Market Insight : बढ़ती US बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की आग में बाजार झुलसता दिख रहा है। निफ्टी ने इंट्राडे में आज 23250 का अहम लेवल भी तोड़ दिया तो बैंक निफ्टी 1 फीसदी टूटकर 56000 के नीचे चला गया। मिड और स्मॉलकैप में भी भारी बिकवाली आई है। क्रूड 108 डॉलर के पार चला गया है। उधर इंडिया VIX 6 फीसदी उछला है। US में दरे बढ़ने की आशंका से रेट सेंसटिव शेयरों के सेंटिमेंट बिगड़ गए हैं। रियल्टी,ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है। रियल्टी इंडेक्स करीब 4 फीसदी नीचे है। गोदरेज और प्रेस्टीज 5 फीसदी तक गिरे हैं। हालांकि IT शेयर संभलने की कोशिश कर रहे हैं।
US में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी के करीब पहुंचने से मेटल और गोल्ड फाइनेंस कंपनियों पर प्रेशर है। मेटल इंडेक्स करीब 2.5 फीसदी टूटा है। HINDALCO, HIND ZINC, हिंद कॉपर, NALCO 5 फीसदी तक नीचे आए हैं। सोने में गिरावट से मुथूट और मणप्पुरम भी टूटे हैं।
क्या आज होगा टोटल ब्रेक डाउन ?
बाजार पर बात करते हुए CNBC-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि उनका लगातार इंडेक्स पर शॉर्ट रहने का नजरिया रहा है। बाजार इस समय एक बड़े मैक्रो दिक्कत में है। इसीलिए निफ्टी और बैंक निफ्टी में बड़ी गिरावट आ रही है। लेकिन ऐसा नहीं है कि बाजार खराब है। मिडकैप,स्मॉलकैप और IPOs में पैसा बन रहा है। आज सुबह-सुबह बॉन्ड बाजार और कच्चे तेल से डराने वाले संकेत मिले हैं। आज शाम को US रिटेल महंगाई डाटा भी आना है। ऐसे में बड़ा सवाल ये कि बाजार दरों में बढ़ोतरी को कितना पचा चुका है और अगर वाकई US में दरों में बढ़ोतरी हुई तो क्या हम और गिरेंगे या ये भाव में शामिल हो चुका है?
निफ्टी: कहां तक गिर सकते हैं हम?
निफ्टी में इस साल 2 बड़े बॉटम बने थे। युद्ध के तुरंत बाद 22,331 और मई में 23,123 (क्लोजिंग लेवल)। क्लोजिंग आधार पर हम 24,774 तक चले थे। मई के स्तर से जो रैली हुई उसका हम 81% गिर चुके हैं। ऐसे में वापस 23,100-23,200 जाने का रिस्क होगा। युद्ध के बाद वाले लो की रैली का भी हम 55% रिट्रेस हो चुके हैं और उसका 61.8% रिट्रेसमेंट लेवल आएगा करीब 23,264 पर। यानी कि कुल मिला कर 23,100-23,300 पत्थर की लकीर है। अगर 23,100-23,300 टूटा तो 22,300 भी रिस्क पर होगा।
आज बैंक और IT दोनों के गिरने के संकेत हैं। निफ्टी IT पर हमने एकदम सही समय पर Bullish नजरिया खत्म किया। इस महीने निफ्टी IT 7% से ज्यादा गिर चुका है और वापस निफ्टी IT में अब पैसा बेच कर बन रहा है। बैंक और NBFCs में आज कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड की दोहरी मार है। HDFC बैंक अब इस साल 30% गिर चुका है। अब तो HDFC बैंक के पक्के निवेशक भी उम्मीद छोड़ रहे हैं। दिक्कत यह है कि ICICI बैंक और SBI भी साथ नहीं दे रहे हैं। आज मेटल की रैली भी बुरी तरह से फेल हो सकती है। गोल्ड फाइनेंस कंपनियों में फिर बड़ी गिरावट का रिस्क रहेगा। हिंद जिंक पर कल हमने इंट्राडे में मुनाफावसूली का नजरिया रखा था। आज बाकी मेटल शेयरों में भी तेज गिरावट आ सकती है। छुपने की जगह इस समय सिर्फ फार्मा और हेल्थकेयर में है। इसके अलावा आज NSE के IPO पर नजर रहेगी।
NSE IPO 17-21 सितंबर के बीच खुला रहेगा। इसका प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपए और इश्यू साइज 22,569 करोड़ (पूरी तरह OFS) तय किया गया है। कंपनी का मार्केट कैप 4.42 लाख करोड़ रुपए है। NSE के वैल्युएशन की बात करें तो 1,785 रुपए प्रति शेयर पर वैल्युएशन करीब 42.9x Trailing FY26 P/E होता है। SE का मौजूदा P/E करीब 54x FY26 EPS पर है। NSE के फाइनेंशियल पर नजर डालें तो FY26 में इसकी आय 16,601 करोड़ रुपए, EBITDA मार्जिन 76% और मुनाफा 10,302 करोड़ रुपए रहा।
NSE कैपिटल मार्केट सेक्टर का सबसे बड़ा शेयर है। ध्यान रहे इसमें लगभग 6 महीने तक फ्लोटिंग स्टॉक काफी सीमित रहेगा। प्री-IPO निवेशकों के लिए 6 महीने का Lock In है और 4.5% इश्यू में से करीब 1.5% एंकर निवेशकों का होगा। एंकर निवेशक भी 1 महीने तक नहीं बेच पाएंगे। NSE का असली टेस्ट लिस्टिंग के 6 महीने बाद होगा। NSE का सबसे बड़ा रिस्क है F&O वॉल्यूम का तेजी से नीचे आना और यही कारण है कि BSE अपने हाई से काफी गिर चुका है। NSE भी Unlisted मार्केट में 2200 रुपए तक गया था और वहां से गिरा है।
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