Mamaearth की लिस्टिंग से D2C मार्केट में हलचल, इस सेक्टर की दूसरी कंपनियां भी मौके की तलाश में

परंपरागत ब्रांडों को भी अब डी2सी बाजार की क्षमताओं और संभावनाओं का आभास हो गया है। वे भी इसका फायदा उठाने के लिए कदम उठा रहे हैं। उदाहरण के लिए, डाबर के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने 3 अगस्त को एक अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा था कि डी2सी सेक्टर में कदम रखने से कंपनी को हाई-एंड बाजारों में अपनी पैठ बढ़ाने और शहरी क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी

अपडेटेड Nov 07, 2023 पर 6:29 PM
मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बेबी प्रोडक्ट रिटेलर फर्स्टक्राई भी आईपीओ लाने की संभावनाएं तलाश रही है
     
     
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    Mamaearth listing : डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C)स्पेस एक बिजनेस हॉटस्पॉट में बदल गया है। इस सेक्टर में तामम कंपनियां कदम रखने की तैयारी में। इस सेक्टर में बड़ी मात्रा में निवेश आता दिख रहा है। एक D2C ब्रैंड मामाअर्थ (Mamaearth) ने 7 नवंबर को बाजार में अपनी लिस्टिंग भी कर ली है। इसके सार्वजनिक निर्गम ने पूरे D2C निवेश कम्युनिटी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। मामाअर्थ के बाद अब D2C सेक्टर में कई आईपीओ आने के लिए तैयार हैं।

    अर्ली स्टेज वेंचर कैपिटल फर्म इंडियाकोशेंट (IndiaQuotient) के जनरल पार्टनर आनंद लुनिया का कहना है कि मामाअर्थ के आईपीओ ने वास्तव में डी2सी सेक्टर में तामम अवसर के द्वार खोल दिए हैं। पब्लिक मार्केट को जिलेट, कोलगेट और जॉकी जैसे ब्रांड पसंद आए हैं। बाजार ने इनको बहुत ऊंचे वैल्यूएशन दिए हैं। अब यह देखने की बात होगी कि क्या मामाअर्थ अगले कुछ सालों में इन लिस्टेड ब्रैंड्स के 10 गुना रेवेन्यू मल्टीपल्स की बराबरी कर पाएगा की नहीं। बताते चलें की इंडियाकोशेंट शुगर और फैबएली जैसे डी2सी स्टार्टअप में निवेश कर रखा है।

    परंपरागत ब्रांडों को भी अब डी2सी बाजार की क्षमताओं और संभावनाओं का आभास हो गया है। वे भी इसका फायदा उठाने के लिए कदम उठा रहे हैं। उदाहरण के लिए, डाबर के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने 3 अगस्त को एक अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा था कि डी2सी सेक्टर में कदम रखने से कंपनी को हाई-एंड बाजारों में अपनी पैठ बढ़ाने और शहरी क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि पारंपरिक ब्रांडों के पास अधिग्रहण करने और डी2सी सेक्टर में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए पैसा भी है।


    मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि D2C ब्रांडों के अधिग्रहण से इन पहले से स्थापित कंपनियों को खास तरह का फायदा मिलता है। अमतौर पर जब कंपनियां नए प्रोडक्ट पेश करती हैं तो उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से उन्हें ब्रांड के मौजूदा वैल्यू से जोड़ते हैं। इसके विपरीत, D2C ब्रांडों को अक्सर युवा जनसंख्या के लिए ज्यादा इनोवेटिव और अपीलिंग माना जाता है।

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    D2C ब्रांड के अधिग्रहण से पारंपरिक कंपनियों को अपने कारोबार को बढ़ावा देने के लिए नया प्लेटफार्म मिलता है साथ ही उन्हों नए जमाने के टेक सैवी ग्राहकों में पैठ बढ़ाने का मौका मिलता है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) जैसे कुछ पारंपरिक ब्रांडों ने उपभोक्ताओं को सीधे सेवा देने के लिए अपने खुद के कई डी2सी प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं। एचयूएल ने यूएसहॉप प्लेटफॉर्म और 11 दूसरी ब्रांड-स्पेसिफिक वेबसाइटें शुरू की हैं। इसके अलावा एचयूएल के आईसी नाउ प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को स्थानीय डिलीवरी एप्लिकेशन के जरिए होम डिलीवरी के लिए आइसक्रीम ऑर्डर करने की सुविधा मिलती है।

    मामाअर्थ के बाद अब D2C सेक्टर में कई आईपीओ आने के लिए तैयार हैं। हालांकि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड बोट ने बाजार में उथल-पुथल के चलते अपने आईपीओ में देरी की है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बेबी प्रोडक्ट रिटेलर फर्स्टक्राई भी आईपीओ लाने की संभावनाएं तलाश रही है। आईवेयर रिटेलर लेंसकार्ट भी अपने हालिया फंडिंग राउंड में 4.5 बिलियन डॉलर के वैल्यूएशन तक पहुंचने के बाद शेयर बाजार में कदम रखने के लिए तैयार है।

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