Market Outlook :15 जून को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क मजबूती के साथ बंद हुए। फार्मा और हेल्थकेयर को छोड़कर सभी सेक्टर में आई अच्छी खरीदारी के बीच निफ्टी 50 इंडेक्स 23,800 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 736.38 अंक या 0.97 प्रतिशत बढ़कर 76,264.33 पर और निफ्टी 231 अंक या 0.98 प्रतिशत बढ़कर 23,853.90 पर बंद हुआ। निफ्टी में शामिल शेयरों में श्रीराम फाइनेंस, ट्रेंट, एचडीएफसी लाइफ, आयशर मोटर्स और बजाज फिनसर्व सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे। दूसरी ओर, एनटीपीसी, ओएनजीसी, बजाज ऑटो, आईसीआईसीआई बैंक और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो हेल्थकेयर और फार्मा को छोड़कर सभी प्रमुख इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें लगभग 4 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि ऑटो, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में प्रत्येक में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी में छोटे-मझोले शेयर भी शामिल रहे, जिससे निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में प्रत्येक में 1 प्रतिशत की बढ़त हुई।
LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि गैप-अप शुरुआत के बाद निफ्टी में दिन के दौरान नीचे की ओर कंसोलिडेशन देखने को मिला। यह बड़े गैप के साथ खुलने के बाद बाजार का एक सामान्य व्यवहार है। हालांकि, इंडेक्स बंद होने तक 23,800 के अहम लेवल के ऊपर बना रहा। ऐसे में निकट भविष्य में बाजार का मूड पॉजिटिव रहने की संभावना है। जब तक इंडेक्स 23,800 के ऊपर बना रहता है, तब तक और बढ़त की गुंजाइश है। ऊपरी स्तर पर, निफ्टी आने वाले सेशन में 24,000–24,200 की ओर बढ़ सकता है। दूसरी ओर 23,800 के नीचे जाने पर निकट भविष्य में कंसोलिडेशन का दौर शुरू हो सकता है और ऊपर जाने की रफ्तार सीमित हो सकती है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। जिससे इक्विटी बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने के कारण महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं, जिससे ब्याज दरों के स्थिर रहने की उम्मीद बनी है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2027 के लिए कमाई की बेहतर संभावना दिख रही है। इक्विटी के लिए रिस्क-रिवॉर्ड बेहतर होने के साथ ही निवेशक ऑटो, इंडस्ट्रियल, कैपिटल गुड्स और रियल एस्टेट जैसे ग्रोथ ओरिएंटेड सेक्टर की ओर रुख कर रहे हैं। यह सेक्टर बेहतर होते मैक्रो माहौल का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से बॉन्ड यील्ड और FII आउटफ़्लो में कमी आने और रुपये के मज़बूत होने की भी उम्मीद है, जिससे बाजार में और तेजी आने की उम्मीद है।
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