 13 ने होल्ड और 6 ने सेल रेटिंग दी है।
LTM के शेयरों का क्या है टारगेट प्राइस?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपीमॉर्गन ने एलटीएम की रेटिंग को डाउनग्रेड कर ओवरवेट से न्यूट्रल कर दिया है। साथ ही ब्रोकरेज फर्म ने इसका टारगेट प्राइस भी ₹5100 से 12% घटाकर ₹4500 कर दिया है। यह एक साल के निचले स्तर से 15% अधिक है तो एक साल के हाई से 30% नीचे है।
इस कारण JP Morgan ने घटाई रेटिंग
जेपीमॉर्गन ने एलटीएम की रेटिंग और टारगेट प्राइस में कटौती ऐसे समय में की है, जब कंपवी ने यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में रैंडस्टड (Randstad) के टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग सर्विसेज बिजनेस के अधिग्रहण के प्रस्ताव का ऐलान किया है। जेपीमॉर्गन के एनालिस्ट्स ने इस डील के वित्तीय प्रभाव को लेकर सतर्कता जताई है। 16 करोड़ यूरो का अधिग्रहण भाव EV/सेल्स मल्टीपल के हिसाब से सिर्फ 0.34x पर है लेकिन जेपीमॉर्गन के मुताबिक इसे प्रॉफिट मल्टीपल्स खासतौर से 8x EBITDA और 13x-15x EBIT के हिसाब से देखें तो यह डील काफी महंगी दिख रही है। ये मल्टीपल्स वैश्विक और यूरोपियन पियर के समान स्तर पर हैं।
ब्रोकरेज फर्म को सबसे बड़ी चिंता एलटीएम के मुनाफा पर झटके की आशंका को लेकर है। जिन कंपनियों का अधिग्रहण किया जा रहा है, उन्हें पिछले साल 2025 में 46.9 करोड़ यूरो का रेवेन्यू हासिल हुआ था, लेकिन पिछले दो वर्षों में इनके परफॉरमेंत में तेज गिरावट दिखी थी। इसके अलावा बिजनेस के ऑनशोर-हेवी मॉडल होने के चलते इसका EBITDA मार्जिन फिलहाल सिर्फ 4%–5% है। जेपीॉर्गन के मुताबिक यह एलटीएम के लिए मार्जिन को बड़ा झटका दे सकता है। मैनेजमेंट का मानना है कि ईपीएस पर कोई असर नहीं दिखेगा लेकिन जेपीमॉर्गन का कैलकुलेशन है कि सिर्फ अधिग्रहण के चलते ही एमॉर्टाइजेशन कॉस्ट और ब्याज से कम इनकम को देखते हुए EPS में करीब 2% की गिरावट के आसार दिख रहे हैं।
ब्रोकरेज फर्म ने रणनीतिक तालमेल नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। एक तरफ एलटीएम का फोकस आईटी सर्विसेज पर है तो टारगेट कंपनियों का फोकस डिजिटल सर्विसेज और साइबर सिक्योरिटी पर है। इसके अलावा इंजीनियरिंग और आईटी सर्विसेज के अलग-अलग खरीद केंद्र यानी बाइंग सेंटर्स होने के चलते क्रॉस-सेलिंग की संभावनाएं भी सीमित रह सकती हैं।
ब्रोकरेज फर्म ने यह भी आशंका जताई है कि यह अधिग्रहण इस बात का संकेत हो सकता है कि ऑर्गेनिक ग्रोथ के मौके कम हो रहे हैं, जिससे मैनेजमेंट को स्पष्ट और रणनीतिक क्षमताएं जोड़ने की बजाय कंपनी के विस्तार के लिए “असामान्य अधिग्रहण” करने पड़ रहे हैं। इसी वजह से जेपीमॉर्गन ने एलटीएम के ऑर्गेनिक रेवेन्यू और ईपीएस ग्रोथ अनुमान में 1%–2% की कटौती कर दी है तो टारगेट P/E मल्टीपल भी 21x से घटाकर 19x कर दिया है। ब्रोकरेज ने इस बात को लेकर भी चेतावनी दी है कि अधिग्रहण का काम वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही तक लंबा खिंचने से मैनेजमेंट का ध्यान भटक सकता है, जिससे नियर टर्म में कंपनी के एग्जीक्यूशन पर दबाव पड़ सकता है।
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