Market Insight : पश्चिम एशिया संकट से नर्वस नहीं बाजार, न्यू एज,स्मॉल और मिडकैप शेयरों में है दम-समीर अरोड़ा
Market Insight : समीर अरोड़ा ने कहा कि वेस्ट एशिया के चलते बाजार की स्टोरी बदली है। वेस्ट एशिया संकट की वजह से पैनिक नहीं आएगा। एक ही तरह की खबर पर लोग दूसरी बार ज्यादा तनाव नहीं लेते हैं। इस बार US-ईरान जंग से उतना निगेटिव सेंटिमेंट नहीं है। बाजार चल पड़ा था,FIIs फ्लो शुरू हुआ था,करेंसी स्टेबल हो गई थी लेकिन ईरान-US की लड़ाई फिर शुरू होने से बाजार को धक्का लगा है
Market Insight: समीर अरोड़ा ने कहा कि चीन प्लस वन मैन्युफैक्चरिंग थीम में निवेश के मौके हैं। EMS और डिफेंस जैसे स्पेस मैन्युफैक्चरिंग में बेहतर हैं। लोग मैन्युफैक्चरिंग में चीन का विकल्प देख रहे हैं
Market Insight : कुछ दिन पहले लग रहा था कि वेस्ट एशिया में बात बन जाएगी लेकिन जियोपॉलिटिक्स ने ऐसी करवट ली कि समंदर से लेकर शेयर बाजार तक फिर कोहराम मच गया। ईरान में फिर बारूद बरस रहा है। हॉर्मुज पर कब्जे की जंग और ट्रंप की टैक्स वसूली की जिद ने कच्चे तेल में भयंकर आग लगा दी है। क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर उबल रहा है, रुपया बेहाल है। कहां हम शांति और FIIs की वापसी की उम्मीद कर रहे थे और कहां फिर बाजार एक बार फिर नर्वस मोड में खड़ा है। जब हालात इतने तेजी से बदल रहे हों तब दलाल स्ट्रीट के बड़े फंड मैनेजर्स क्या कर रहे हैं? वो इस गिरावट में क्या खरीद रहे हैं और उनका आगे का क्या गेम प्लान है ये जानना जरूरी है। मार्केट के आउटलुक पर बात करने के लिए आज हमारे साथ जुड़े हेलियस कैपिटल के फाउंडर और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा।
समीर अरोड़ा की राय
वेस्ट एशिया के चलते बाजार की स्टोरी बदली है। वेस्ट एशिया संकट की वजह से पैनिक नहीं आएगा। एक ही तरह की खबर पर लोग दूसरी बार ज्यादा तनाव नहीं लेते हैं। इस बार US-ईरान जंग से उतना निगेटिव सेंटिमेंट नहीं है। बाजार चल पड़ा था,FIIs फ्लो शुरू हुआ था,करेंसी स्टेबल हो गई थी लेकिन ईरान-US की लड़ाई फिर शुरू होने से बाजार को धक्का लगा है। अब बाजार की मार्च जैसी स्थिति नहीं होगी। US-ईरान की लड़ाई से रिस्क जरूर बढ़ा है। जंग जल्द खत्म होने की उम्मीद है। ट्रंप लंबी लड़ाई नहीं चाहते।
भारत के फंडामेंटल पहले जैसे ही, भारत में कुछ नहीं बदला
कुल मिलाकर 4-5 साल में बाजार का प्रदर्शन ठीक था। द.कोरिया,ताइवान के रिटर्न के साथ तुलना कर लोग दुखी हुए। टॉप की कंपनी को भी शॉर्ट कर खुश होते हैं,जिनपर पहले लॉन्ग थे। पिछले डेढ़-दो साल से अंडरपरफॉमेंस दिखा। अंडरपरफॉमेंस की लोग तरह तरह की वजहें ढूंढ रहे हैं। भारत के फंडामेंटल पहले जैसे ही हैं। भारत में कुछ नहीं बदला है।
अभी भी IT शेयरों से रहें दूर
समीर अरोड़ा ने बताया कि IT शेयरों में उन्होंनें निवेश को जीरो कर दिया है। शुरू में पेटीएम और जोमैटो में वेटेज 2-2.5% तक लिया। फंड का बड़ा हिस्सा किसी एक शेयर में नहीं लगाते। जीरो निवेश और ज्यादा निवेश के चक्कर में मौके छूटते हैं। पेटीएम और जोमैटो को सीमित रिस्क वाले स्टॉक की तरह लिया था। अभी IT में निवेश करना आम राय के खिलाफ जाने जैसा होगा। अभी भी IT शेयरों में निवेश नहीं करेंगे। कई लोग गिरावट में खरीदारी की रणनीति रखते हैं। लेकिन मार्केट और बिजनेस से जुड़ी अनिश्चितताएं अलग होती हैं।
AI से IT कंपनियों के अस्तित्व पर खतरा नहीं
जब मैनेजमेंट में 7-8% ग्रोथ का भरोसा दे तब IT में निवेश बेहतर होगा। 2-2.5% ग्रोथ पर निवेश करने में दिलचस्पी नहीं है। मार्केट के माहौल के चलते IT का प्राइस गिरा है। IT का बिजनेस पहले जैसा ही है,कुछ भी पॉजिटिव नहीं बदला है। ऐसा मानते हैं कि AI से प्रोग्रामिंग सस्ती होगी और इस्तेमाल बढ़ेगा। नई तकनीक के दौर में पुरानी कंपनियां गायब हो जाती हैं। IT कंपनियां ग्रोथ को लेकर कुछ खास नहीं कह रही हैं। अभी किसी को IT के बारे में कुछ पता नहीं। AI से IT कंपनियों के अस्तित्व पर खतरा नहीं है।
HDFC बैंक में बने रहने की रणनीति साबित हुई गलत
HDFC बैंक में बने रहने की रणनीति गलत साबित हुई है। HDFC बैंक में आमतौर पर 11-12% की ग्रोथ रहती थी। कम्बाइंड एंटिटी को फाइनेंसिंग में मुश्किलें आईं। दूसरे फंड के मुकाबले HDFC बैंक में कम रिटर्न मिला। HDFC बैंक में 5-6% होल्डिंग थी।
न्यू एज कंपनियों में करना चाहिए निवेश
न्यू एज कंपनियों में निवेश करना चाहिए। न्यू एज को सिर्फ घाटे वाली कंपनियों के तौर पर देखना ठीक नहीं है। चुनौतियों के बीच न्यू एज कंपनियां 8-10 साल से टिकी हैं। ई-कॉमर्स,क्विक कॉमर्स,ब्रोकर और EV जैसी न्यू एज कंपनियां हैं। S&P 500 में न्यू एज कंपनियों का वेट करीब 40% है। भारतीय बाजारों में न्यू एज कंपनियों का वेट 4% से भी कम है। पोर्टफोलियो में न्यू एज कंपनियों का 15-20% हिस्सा है।
चीन प्लस वन मैन्युफैक्चरिंग थीम में निवेश के मौके
चीन प्लस वन मैन्युफैक्चरिंग थीम में निवेश के मौके हैं। EMS और डिफेंस जैसे स्पेस मैन्युफैक्चरिंग में बेहतर हैं। लोग मैन्युफैक्चरिंग में चीन का विकल्प देख रहे हैं। आउट ऑफ चाइना पर दुनिया का फोकस है। भारत के पास घरेलू के साथ एक्सपोर्ट मार्केट में भी मौके हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपए को संभालना जरूरी
डॉलर के मुकाबले रुपए को संभालना जरूरी है। रुपए को संभालने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। FCNR (Foreign Currency Non-Resident)डिपॉजिट काफी आकर्षक है,काफी डिपॉजिट मिलेगा। FIIs का पैसा भी आ रहा है, गोल्ड इंपोर्ट भी गिरने लगा है।
स्टॉक मार्केट में AI बड़ा बबल नहीं
AI फ्यूचर है,स्टॉक मार्केट में AI बड़ा बबल नहीं है। AI में निवेश करने वाली कंपनियों में गिरावट है। गोल्ड सदियों से चल रहा है,बिटकॉइन में दिलचस्पी नहीं है। सरकारी के मुकाबले प्राइवेट बैंक ज्यादा पसंद हैं। आगे स्मॉलकैप सबसे ज्यादा चलेंगे। भारतीय निवेशक मिड-स्मॉलकैप फंड में ज्यादा पैसा लगाते हैं। इंडेक्स फंड से ज्यादा एक्टिव फंड पसंद है। उन्होंने यह भी बताया कि वे सैमसंग में निवेश करने से चूक गए थे।
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