Market view : रुपये के स्थिर होने तक जारी रहेगी FIIs की बिकवाली, स्थितियां सुधरने पर जोर से भागेंगे क्वालिटी छोटे-मझोले शेयर
Market view : अक्षय चिंचालकर ने कहा कि जब तक इंडेक्स को तुरंत फॉलो-थ्रू के साथ कोई बुलिश कैंडलस्टिक नहीं मिल जाती,तब तक बाजार का रुझान मंदी का ही रहेगा। ऐसे में अप्रैल 2025 के निचले स्तर के टेस्ट होने की बहुत ज़्यादा संभावना है
Market cues : जब तक रुपया स्थिर नहीं हो जाता तब तक विदेशी निवेशक पैसा लगाने की जल्दबाजी नहीं करेंगे
Stock Market view : पिछले दो दशकों के डेटा के आधार पर देखें तो औसतन निफ्टी में मार्च के आखिर या अप्रैल की शुरुआत में सबसे निचले स्तर (बॉटम) पर पहुंचने का रुझान देखने को मिलता है। क्या इस बार युद्ध की वजह से स्थिति अलग होगी,यह जल्द ही पता चल जाएगा। ये बातें द वेल्थ कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर और मार्केट स्ट्रेटेजी के हेड अक्षय चिंचालकर ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं।
उनके मुताबिक,उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर निफ्टी 'ओवरसोल्ड' जोन में तो है,लेकिन इसके बावजूज'कैपिटुलेशन'(पूरी तरह से हार मान लेने) या 'पैनिक' (घबराहट) वाले जोन में नहीं है। जब तक इंडेक्स में कोई 'बुलिश कैंडलस्टिक'(तेजी का संकेत देने वाली कैंडल) नहीं बनती और उसके तुरंत बाद आई तेजी टिकाऊ नहीं रहती, तब तक बाजार की रुझान मंदी की ओर ही रहेगा। ऐसे में इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि निफ्टी अप्रैल 2025 के निचले स्तर को फिर से छू ले।
Nifty आखिरकार अपने ट्रेंडलाइन सपोर्ट के पास पहुंच गया है। क्या आपको लगता है कि यह इंडेक्स जल्द ही कभी भी अप्रैल 2025 के अपने निचले स्तर को तोड़ देगा?
सोमवार को,निफ्टी जून 2024 के निचले स्तरों से खींची गई ट्रेंडलाइन तक गिर गया। अब यहां से जो एक्शन होगा,उससे ही हमें पता चलेगा कि यह ट्रेंडलाइन तकनीकी रूप से सही है या नहीं। ऐसा तब होगा,जब हमें सोमवार के निचले स्तरों के आस-पास के जोन में किसी तरह का बुलिश प्राइस रिएक्शन देखने को मिलेगा। 21,850 - 22,040 के ज़ोन में फिबोनाची सपोर्ट्स का एक बंच मौजूद है। इसलिए,अगर बुल्स इस ज़ोन को बचाने में कामयाब होते हैं और हमें पिछले दिन के हाई से ऊपर क्लोजिंग देते हैं,तो यह पहला संकेत होगा कि कम से कम एक बाउंसबैक तो आने वाला है।
अगर हम शॉर्ट-टर्म मोमेंटम (14-दिन का RSI) को देखें,तो हमें 'डबल-पॉजिटिव डाइवर्जेंस' देखने को मिल रहा है। इसका मतलब है कि गिरावट का दौर अब अपने अंतिम चरण में है। कोविड-क्रैश के बाद से,वीकली रीडिंग इतनी ज़्यादा 'ओवरसोल्ड'(oversold) कभी नहीं रही है। यह इस बात का एक और सबूत है कि गिरावट का यह दौर अब कुछ ज़्यादा ही लंबा खिंच गया है। यह कोई स्पष्ट संकेत तो नहीं है,बल्कि यह एक अलग तरह की स्थिति (condition) को दिखाता है।
इसके बाद 40 महीने का मूविंग एवरेज भी अहम है,जिसकी सोमवार की गिरावट के साथ टेस्टिंग हुई। 2009 के निचले स्तरों के बाद से,इस एवरेज तक आई सभी गिरावटों को सपोर्ट मिला है। इसका एकमात्र अपवाद कोविड काल ही था।
आइए अब मार्केट ब्रेथ की बात करें। वास्तव में बाजार के लिए असली चुनौती यहीं है। अगर हम Nifty में उन शेयरों का प्रतिशत देखें जो 50DMA,100DMA और 200DMA से ऊपर हैं तो ये आंकड़े अभी तक "कैपिटुलेशन"(पूरी तरह से हार मान लेने वाली) स्थिति तक नहीं पहुंचे हैं। ये ओवरसोल्ड तो हैं,लेकिन क्या वे नीचे की तरफ बहुत ज़्यादा खिसके हुए नहीं है।
ऐसे में कुल मिलाकर कहें तो निफ्टी 'ओवरसोल्ड'(अत्यधिक बिकवाली वाले)दायरे में है। लेकिन क्या यह 'कैपिटुलेशन'(पूरी तरह से हार मान लेने) या 'पैनिक' (घबराहट) वाले दायरे में नहीं है। जब तक इंडेक्स में कोई 'बुलिश कैंडलस्टिक'(तेजी का संकेत देने वाली कैंडल) नहीं बनती और उसके तुरंत बाद आई तेजी टिकाऊ नहीं रहती, तब तक बाजार की रुझान मंदी की ओर ही रहेगा। ऐसे में इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि निफ्टी अप्रैल 2025 के निचले स्तर को फिर से छू ले।
अप्रैल सीरीज़ के लिएअहम स्तर कौन से हैं और इस सीरीज़ के लिए आपकी रणनीति क्या होगी?
पिछले दो हफ़्ते काफ़ी दिलचस्प रहे हैं। दोनों हफ़्ते की कैंडल्स 'डोजी'थीं और उनकी ऊपरी शैडो (upper shadows) लंबी थीं। इसका मतलब है कि भू-राजनीतिक स्थिति के बिगड़ने की आशंका में बेचने वालों ने 23,500-23,900 के दायरे में बिकवाली की। इसी वजह से यह हफ़्ता बेहद अहम हो जाता है। अगर इस हफ़्ते दायरा (range)काफ़ी छोटा रहता है,तो यह इस बात का पहला संकेत होगा कि बिकवाली का दबाव अब कम हो रहा है। इसलिए हमें इस हफ़्ते के दायरे पर बारीकी से नज़र रखने की जरूरत है।
अब, India VIX की बात करें तो पिछले हफ़्ते,यह लगातार चौथे हफ़्ते ऊपर रहा। पिछले दस सालों के डेटा से पता चलता है कि ऐतिहासिक रूप से,ऐसी लगातार बढ़त के एक महीने बाद Nifty में पॉज़िटिव रिटर्न देखने को मिलता है। लगभग 70% ऐसे मामलों में बाजार में बढ़त हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि VIX में लगातार बढ़ोतरी डर के चरम पर पहुंचने का संकेत हो सकती है,जिसके बाद बाज़ार में स्थिरता आती है या वह फिर से संभल जाता है। लेकिन खास स्थितियों में कुछ भी हो सकता है।
अब बात करते हैं निफ्टी की जिसमें शुक्रवार तक लगातार पांच हफ़्तों तक गिरावट देखने को मिली। पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो इस तरह की लगातार गिरावट के बाद अक्सर बाज़ार में तेज़ी देखने को मिलती है। दो-तिहाई मामलों में हमें एक महीने बाद पॉज़िटिव रिटर्न मिले हैं। 2.7 फीसदी का एवरेज गेन यह बताता है कि लगातार बिकवाली के दबाव के कारण अक्सर 'ओवरसोल्ड'(अत्यधिक बिकवाली वाली) स्थितियां बन जाती हैं,जिसके बाद बाज़ार में फिर से उछाल आता है। लेकिन,सबसे बड़ा उछाल तब देखने को मिला है,जब ग्लोबल माहौल भी काफ़ी हद तक बाज़ार के लिए अनुकूल रहा हो।
हम एक ऐसे समय में भी कदम रख रहे हैं जो मौसमी तौर पर सहायक होता है। पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही में Nifty में आमतौर पर गिरावट देखने को मिली है। इसलिए इस साल अब तक हुई गिरावट बिल्कुल भी हैरानी की बात नहीं है। पिछले दो दशकों के डेटा के आधार पर देखें तो औसतन निफ्टी में मार्च के आखिर या अप्रैल की शुरुआत में सबसे निचले स्तर (बॉटम) पर पहुंचने का रुझान देखने को मिलता है। क्या इस बार युद्ध की वजह से स्थिति अलग होगी,यह जल्द ही पता चल जाएगा।
क्या आपको लगता है कि Bank Nifty मार्च 2025 के अपने निचले स्तर 47,700 की ओर गिरावट जारी रखेगा?
बैंकिंग इंडेक्स की बात करें तो यह 100-हफ़्ते के मूविंग एवरेज से नीचे गिर गया है,जिसने पिछले एक दशक में अच्छा सपोर्ट दिया है। इसलिए अब 200-हफ़्ते का एवरेज फोकस में आ गया है। यह अभी 48,300 के आसपास है। इसके बाद अप्रैल के निचले स्तर 47,700 पर हैं। ऐसे में यहां से यह ज़ोन बहुत अहम है।
पिछले हफ़्ते भी बैंक निफ्टी में लगातार पांचवें हफ़्ते नीचे रहे। पिछले आंकड़ों से पता चलता है कि इस इंडेक्स ने Nifty की तुलना में और भी ज़्यादा साफ कॉन्ट्रेरियन (बहती धारा के विपरीत)संकेत दिए हैं। 4.1% के औसत रिटर्न (Nifty के 2.7% के मुकाबले) और 79% की सफलता दर (Nifty के 67% के मुकाबले) के साथ,बैंकिंग सेक्टर में 5 हफ़्ते की गिरावट के बाद आम तौर पर मज़बूत रिकवरी देखने को मिली है।
FII की पोजीशनिंग से क्या संकेत हैं?
शुक्रवार तक विदेशी निवेशकों ने लगातार 20 सत्रों में पैसे निकाले। इसका असर रुपये पर दिख रहा है,जो हर दिन नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल,शेयरों बाजार में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के साथ,यह एक क्लासिक'रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का भावना)'दौर है।
जब तक रुपया स्थिर नहीं हो जाता (जो तभी होगा जब ग्लोबल मार्केट में तेज़ी आएगी और डॉलर गिरेगा),तब तक विदेशी निवेशक पैसा लगाने की जल्दबाजी नहीं करेंगे। इसकी वजह ये है कि अगर शेयर बाजार और रुपया लगातार गिरते रहे तो उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ेगी,जिससे डॉलर में मिलने वाले रिटर्न को नुकसान पहुंच सकता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर आपका क्या नज़रिया है?
स्मॉलकैप असल में Nifty से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब यह रेशियो मार्च 2024 और मार्च 2025 के निचले स्तरों वाले जोन से सपोर्ट ले रहा है। Nifty की तुलना में Midcaps का प्रदर्शन और भी बेहतर है और पिछले साल जून से यह रेशियो एक हॉरीजेंटल रेक्टैंगल (horizontal rectangle) के भीतर स्थिर हो रहा है। हालांकि, तीनों इंडेक्स गिर रहे हैं। लेकिन स्मॉलकैप और मिडकैप का निफ्टी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने का मतलब है कि लार्ज कैप शेयरों के मुकाबले इनकी कम पिटाई हुई है। ऐसे में अगर बाज़ार के मूड में कोई सुधार आता है तो अच्छी क्वालिटी वाले स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में ज़्यादा तेज़ी से उछाल देखने को मिल सकता है।
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