Market outlook : भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी से मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ सकता है खराब असर - भारती एक्सा लाइफ के CIO
Market outlook : PSU शयरों में अच्छी संभावनाओं वाले डिफेंस, PSU बैंक, पावर यूटिलिटी और मेटल जैसे शेयर अच्छे लग रहे हैं। तीसरी तिमाही में छोटी-मझोली कंपनियों ने अर्निंग के मामले में लार्ज-कैप कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। लार्ज-कैप IT कंपनियों का डिविडेंड यील्ड अब आकर्षक हो सकता है
Daily Voice : राहुल भुस्कुटे ने कहा सरकार से जुड़े पॉलिसी रिस्क और डिसइन्वेस्टमेंट से जुड़े स्टॉक ओवरहैंग की वजह से PSU में इन्वेस्ट करने के लिए सोच-समझकर काम करने की ज़रूरत होती है
Market outlook : US ट्रेड डील के बारे में मौजूदा जानकारी को मार्केट ने काफी हद तक पचा लिया है। इन्वेस्टर्स अब इस औपचारिक हस्ताक्षर होनें का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि एक फाइनल डील मार्केट के लिए एक नए ट्रिगर का काम कर सकती है, लेकिन मार्च 2026 की टाइमलाइन के बाद इसमें होने वाली कोई भी देरी बाजार का मूड खराब कर सकती है। यह बातें भारती AXA लाइफ इंश्योरेंस के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर राहुल भुस्कुटे ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं।
उनका मानना है कि वर्तमान स्थितियों में PSU शयरों में अच्छी संभावनाओं वाले डिफेंस,PSU बैंक,पावर यूटिलिटी और मेटल जैसे शेयर अच्छे लग रहे हैं। तीसरी तिमाही में छोटी-मझोली कंपनियों ने अर्निंग के मामले में लार्ज-कैप कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। उनका मानना है कि वैल्यू पर नजर रखने वाले इन्वेस्टर्स के लिए,लार्ज-कैप IT कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला डिविडेंड यील्ड भी आकर्षक दिख रहा है।
क्या आपको लगता है कि Q3 में स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों ने लार्ज कैप कंपनियों के मुकाबले ज़्यादा अच्छे नतीजे पेश किए हैं?
कुल मिलाकर,ऐसा लगता है कि Q3 में स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों ने अर्निंग के मामले में लार्ज-कैप कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, परफॉर्मेंस का यह अंतर काफी हद तक सेक्टर की बनावट पर निर्भर करता है। Q3 में ज़्यादा EPS ग्रोथ वाले सेक्टर जैसे कैपिटल गुड्स, कंस्ट्रक्शन मटीरियल, मेटल और माइनिंग में मिड/स्मॉल कैप स्पेस का ज़्यादा कंसंट्रेशन है।
इसके विपरीत,लार्ज-कैप इंडेक्स प्राइवेट बैंकों और IT की तरफ ज़्यादा झुके हुए हैं,जिनमें हाल ही में औसत से कम ग्रोथ देखी गई है। सभी सेक्टर सेक्टर्स को सामान्य नजरिए से देखने पर सभी मार्केट कैप में अर्निंग्स ग्रोथ एक जैसी लगती है।
क्या आपको लगता है कि मैनेजमेंट की कमेंट्री पढ़ने के बाद Q4 के नंबर Q3 से काफी बेहतर होंगे?
आम तौर पर, कॉर्पोरेट मैनेजमेंट का सेंटिमेंट पिछले समय की तुलना में Q3 में ज़्यादा अच्छा रहा है। यह उम्मीद कई पॉजिटिव फैक्टर्स की वजह से जागी है। GST रिफॉर्म्स का लागू होना, EU के साथ लैंडमार्क ट्रेड डील्स का सफल होना और अच्छे इंटरेस्ट रेट के माहौल से सेंटीमेंट अच्छा हुआ है।
इसके अलावा, यूनियन बजट में 12.2 लाख करोड़ रुपए के मज़बूत कैपेक्स आउटले और बेहतर क्रेडिट ग्रोथ ने लंबे समय के नजरिए से भरोसा बढ़ाया है। स्ट्रेटेजिक इंटरनेशनल बदलाव, खासकर चीन का कुछ प्रोडक्ट्स पर एक्सपोर्ट रिबेट्स को धीरे-धीरे वापस लेना भी भारतीय बिज़नेस के लिए कॉम्पिटिटिव माहौल बेहतर बना रहे हैं।
हालांकि इन स्ट्रक्चरल टेलविंड्स को देखने से लगता है कि Q4 की अर्निंग में कोई बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है। लेकिन ये FY27 के लिए एक मज़बूत बेस बन गया है। आमतौर पर यह माना जा रहा है कि Nifty 50 में FY26 8-9% की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। इसका मतलब है कि Q4 EPS ग्रोथ 5-6% से ज़्यादा होना कोई मुश्किल काम नहीं होना चाहिए।
क्या ग्रोथ की संभावना और AI से होने वाली दिक्कतों को देखते हुए,पोर्टफोलियो में लार्ज-कैप स्टॉक्स के बजाय मिड-कैप IT स्टॉक्स रखना बेहतर है?
ग्रोथ पसंद करने वाले इन्वेस्टर्स के लिए,मिड-कैप IT कंपनियां आम तौर पर लार्ज-कैप कंपनियों के मुकाबले ज़्यादा आकर्षक रही हैं। ऐसा न सिर्फ़ इसलिए है कि उनका बेस छोटा है,बल्कि इसलिए भी है कि वे कुछ खास डोमेन में स्पेशलाइज़ करने और कम समय में डिसीजन लेने की वजह से ज़्यादा फुर्तीली होती हैं और लीन ऑपरेशन चलाती हैं। साथ ही,इनमें से कुछ कंपनियां पहले ही ट्रेडिशनल सर्विस-बेस्ड मॉडल से प्लेटफॉर्म-लेड अप्रोच पर आ गई हैं, जिससे हाल के तिमाहियों में इनमें ज़्यादा मज़बूत और लगातार ग्रोथ हुई है।
इसके अलावा, इन कंपनियों का डील जीतने का मोमेंटम बहुत अच्छा बना हुआ है,जो FY27 में मज़बूत डबल-डिजिट ग्रोथ का संकेत देता है। जबकि उनके लार्ज-कैप काउंटरपार्ट्स के लिए हाई सिंगल-डिजिट ग्रोथ का अनुमान है। हालांकि, वैल्यू पर नजर रखने वाले इन्वेस्टर्स के लिए,लार्ज-कैप IT कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला डिविडेंड यील्ड आकर्षक दिख सकता है।
क्या आपको यहां से सोने और चांदी में ज़बरदस्त तेज़ी संभावना नहीं दिख रही है?
सोने और चांदी में हाल की तेज़ी कई स्ट्रक्चरल वजहों से आई है। सेंट्रल बैंकों की तरफ से हुई भारी खरीदारी,जियोपॉलिटिकल हेजिंग और US में कम रियल रेट जैसे फैक्टर इसमें शामिल हैं। इसके अलावा बढ़ते डी-डॉलराइज़ेशन की कहानी (जो US के ज़्यादा फिस्कल घाटे और फेडरल रिजर्व के कथित "पॉलिटिकलाइज़ेशन" से बढ़ी है) ने इनकी डिमांड को मजबूत किया है।
हालांकि ऐसे टॉप-डाउन ट्रेड कितने समय तक चलेंगे,इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। लेकिन इन लगातार बने टेलविंड से ज़्यादा वोलैटिलिटी रहने की संभावना है। महंगाई से निपटने के तौर पर उनकी अहम भूमिका को देखते हुए,हम एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं (खासकर सोना) के लिए एक स्ट्रेटेजिक एलोकेशन बनाए रखने की सलाह देते हैं।
क्या आपको लगता है कि डिविडेंड और कैपेक्स में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी को देखते हुए PSU स्टॉक्स पर बुलिश नज़रिया रखना बेहतर है?
सरकार से जुड़े पॉलिसी रिस्क और डिसइन्वेस्टमेंट से जुड़े स्टॉक ओवरहैंग की वजह से PSU में इन्वेस्ट करने के लिए सोच-समझकर काम करने की ज़रूरत होती है। हालांकि, हमारा यह भी मानना है कि कुछ मज़बूत और अच्छी तरह से काम करने वाले PSU, सरकार के बड़े सुधारों को पूरा करने का ज़रिया हैं और इसलिए पिछले कुछ समय सेअच्छी वेल्थ जेनरेटर रही हैं। PSU शयरों में अच्छी संभावनाओं वाले डिफेंस, PSU बैंक, पावर यूटिलिटी और मेटल जैसे शेयर अच्छे लग रहे हैं।
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