Market Outlook : बाजार मीडियम टर्म में अपने पिछले हाई को पार करने के लिए तैयार, बैंकिंग और NBFC शेयर करेंगे कमाल
Market Outlook : रूपेन राजगुरु का मानना है कि FCNR-B में आए जबरदस्त निवेश से NBFCs के लिए फ़ंडिंग की लागत कम होने की संभावना है। भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अभी लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस नकदी है,जिससे फ़ंडिंग की लागत में धीरे-धीरे कमी आनी चाहिए। बेहतर लिक्विडिटी से बैंकों की ज्यादा लागत वाले बल्क डिपॉज़िट पर निर्भरता कम होती है
Stock Market View : रूपेन राजगुरु ने कहा कि बाजार में विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, Q1FY27 में 7.8% की मजबूत GDP ग्रोथ, विदेशी मुद्रा का अच्छा भंडार और रुपए में स्थिरता जैसे फैक्टर भविष्य के लिए अच्छे संकेत दे रहे हैं
Market Outlook : अगर मॉनसून कमजोर रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई के उम्मीद से ज्यादा रहने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। US फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले को ध्यान में रखते हुए, RBI अपनी आगामी पॉलिसी मीटिंग में दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि कमजोर मॉनसून और तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं,लेकिन उम्मीद है कि RBI सप्लाई-साइड में दिक्कत से खाने-पीने की चीजों में आने वाली महंगाई को स्थाई नहीं मानेगा। ये बातें जूलियस बेयर इंडिया में इक्विटी इन्वेस्टमेंट और स्ट्रैटेजी के हेड रूपेन राजगुरु ने मनीकंट्रोल के साथ एक इंटरव्यू में कही हैं। यहां हम इस इंटरव्यू का संपादित अंश दे रहे हैं।
BFSI सेक्टर,खासकर प्राइवेट सेक्टर के बैंकों को पर राजगुरु का नजरिया पॉज़िटिव है। उनका मानना है कि यहां रिस्क-रिवॉर्ड आकर्षक बना हुआ है। हाल के क्रेडिट ग्रोथ के ट्रेंड्स अच्छे रहे हैं और सिस्टम में भरपूर लिक्विडिटी होने की वजह से उन्हें उम्मीद है कि लोन ग्रोथ अच्छी बनी रहेगी। उन्हें यह भी उम्मीद है कि कंपनियों की कमाई अच्छी रहेगी। इसके बैंकों और अच्छी स्थिति वाली NBFCs कंपनियों दोनों को फायदा होगा।
FCNR में जबरदस्त निवेश आने के बाद NBFCs को मिलेगा सस्ता फंड
रूपेन राजगुरु का मानना है कि FCNR-B में आए जबरदस्त निवेश से NBFCs के लिए फ़ंडिंग की लागत कम होने की संभावना है। भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अभी लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस नकदी है,जिससे फ़ंडिंग की लागत में धीरे-धीरे कमी आनी चाहिए। बेहतर लिक्विडिटी से बैंकों की ज्यादा लागत वाले बल्क डिपॉज़िट पर निर्भरता कम होती है और इसका असर पहले से ही कम शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट रेट्स में दिखने लगा है।
ब्याज दरों में बदलाव के असर (मॉनेटरी ट्रांसमिशन ) के कुछ शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक ने अलग-अलग अवधि के अपने MCLR में 5-10 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। हालांकि NBFC की फंडिंग लागत पर इसका असर आमतौर पर कुछ समय बाद दिखता है,लेकिन मनी मार्केट की कम दरों और बैंक फंडिंग लागत में कमी से NBFC के लिए फंडिंग मिलना आसान हो सकता है और इससे कुल क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट मिल सकता है। इसलिए,कुल मिलाकर समय के साथ NBFC को सस्ती फंडिंग का फायदा मिलने की संभावना है।
कब बनेंगे भारतीय IT सर्विस सेक्टर में निवेश के मौके?
उन्होंने आगे कहा कि हमें भारतीय IT सर्विस सेक्टर में तब मौका दिखेगा जब वैल्यूएशन सपोर्ट के बजाय ग्रोथ अहम फैक्टर बन जाएगा। हालांकि इस सेक्टर का लॉन्ग टर्म आउटलुक पहले से बेहतर हुआ है। लेकिन कीमतों पर दबाव,AI से प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण रेवेन्यू में बढ़ोतरी की संभावना सीमित नजर आ रही है।
कंपनियों के टेक्नोलॉजी पर होने वाले नए खर्च का एक बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर,क्लाउड और AI प्लेटफॉर्म की ओर जा रहा है,इसलिए शॉर्ट टर्म में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ धीमी रहने की संभावना है। AI से जुड़ी डिमांड जब इन चुनौतियों से पार पा लेगी तब एक ज़्यादा टिकाऊ मौका बनेगा। उम्मीद है कि ऐसा होने में अभी एक-दो साल और लगेंगे। तब तक,मौजूदा IT सर्विस कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशन रेंज नीचे की तरफ 14-15x और ऊपर की तरफ 18-19x के बीच ऊपर-नीचे होती रहेगी।
भारत में जारी रहेगी IPO बाजार की रौनक
रूपेन राजगुरु को उम्मीद है कि भारत में IPO बाजार में तेजी जारी रहेगी। इसकी वजह घरेलू बाजार में अच्छी लिक्विडिटी,IPO लाने वाली कंपनियों की बड़ी संख्या और प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेशकों के लिए लगातार एग्ज़िट के मौके जैसे फैक्टर होंगे। हालांकि,IPO का यह सिलसिला आगे भी जारी रहना मुख्य रूप से सेकेंडरी मार्केट के प्रदर्शन और कंपनियों की कमाई पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर,उम्मीद है कि बाजार ज्यादा समझदारी से काम लेगा और बेहतर ग्रोथ,मुनाफ़े और गवर्नेंस का रिकॉर्ड रखने वाली कंपनियों को तरजीह देगा।
बैंकों और NBFCs पर रखें नजर
राजगुरु ने बताया कि BFSI सेक्टर और खासकर प्राइवेट सेक्टर के बैंकों को लेकर उनका पॉजिटिव नजरिया है। यहां रिस्क-रिवॉर्ड आकर्षक बना हुआ है। हाल के क्रेडिट ग्रोथ के ट्रेंड्स अच्छे रहे हैं और सिस्टम में पर्याप्त नकदी होने के कारण उम्मीद है कि लोन ग्रोथ अच्छी बनी रहेगी। FCNR(B) स्कीम के तहत आए भारी निवेश के चलते सिस्टम की लिक्विडिटी और मज़बूत हुई है जिससे पूरे फाइनेंशियल सेक्टर में फ़ंडिंग की लागत कम होने की उम्मीद है। हालांकि, लोन से होने वाली कमाई (यील्ड) में धीरे-धीरे कमी आने से NIMs पर कुछ दबाव पड़ सकता है,लेकिन फ़ंडिंग की लागत कम होने और लगातार जारी क्रेडिट ग्रोथ से इस असर को कम करने में मदद मिलनी चाहिए। कुल मिलाकर,उम्मीद है कि कंपनियों की अर्निंग अच्छी बनी रहेगी,जिससे बैंकों और अच्छी स्थिति वाली NBFCs दोनों को फायदा होगा।
लंबे समय के नजरिए से स्टॉक एक्सचेंज स्टॉक्स नजर आ रहे अच्छे
स्टॉक एक्सचेंज स्टॉक्स पर बात करते हुए रूपेन राजगुरु ने आगे कहा कि अमेरिका और चीन की तुलना में भारत में इक्विटी कल्चर अभी भी काफी कम है। हालांकि देश में बचत के फाइनेंशियलाइज़ेशन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में लंबे समय के नज़रिए से स्टॉक एक्सचेंज स्टॉक्स एक अच्छी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी साबित हो सकते हैं। हालांकि,रेगुलेशन और अभी की बाजार स्थितियों को देखते हुए लगता है कि शॉर्ट टर्म में इनकी कमाई में उतार-चढ़ाव (साइक्लिकल बदलाव) देखने को मिल सकता है।
बाजार मीडियम टर्म में अपने पिछले हाई को पार करने के लिए तैयार
उन्होंने आगे कहा कि बाजार के रिकॉर्ड ऊंचाई पर वापसी का सही समय बताना मुश्किल है, लेकिन मार्केट में टिकाऊ रिकवरी के लिए जरूरी बेस तेजी से तैयार हो रहा है। घरेलू फंडामेंटल्स मजबूत हो रहे हैं। क्रेडिट ग्रोथ,ऑटो सेल्स और बिजली की मांग के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। साथ कंपनियों की कमाई में सुधार के संकेत भी मिल रहे हैं।
बाजार में विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, Q1FY27 में 7.8% की मजबूत GDP ग्रोथ, विदेशी मुद्रा का अच्छा भंडार और रुपए में स्थिरता जैसे फैक्टर भविष्य के लिए अच्छे संकेत दे रहे हैं। FY2028 में निफ़्टी की अर्निंग लगभग 17 गुना के फेयर वैल्यूएशन पर रह सकती है। ये सब भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए शुभ संकेत है। इसको देखते हुए लगता है कि मीडियम टर्म में बाजार अपने पिछले हाई को फिर से छू सकता है और उससे आगे भी निकल सकता है।
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