Market Insight: मिडिल-ईस्ट में लड़ाई थमने के संकेत, लॉन्ग टर्म में डिफेंस और कैपिटल मार्केट शेयरों से मिलेगा अच्छा रिटर्न

Market Insight: मार्केटआउटलुक पर चर्चा करते हुए एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट के क्वांट हेड और फंड मैनेजर आलोक अग्रवाल ने कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध के मोर्चे पर दो ही पक्ष लड़ाई रोकने या धीमी करने के मूड में दिख रहे हैं। बाजार ने इसका अनुमान लगा लिया है

अपडेटेड May 06, 2026 पर 2:03 PM
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Market Insight: आलोक अग्रवाल ने आगे कहा कि वे कैपिटल मार्केट और डिफेंस शेयरों को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। भारत बचत पर फोकस करने वालों का देश है। लोगों की बचत का पैसा कैपिटल मार्केट की तरफ ही आएगा

Market Insight : अच्छी शुरुआत के बाद ऊपर से फिसल गया है। ऊपरी स्तरों से निफ्टी करीब 200 प्वाइंट गिरकर 24050 के करीब कारोबार कर रहा है। बैंक निफ्टी भी ऊपर से करीब 800 अंक फिसला। हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप में रौनक कायम है। 1 बजे के आसपास सेंसेक्स 196.65 अंक या 0.26 प्रतिशत गिरकर 76,821.14 पर और निफ्टी 20.65 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 24,012.15 पर दिख रहा था।

सरकारी बैंक और ऑटो शेयरों में सबसे तगड़ी रफ्तार देखने को मिल रही है। दोनों सेक्टर इंडेक्स 1.5 फीसदी से ज्यादा चढ़े हैं। सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया,PNB और इंडियन बैंक दो फीसदी से ज्यादा चढ़े हैं। साथ ही केमिकल और IT में भी खरीदारी दिखी है। वहीं कैपिटल गुड्स में हल्का दबाव है।

बाजार पर एक्सपर्ट की राय


ऐसे में मार्केटआउटलुक पर चर्चा करते हुए एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट (Alchemy Capital Management) के क्वांट हेड और फंड मैनेजर आलोक अग्रवाल ने कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध के मोर्चे पर दो ही पक्ष लड़ाई रोकने या धीमी करने के मूड में दिख रहे हैं। बाजार ने इसका अनुमान लगा लिया है। हालांकि लड़ाई रोकने की कोशिशें अभी तक कामयाब नहीं हुई हैं। लेकिन दोनों पक्षों की लड़ाई रोकने की इच्छा साफ दिख रही है। इसी की वजह से क्रूड जो 120-130 डॉलर की ओर जा रहा था, थोड़ा ठंडा पड़ा है। लड़ाई के लंबें खिंचने और ज्यादा गंभीर होने के खतरे कुछ कम हो गए हैं। यह अनुमान होना कि यह लड़ाई किसी सेटलमेंट की तरफ जा रही है, मार्केट के लिए काफी पॉजिटिव है। अगर ये युद्ध रुक जाए या किसी सेटलमेंट की तरफ चला जाए और क्रूड की कीमतें कम होने लगे तो भारतीय बाजार को बड़ी राहत मिलेगी।

आईटी सेक्टर पर निगेटिव नजरिया

आईटी सेक्टर पर बात करते हुए उन्होनें आगे कहा इस सेक्टर पर उनका व्यू काफी निगेटिव है। इसमें हेड विंड काफी ज्यादा हैं, वहीं, टेल विंड काफी कम हैं। हालांकि कुछ कंपनियां अच्छा कर सकती है। लेकिन एक सेक्टर के रूप में आईटी अच्छा नहीं लग रहा है। IT सेक्टर में हाई ग्रोथ वाले शेयर पर ही फोकस करें।

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ऑटो सेक्टर पर ईंधन की कीमत में बढ़त पड़ेगा असर

ऑटो सेक्टर पर बात करते हुए आलोक अग्रवाल ने कहा कि इस सेक्टर के मार्च तिमाही के नतीजे तो अच्छे रहे हैं। लेकिन ग्लोबल और घरेलू दोनों स्तरों पर इस सेक्टर के लिए काफी चुनौतियां है। अभी तक ईंधन की रिटेल कीमतें बढ़ी नहीं है। लेकिन अब इसमें बढ़त हो सकती है। ईंधन की कीमतें और लागत ऑटो के लिए अहम फैक्टर हैं। ईंधन की कीमतें बढ़ने पर ऑटो डिमांड पर असर पड़ सकता है। लेकिन इस सेक्टर में ट्रैक्टर, एसयूवी और कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं।

कैपिटल मार्केट और डिफेंस शेयरों को लेकर पॉजिटिव नजरिया

इस बातचीत में आलोक अग्रवाल ने आगे कहा कि वे कैपिटल मार्केट और डिफेंस शेयरों को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। भारत बचत पर फोकस करने वालों का देश है। इकोनॉमी में बचत का पैसा कैपिटल मार्केट की तरफ ही आएगा। कोविड के पहले लोग बैंकों में बचत खाता रखते थे। कोविड के बाद बचत खाता का पैसा बाजार में आया है। यह कैपिटल मार्केट के लिए एक बहुत बड़ा पॉजिटिव फैक्टर है।

डिफेंस शेयर पर बात करते हुए आलोक अग्रवाल ने कहा कि पूरी दुनिया में जियोपोलिटिकल रिस्क बढ़ रहा है। अमेरिका ने नाटो देशों पर पर अपनी छतरी हटाने की बात कही है। भारत में भी डिफेंस में स्वदेशीकरण पर फोकस देखने को मिल रहा है। अमेरिकी छतरी हटने से यूरोपियन देश भी अपनी डिफेंस खर्च बढ़ा सकते है। अभी दुनिया की 100 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी का 2.5 हिस्सा डिफेंस पर खर्च होता है। अगर जियोपोलिटिकल खतरे इसी तरह से बने रहे तो यह खर्च अगले कुछ सालों में वर्ल्ड जीडीपी का 5-6 फीसदी भी हो सकता है। ऐसे में डिफेंस सेक्टर के लिए डोमेस्टिक और ग्लोबल दोनों तरह का सपोर्ट है। आगे 10 साल के नजरिए से डिफेंस शेयर काफी अच्छे लग रहे हैं। हालांकि, बीच-बीच में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

 

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