Market Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी बाजार की चाल, ये 8 बड़े फैक्टर करेंगे तय
Market Outlook: 11 मई से शुरू हो रहा कारोबारी हफ्ता शेयर बाजार के लिए काफी अहम रहने वाला है। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, महंगाई के आंकड़े, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और Q4 नतीजे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की खरीद और बिकवाली बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
Market Outlook: सोमवार 11 मई से शुरू हो रहे कारोबारी के दौरान शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसकी वजह सिर्फ घरेलू फैक्टर्स नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम भी हैं। खासकर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
हालांकि पिछले हफ्ते बाजार ने मजबूती दिखाई थी। बीएसई सेंसेक्स 414.69 अंक यानी 0.53% चढ़ा। एनएसई निफ्टी में 178.6 अंक यानी 0.74% की बढ़त दर्ज की गई। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय बाजार से 14,231 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर इस हफ्ते आने वाले हर बड़े संकेत पर रहेगी।
बाजार पर क्यों रहेगी खास नजर
एनालिस्टों का कहना है कि इस हफ्ते शेयर बाजार भू-राजनीतिक घटनाओं को लेकर काफी संवेदनशील रह सकता है। निवेशकों का फोकस अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर रहेगा। इसके अलावा रुपया-डॉलर की चाल और भारत-अमेरिका के महंगाई आंकड़े भी बाजार की दिशा पर असर डाल सकते हैं।
इन 8 वजहों से प्रभावित हो सकता है शेयर बाजार
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव बाजार की दिशा तय कर सकता है। मध्य पूर्व में हालात बिगड़ने का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।
Brent crude oil और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बाजार के लिए अहम रहेगा। तेल महंगा होने पर भारत की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
रुपया-डॉलर की चाल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। डॉलर मजबूत होने पर विदेशी निवेश और आयात लागत दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की खरीद और बिकवाली बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। इस महीने अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से बड़ी रकम निकाल चुके हैं।
भारत के अप्रैल CPI महंगाई आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। इससे RBI की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।
अमेरिका के अप्रैल CPI और PPI डेटा पर भी वैश्विक बाजार की नजर रहेगी। इन आंकड़ों का असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ सकता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती को लेकर उम्मीदें भी बाजार में हलचल बढ़ा सकती हैं। Fed के रुख का असर दुनियाभर के इक्विटी बाजारों पर पड़ता है।
चौथी तिमाही के नतीजे इस हफ्ते कई शेयरों में बड़ा एक्शन दिखा सकते हैं। खासकर बैंकिंग, टेलीकॉम, पावर और मेटल सेक्टर की कंपनियां फोकस में रहेंगी।
बाजार में रह सकता है तेज उतार-चढ़ाव
Enrich Money के CEO पोंमुडी आर का कहना है कि इस हफ्ते बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रह सकता है। उनके मुताबिक बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक खबरों पर निर्भर करेगी और कच्चा तेल सबसे बड़ा फैक्टर बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं और तनाव कम होता है, तो बाजार में राहत की तेजी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी नजर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस हफ्ते आने वाले महंगाई के आंकड़े भी बाजार के लिए बेहद अहम होंगे। भारत के अप्रैल CPI डेटा से यह संकेत मिल सकता है कि RBI आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपना सकता है।
वहीं अमेरिका के अप्रैल CPI और PPI आंकड़े यह तय करने में अहम होंगे कि US Federal Reserve आगे ब्याज दरों में कटौती करेगा या नहीं। इसका असर बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स और ग्लोबल निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ सकता है।
इन कंपनियों के आएंगे Q4 Results
इस हफ्ते कई बड़ी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Canara Bank, Tata Power Company, Bharti Airtel, DLF, Hindustan Petroleum Corporation Ltd और JSW Steel जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों का असर उनके शेयरों के साथ-साथ पूरे सेक्टोरल मूड पर भी पड़ सकता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
Motilal Oswal Financial Services के सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाओं को लेकर काफी संवेदनशील बने रहेंगे। उनके मुताबिक बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।
उन्होंने कहा कि निवेशकों की नजर भारत के CPI आंकड़ों पर रहेगी क्योंकि इससे RBI की आगे की नीति का संकेत मिलेगा। वहीं US CPI और PPI डेटा यह तय करने में मदद करेंगे कि Fed ब्याज दरों में कटौती करेगा या नहीं।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।