Market Insight : इंट्राडे में 23,800 के नीचे फिसला निफ्टी, एनालिस्ट्स से जानिए अब इसे कहां मिलेगा सपोर्ट
Market Insight : एक ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि निफ्टी में अभी भी गिरावट का रुझान बना हुआ है। इसके लिए 23,600-23,800 के लेवल पर अहम सपोर्ट है। यह लेवल पहले का बड़ा गैप एरिया और जुलाई 2026 का निचला स्तर है
एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया की राय है कि तकनीकी तौर पर निफ्टी 24,150 के नीचे कमजोर बना हुआ है। अगर यह 23,950 के स्तर को तोड़ता है तो इसमें और गिरावट आ सकती है
Market Insight : 2 सितंबर को सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आई है । यह गिरावट ग्लोबल स्तर पर छाई कमजोरी के कारण हुई है। US-ईरान के एक दूसरे पर हमले के बाद बाजार का मूड बिगड़ गया है। इन हमलों से तेल की सप्लाई में रुकावट का खतरा बढ़ गया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं हैं और महंगाई की चिंता फिर से जाग गई है और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई है। इसका बाजार पर नगेटिव असर देखने को मिल रहा है।
दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स 610 अंक या 0.79% गिरकर 76,334.54 पर और निफ्टी 222.05 अंक या 0.92% गिरकर 23,833.75 पर आ गया। इंट्राडे में निफ्टी मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 23,800 के स्तर से नीचे चला गया।
इस बीच ब्रेंट क्रूड 1% बढ़कर $95.4 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे पहले के सेशन में यह लगभग छह हफ़्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था,लेकिन बाद में इसमें कुछ गिरावट आई। तेल की कीमतों में बढ़त के कारण एशियाई बाजारों में गिरावट आई और निकट भविष्य में US में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई है। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए उभरते बाजार कम आकर्षक हो जाते हैं। इसी वजह से भारत सहित तमाम एशियाई बाजारों में गिरावट आई है।
US सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। US सेंट्रल कमांड ने X पर एक पोस्ट में कहा,"ये हमले IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों और इस इलाके में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हाल ही में किए गए हमलों की कोशिशों के बाद हुए हैं।"
अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक,इसके बाद ईरान ने कुवैत,जॉर्डन और बहरीन पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। इससे इलाके में तनाव बढ़ गया, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर चली गईं।
HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड देवर्ष वकील का कहना है कि एनर्जी की बढ़ती कीमतें लंबे समय तक बनी रहने वाली महंगाई का डर बढ़ा रही हैं। इससे कर्ज लेने की लागत पर दबाव बढ़ रहा है और ऊंचे वैल्यूएशन वाले शेयरों पर भी असर पड़ रहा है। इन सब वजहों से फेड (Fed) के अगले पॉलिसी फैसले को लेकर स्थिति जटिल हो गई है।
मंगलवार को 10 ईयर US ट्रेजरी नोट्स में तेजी के बाद बड़े बाजारों में सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ गई। 10-ईयर US ट्रेजरी यील्ड 3 बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.7880% के 20 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। US बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर भारतीय इक्विटी पर पड़ेगा क्योंकि जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो डेट मनी नहीं आती,जिससे रुपया कमजोर होता है और विदेशी निवेश पर असर पड़ता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट,वी के विजयकुमार का कहना है कि सबसे बड़ा खतरा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना है। अमेरिका में मैक्रो हालात बॉन्ड यील्ड के और बढ़ने का संकेत दे रहे हैं। अगर 10-साल की यील्ड 5% तक पहुंच जाती है तो इससे ग्लोबल इक्विटी मार्केट में बड़ी गिरावट आ सकती है। इसलिए यह एक ऐसा मैक्रो इंडिकेटर है जिस पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
ऐसे में इन्वेस्टर्स के मन में बड़ा सवाल यह है कि मार्केट के लिए अगला सपोर्ट लेवल क्या होगा?
इस पर बजाज ब्रोकिंग की राय है कि निफ्टी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड अभी भी कमजोर है। इसका अहम सपोर्ट लेवल 23,600-23,800 के आसपास है,जो पहले का बड़ा गैप एरिया और जुलाई 2026 का निचला स्तर है। शॉर्ट-टर्म के नज़रिए से जब तक इंडेक्स पिछले दो हफ्तों के हाई (लगभग 24,380) के ऊपर नहीं जाता,तब तक पॉजिटिव मोमेंटम के फिर से शुरू होने का संकेत नहीं मिलेगा।
एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया की राय है कि तकनीकी तौर पर निफ्टी 24,150 के नीचे कमजोर बना हुआ है। अगर यह 23,950 के स्तर को तोड़ता है तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह 23,800 तक जा सकता है। वहीं,अगर यह लगातार 24,150-24,200 के ऊपर बना रहता है तो बिकवाली का दबाव कम हो जाएगा। बाजार की नियर टर्म चाल मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट में हो रही घटनाओं पर निर्भर करेगी।
SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का कहना है कि आज बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। सेंसेक्स जुलाई के दूसरे पखवाड़े के बाद पहली बार 76,500 के स्तर से नीचे आ गया है। वेस्ट एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है,जिससे बाजार का मूड खराब हुआ है और ट्रेडर्स की रिस्क लेने की इच्छा काफी कम हो गई है। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी दिख रही है। सभी अहम इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड कर रहे हैं और उनमें 1 से 4% तक की गिरावट दर्ज की गई है।
प्रमुख सेक्टर इंडेक्स में निफ्टी एनर्जी सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर है,जबकि निफ्टी ऑटो सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर है।
निफ्टी की बात करें तो 23720-23700 का जोन इंडेक्स के लिए अहम सपोर्ट का काम करेगा,जबकि रेजिस्टेंस 23930-23950 के जोन में है।
अगर इंडेक्स 23700 के स्तर से नीचे जाता है तो अगला सपोर्ट 23570-23550 के जोन में होगा। अगर इंडेक्स 23950 के ऊपर जाता है तो रैली 24100 की ओर बढ़ सकती है।
ऑप्शंस की बात करें तो 23900 और 24000 स्ट्राइक पर काफी कॉल राइटिंग देखी गई है। पुट साइड पर 23700 पर काफी ओपन इंटरेस्ट है। उसके बाद 23600 स्ट्राइक का नंबर है। निफ्टी का एडवांस-डिक्लाइन रेश्यो 6:44 है।
सेंसेक्स के स्तरों की बात करें तो इसके लिए सपोर्ट 75,900 पर है, जबकि रेजिस्टेंस 76,700 पर है।
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