इक्विटी बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स शुक्रवार, 8 अगस्त को हल्के लाल निशान में खुले हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना करके 50 प्रतिशत करने के फैसले से तेजड़ियों पर दबाव पड़ सकता है। पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी और सेंसेक्स ने कारोबार के आखिरी घंटे में शानदार वापसी की, जिससे दिन भर की भारी गिरावट की भरपाई हो गई। अमेरिका और रूस के बीच बातचीत की संभावनाओं से बाजार में मामूली बढ़त देखने को मिली। इससे पहले, सत्र की शुरुआत में, बाजार में भारी गिरावट आई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी जिससे कुल टैरिफ दर 50 प्रतिशत हो गई है।
ट्रंप का यह कदम नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल और डिफेंस प्रोडक्ट्स की निरंतर खरीद के जवाब में आया है। इस आदेश के बाद, कुछ छूट प्राप्त वस्तुओं को छोड़कर,भारतीय वस्तुओं पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो जाएगा।
आज इन अहम स्तरों पर रहे नजर
कल के इंट्राडे पुलबैक और मजबूत क्लोजिंग से आगामी सत्रों में शॉर्ट टर्म मोमेंटम बिल्डिंग के संकेत मिलते हैं। टैरिफ़ लगाने की चिंताओं ने पूरे बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित नहीं किया। 24,500 का स्तर एक अहम सपोर्ट के रूप में बना हुआ है, जो खरीदारों के बीच मजबूती की भावना का संकेत है।
निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,450 पर है, जो इसका डिमांड जोन भी है। जब तक यह लेवल निर्णायक रूप से टूट न जाए,कोई भी गिरावट नए सिरे से खरीदारी को प्रेरित कर सकता है। डेली चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 40 के आसपास मंडरा रहा है, लेकिन अब इसमें पॉजिटिव डाइवर्जेंस दिखाई देने लगा है, जो मंदी की गति में कमी आने का संकेत है। इंट्राडे इंडीकेटर भी ओवरसोल्ड जोन से वापसी का संकेत दे रहे हैं।
सैमको सिक्योरिटीज के डेरिवेटिव्स रिसर्च एनालिस्ट धुपेश धमेजा ने कहा निफ्टी का ओवरऑल स्ट्रक्चर ओवरसोल्ड बना हुआ है, जो यह संकेत देता है कि किसी भी तरह की गिरावट से नए लॉन्ग पोजीशन शुरू करने के अवसर मिल सकते हैं, क्योंकि बाजार में तेजी की उम्मीदें धीरे-धीरे फिर से वापसी करती दिख रही हैं।
वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX 2.28 फीसदी की गिरावट के साथ 11.68 पर बंद हुआ। ग्लोबल टैरिफ-संबंधी घटनाओं के बावजूद बाजार में वोलैटिलटी कम है। वोलैटिलिटी इंडेक्स न्यूट्रल लेवल के आसपास बना हुआ है। इंडिया VIX में लगातार बनी नरमी इस बात का संकेत है कि ब्रॉडर मार्केट किसी तेज गिरावट के जोखिम के बजाय कंसोलीडेशन की उम्मीद कर रहा है। यह इस बात का संकेत है कि बाजार में कोई घबराहट नहीं है। हालांकि, सावधानी बरती जा रही है।
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