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Market Outlook : बाजार मीडियम टर्म में अपने पिछले हाई को पार करने के लिए तैयार, बैंकिंग और NBFC शेयर करेंगे कमाल

Market Outlook : रूपेन राजगुरु का मानना ​​है कि FCNR-B में आए जबरदस्त निवेश से NBFCs के लिए फ़ंडिंग की लागत कम होने की संभावना है। भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अभी लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस नकदी है,जिससे फ़ंडिंग की लागत में धीरे-धीरे कमी आनी चाहिए। बेहतर लिक्विडिटी से बैंकों की ज्यादा लागत वाले बल्क डिपॉज़िट पर निर्भरता कम होती है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Sep 14, 2026 पर 12:40 PM
Market Outlook : बाजार मीडियम टर्म में अपने पिछले हाई को पार करने के लिए तैयार, बैंकिंग और NBFC शेयर करेंगे कमाल
Stock Market View : रूपेन राजगुरु ने कहा कि बाजार में विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, Q1FY27 में 7.8% की मजबूत GDP ग्रोथ, विदेशी मुद्रा का अच्छा भंडार और रुपए में स्थिरता जैसे फैक्टर भविष्य के लिए अच्छे संकेत दे रहे हैं

Market Outlook : अगर मॉनसून कमजोर रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई के उम्मीद से ज्यादा रहने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। US फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले को ध्यान में रखते हुए, RBI अपनी आगामी पॉलिसी मीटिंग में दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि कमजोर मॉनसून और तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं,लेकिन उम्मीद है कि RBI सप्लाई-साइड में दिक्कत से खाने-पीने की चीजों में आने वाली महंगाई को स्थाई नहीं मानेगा। ये बातें जूलियस बेयर इंडिया में इक्विटी इन्वेस्टमेंट और स्ट्रैटेजी के हेड रूपेन राजगुरु ने मनीकंट्रोल के साथ एक इंटरव्यू में कही हैं। यहां हम इस इंटरव्यू का संपादित अंश दे रहे हैं।

BFSI सेक्टर,खासकर प्राइवेट सेक्टर के बैंकों को पर राजगुरु का नजरिया पॉज़िटिव है। उनका मानना है कि यहां रिस्क-रिवॉर्ड आकर्षक बना हुआ है। हाल के क्रेडिट ग्रोथ के ट्रेंड्स अच्छे रहे हैं और सिस्टम में भरपूर लिक्विडिटी होने की वजह से उन्हें उम्मीद है कि लोन ग्रोथ अच्छी बनी रहेगी। उन्हें यह भी उम्मीद है कि कंपनियों की कमाई अच्छी रहेगी। इसके बैंकों और अच्छी स्थिति वाली NBFCs कंपनियों दोनों को फायदा होगा।

FCNR में जबरदस्त निवेश आने के बाद NBFCs को मिलेगा सस्ता फंड

रूपेन राजगुरु का मानना ​​है कि FCNR-B में आए जबरदस्त निवेश से NBFCs के लिए फ़ंडिंग की लागत कम होने की संभावना है। भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अभी लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस नकदी है,जिससे फ़ंडिंग की लागत में धीरे-धीरे कमी आनी चाहिए। बेहतर लिक्विडिटी से बैंकों की ज्यादा लागत वाले बल्क डिपॉज़िट पर निर्भरता कम होती है और इसका असर पहले से ही कम शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट रेट्स में दिखने लगा है।

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