Market Outlook : कमजोर नोट पर बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 9 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल
Market Outlook : बाजार में शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव ज़्यादा बना रह सकता है। लेकिन अर्निंग फंडामेंटल्स, मीडियम टर्म बाजार के नज़रिए के लिए अहम फैक्टर बने हुए हैं। जिन सेक्टर में मांग मज़बूत है,बैलेंस शीट अच्छी है और अर्निंग की संभावना मजबूत है,वे मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितता के दौर से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में हो सकते हैं
Market Outlook : भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर रहना एक अहम मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर है,क्योंकि देश अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है
Market Outlook : 8 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स निफ्टी के 22,250 से नीचे आने के साथ कमजोर नोट पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत नीचे 71,593.24 पर और निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत नीचे 22,231.80 पर बंद हुआ। । लगभग 951 शेयर बढ़े, 3280 शेयर गिरे और 180 शेयर अपरिवर्तित रहे। निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में अडानी एंटरप्राइजेज, जेएसडब्ल्यू स्टील, मैक्स हेल्थकेयर, आईटीसी और इंटरग्लोब एविएशन शामिल रहे। जबकि बढ़त में रहने वाले शेयरों में इंफोसिस, एक्सिस बैंक और एचसीएल टेक शामिल रहे।
ऑटो, एनर्जी, एफएमसीजी, इंफ्रा, मीडिया, मेटल, ऑयल एंड गैस, फार्मा और रियल्टी में 2-3% की गिरावट के साथ सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल रंग में बंद हुए। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।
डॉ चोकसी फिनसर्व के MD देवेन चोकसी ने कहा कि अगर निफ्टी में तेज गिरावट आती है तो इसे 21,800 के आसपास अच्छा सपोर्ट मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ज़्यादा वैल्यू वाले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगातार प्रॉफिट बुकिंग हो रही है,जबकि पैसा कम वैल्यू वाले फ्रंटलाइन शेयरों की ओर जा रहा है। चोकसी ने आगे कहा कि खरीदारी का रुझान बना हुआ है,लेकिन यह चुनिंदा शेयरों और धीरे-धीरे हो रहा है,जबकि डेरिवेटिव मार्केट में एक्टिविटी अभी भी काफी ज़्यादा है।
SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का कहना है कि गुरुवार को बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी में भाी बिकवाली देखी गई और डेली चार्ट पर एक बड़ी 'बेयरिश कैंडल' बनी। सबसे अहम बात यह है कि इंडेक्स ने अप्रैल 2025 के बाद से अपनी सबसे निचली डेली क्लोजिंग दर्ज की। ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतों और USD/INR पेयर में लगातार कमजोरी ने मार्केट के सेंटीमेंट पर दबाव डाला।
टेक्निकल नजरिए से देखें तो ट्रेंड अभी भी पूरी तरह से 'बेयरिश' बना हुआ है और इंडेक्स सभी अहम 'मूविंग एवरेज' के नीचे ट्रेड कर रहा है। मोमेंटम इंडिकेटर भी कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। जबकि RSI रेंज शिफ्ट फ्रेमवर्क के अनुसार डेली RSI 'सुपर बेयरिश ज़ोन' में बना हुआ है। इसलिए,इंडेक्स पर दबाव बने रहने और निकट भविष्य में इसके नीचे की ओर जाने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
आगे 22,350-22,400 का जोन निफ्टी के लिए एक तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। जब तक निफ्टी 22,400 के स्तर से नीचे रहता है,तब तक मौजूदा बेयरिश ट्रेंड के जारी रहने की उम्मीद है। शॉर्ट टर्म में निफ्टी की गिरावट 22,100 के स्तर तक बढ़ सकती है और अगला अहम सपोर्ट 21,950 के आसपास है। तत्काल गिरावट के दबाव को कम करने और शॉर्ट-टर्म आउटलुक को बेहतर बनाने के लिए लगातार 22,400 के स्तर से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।
Stoxkart में डायरेक्टर और CEO प्रणय अग्रवाल का कहना है कि घरेलू इक्विटी मार्केट में आई भारी गिरावट ग्लोबल और घरेलू मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताओं का मिला-जुला असर है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,विदेशी संस्थागत निवेशकों की तरफ से हो रही लगातार बिकवाली, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और निवेशकों की सतर्क सोच इक्विटी पर शॉर्ट टर्म दबाव डाल रही है। बाजार की चाल कच्चे तेल की कीमतों,ग्लोबल ब्याज दरों की दिशा और विदेशी निवेश में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगी।
मॉनेटरी पॉलिसी के नज़रिए से देखें तो RBI का नपा-तुला रुख और ऊंची ब्याज दरों का माहौल लिक्विडिटी की स्थिति और इक्विटी वैल्यूएशन पर असर डाल सकते हैं। इनका उन सेक्टरों पर ज्यादा असर होगा जो ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील हैं। लंबे समय तक ऊंची उधारी लागत का असर कॉर्पोरेट फाइनेंसिंग की स्थिति और अर्निंग आउटलुक पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर रहना एक अहम मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर है,क्योंकि देश अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। लंबे समय तक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई और इनपुट लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं। साथ ही क्रूड के प्रति संवेदनशील सेक्टरों के मार्जिन पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि,इसका असर अलग-अलग सेक्टर पर उनकी लागत संरचना,कीमत तय करने की क्षमता और ऊर्जा की कीमतों के प्रति उनके एक्सपोज़र के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
बाजार में शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव ज़्यादा बना रह सकता है। लेकिन अर्निंग फंडामेंटल्स, मीडियम टर्म बाजार के नज़रिए के लिए अहम फैक्टर बने हुए हैं। जिन सेक्टर में मांग मज़बूत है,बैलेंस शीट अच्छी है और अर्निंग की संभावना मजबूत है,वे मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितता के दौर से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में हो सकते हैं। निवेशकों को बाज़ार की शॉर्ट-टर्म चाल को अलग से देखने के बजाय अपने व्यक्तिगत रिस्क प्रोफाइल और निवेश के लक्ष्यों के आधार पर इन फैक्टरों का आकलन करना चाहिए।
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