Market Trend: 2 नवंबर को बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 23,300 के स्तर से काफी ऊपर कारोबार कर रहा है। ईरान युद्ध को खत्म करने की बातचीत के चलते तेल की कीमतें छह महीने के उच्चतम स्तर से नीचे आ गई हैं। वहीं,रिलायंस इंडस्ट्रीज के सितंबर तिमाही के मुनाफे उम्मीद से बेहतर रहे, जिसके बाद कंपनी के शेयरों में लगभग 8% की तेजी आई। 2 नवंबर 12 बजे के आसपास निफ्टी 1.2% की बढ़त के साथ 23,336 के आसपास कारोबार कर रहा था।
निफ्टी के लिए कहां है अगला रेजिस्टेंस ?
एक्सिस डायरेक्ट के डेरिवेटिव्स और टेक्निकल रिसर्च विभाग के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट, हेमांग गोर का कहना है कि तकनीकी रूप से निफ्टी का रुझान सतर्कता के साथ पॉडिटिव है। 23,300 के रेजिस्टेंस को पार करने पर 23,500 का टारगेट बनता है। 23,000 का स्तर एक अहम पिवट (मोड़) है। 22,800 का सपोर्ट कायम रहने तक निफ्टी में तेजी कामय रहेगी। अगर यह स्तर टूटता है तो निफ्टी 22,500 तक जा सकता है।
कोटक नियो के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का कहना है कि ऊपर की तरफ 23,175/74,800 का स्तर बुल्स के लिए तत्काल रेजिस्टेंस जोन होगा। अगर इंडेक्स इस जोन के ऊपर ब्रेकआउट देते हैं, तो वे 23,350/75,200 के स्तर तक जा सकते हैं। इसके बाद, यह रैली 23,500/75,500 के स्तर तक भी बढ़ सकती है। दूसरी ओर,अगर इंडेक्स 20-दिन के SMA (जो निफ्टी के लिए 22,600 और सेंसेक्स के लिए 73,400 के आसपास है) के नीचे गिरते हैं तो मौजूदा अपट्रेंड कमजोर पड़ सकता है। इन स्तरों के नीचे जाने पर, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स अपनी लॉन्ग पोजीशन से बाहर निकलने पर विचार कर सकते हैं।
चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर का कहना है कि ऊपर की तरफ 23,200 पर तत्काल रेजिस्टेंस है,जो कई डेली मूविंग एवरेज के एक समूह के साथ मेल खाता है। अगर यह स्तर टूटता है तो निफ्टी 23,700–24,000 तक जा सकता है, जहाँ 100-वीक EMA और 200-डे EMA मौजूद हैं। नीचे की तरफ, 22,850 पर तत्काल सपोर्ट है और इसके बाद 22,600–22,400 का अहम सपोर्ट है, जिसे 200-वीक EMA और एक बढ़ती हुई ट्रेंडलाइन का सपोर्ट मिल रहा है। ट्रेडर्स इन अहम स्तरों पर नजर रखते हुए 'बाय-ऑन-डिप्स' (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति अपना सकते हैं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार का कहना है कि भारतीय बाजार में सुधार के साफ संकेत मिल रहे हैं। इसे बाहरी और घरेलू दोनों तरह के पॉजिटिव फैक्टर्स का योगदान मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई कमी एक राहत की बात है। पिछले हफ्ते ये 118 डॉलर के उच्च स्तर पर थीं,जो अब घटकर 110 डॉलर पर आ गई हैं। इसके साथ ही,अमेरिकी 10-ईयर बॉन्ड यील्ड का 4.93% तक गिरना भी काफी अच्छी बात है। लेकिन, शायद इन बाहरी सकारात्मक कारकों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है 'AI ट्रेड' का तेजी से कमजोर पड़ना,जिसकी वजह से पिछले शुक्रवार को नैस्डैक (Nasdaq) में 2.8% की गिरावट आई। AI ट्रेड में यह कमजोरी भारत के लिए फायदेमंद है,जिसे अक्सर 'काउंटर AI प्ले'के रूप में देखा जाता है।
घरेलू स्तर के बुनियादी संकेत भी तेजी के पक्ष में हैं। अर्थव्यवस्था में 17.94% की क्रेडिट ग्रोथ और अक्टूबर में GST का मजबूत कलेक्शन एक मजबूतअर्थव्यवस्था के संकेत हैं,जो अब रफ्तार पकड़ रही है। एक बड़ा पॉजिटिव फैक्टर जो बाजार को और ऊपर ले जा सकता है,वह है आगामी बजट में LTCG टैक्स में बड़े बदलाव होने की संभावना। संभवतः यह पूरी तरह से खत्म भी हो सकता है। ऐसा लगता है कि बाजार ने इसे पहले ही मान लिया है (यानी इसके असर को पचा लिया है । संक्षेप में कहें तो फिलहाल स्थिति 'बुल' (तेजी लाने वालों) के पक्ष में है।
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