बड़ौदा बीएनपी पारिबा म्यूचुअल फंड के जितेन्द्र श्रीराम का कहना है कि एनर्जी ऐसे सेक्टर तथा पिछले दो सालों से दबाव में बने हुए बीएफएसआई और आईटी जैसे सेक्टर 2025 में तुलनात्मक रुपए से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। मनीकंट्रोल को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिकी डिस्क्रीशनरी खर्च में कुछ बढ़त और कमजोर रुपये के कारण आईटी सेक्टर को फायदा हो सकता है,जबकि निजी बैंकों का वैल्यूएशन में टाइम करेक्शन के बाद मार्जिन पर इनका रिस्क रिवॉर्ड अनुकूल हो गया है।
जितेन्द्र श्रीराम का कहना है कि शॉर्ट टर्म में निफ्टी की दिशा तय करने में अमेरिका में नए राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण अहम भूमिका निभाएगा। उनका ये भी कहना है कि 2024 के चुनाव के बाद के अंतिम बजट और फरवरी 2025 के लिए निर्धारित बजट के बीच कम समय अंतराल को देखते हुए बजट बहुत बड़ा असर छोड़ने वाला नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पॉलिसी फोकस वाले सेक्टरों के बारे में बाजार को पहले से पता है।
क्या आपको 2025 में सरकारी कैपेक्स में अच्छी बढ़त की उम्मीद है? इसके जवाब में जितेन्द्र श्रीराम ने कहा कि अगर हम नवंबर 2024 तक के आंकड़ों पर नज़र डालें तो नवंबर महीने में केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च 21 फीसदी बढ़ा है।2024-25 की पहली छमाही की सुस्ती के बाद खर्च में निश्चित रूप से उछाल आया है। चुनावी आचार संहिता जैसे कारणों की वजह से साल के पहले 8 महीनों (अप्रैल-नवंबर 2024) में सरकारी कैपेक्स में 12 फीसदी की गिरावट आई है। हमें पोस्ट लाइफ इंश्योरेंस स्कीमों और रक्षा अधिग्रहण जैसी गतिविधियों में हाल के दिनों में तेजी आती दिखी है।
हालांकि, यह संभव है कि बाकी महीनों में मांग की उच्च दर को देखते हुए सरकारी पूरे वर्ष के लक्ष्य से थोड़ा कम रहे। बाकी बचे 4 महीनों के पूंजीगत व्यय को वित्त वर्ष 2025 के लिए तय किए गए 11 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य के बराबर लाने के लिए लगभग 65 फीसदी बढ़ाने की जरूत है। ऐसे में लक्ष्य हासिल होना मुश्किल लग रहा है।
2025 में किन सेक्टरों के स्टार परफॉर्मर रहने की उम्मीद है? इस पर जितेन्द्र श्रीराम का कहना है कि एनर्जी और पिछले 2 सालों में पिछड़े रह गए सेक्टर जैसे कि BFSI और IT 2025 में तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कमजोर रिफाइनिंग मार्जिन और फ्यूल अंडर-रिकवरी के कारण हाल के दिनों में डाउनस्ट्रीम तेल कंपनियों का प्रदर्शन तुलनात्मक रुप से खराब रहा है। आगे चलकर इनमें सुधार आने की उम्मीद। अमेरिका में डिस्क्रीशनरी खर्च में कुछ बढ़त और कमजोर रूपए के कारण IT में तेजी आ सकती है। एक टाइम करेक्शन बाद निजी बैंकों के वैल्यूएशन और रिस्क रिवॉर्ड रेशियो अच्छे लग रहे हैं।
अमेरिका में नए राष्ट्रपति के पदभार ग्रहण पर नजर रहेगी। नए राष्ट्रपति ने टैरिफ,अमेरिका के भीतर मैन्युफैक्चिरिंग को प्रोत्साहित करने और कम जटिल टेक्नोलॉजी वाली नौकरियों पर प्रतिबंधों लगाने से संबंधित कुछ राय व्यक्त की है। बाजारों की नजर इस बात पर रहेगी कि इनको किस स्तर तक लागू किया जाता है। विशेष रूप से ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी पर कड़ी नज़र रहेगी। अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती। ऐसे में दरों में कटौती की गति धीमी पड़ सकती है।
अच्छी बात ये है कि मेकिंग अमेरिका ग्रेट अगेन का अर्थ होगा कि अमेरिका को मैन्यूफैक्चरिंग में बढ़त हासिल करने की जरूरत होगी। इस कोशिश में अमेरिकी डॉलर की वर्तमान मजबूती कायम नहीं रह पाएगी है। ऐसे में अमेरिकी डॉलर में आने वाली किसी भी कमजोरी से इमर्जिंग मार्केट में डॉलर का फ्लो बढ़ेगा जिसका भारत जैसे देशों को फायदा होगा।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।