Market View : ऑक्टानॉम टेक और हेज्ड के फाउंडर और CEO राहुल घोष का कहना है कि निफ्टी अब काफी ओवरसोल्ड दिख रहा है और इसका RSI 27 के आसपास है, इसलिए निकट भविष्य में इसमें टेक्निकल उछाल आना कोई हैरानी की बात नहीं होगी। हालांकि,मनीकंट्रोल के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि बाजार की बड़ी तस्वीर अभी भी निगेटिव संकेत ही दे रही है।
राहुल घोष NSE के IPO से जुड़ी खबरों की वजह से सुर्खियों में छाए कैपिटल मार्केट सेक्टर को लेकर पॉज़िटिव हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि एंजल वन अपने हालिया कंसोलिडेशन रेंज से बाहर निकलने (ब्रेकआउट) की तैयारी में है। जबकि BSE ने अपने 50-हफ़्ते के EMA के पास लगातार दो लोअर-विक कैंडल बनाई हैं, जो अक्सर इस बात का संकेत होता है कि अहम सपोर्ट लेवल पर खरीदार आ रहे हैं। इन दोनों शेयरों पर ही बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।"
उन्होंनें आगे कहा कि वरुण बेवरेजेज का ओवरऑल ट्रेंड स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर बना हुआ है। लेकिन ₹448 के स्तर को पार करने पर यह स्थिति बदल जाएगी और आगे और बढ़त की गुंजाइश बनेगी। तब तक,यह स्टॉक एक सीमित दायरे (रेंज-बाउंड) में रह सकता है।
बाजार पर अभी भी मंदी का असर बना हुआ है। निफ्टी 50 अपने 50-डे और 200-डे के मूविंग एवरेज,दोनों से नीचे ट्रेड कर रहा है। यह एक ऐसा अहम संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि,इंडेक्स अब ओवरसोल्ड जोन में है और RSI 27 के आसपास है,इसलिए जल्द ही इसमें थोड़ी रिकवरी (टेक्निकल बाउंस) देखने को मिल सकती है। लेकिन,कुल मिलाकर स्थिति अभी भी कमजोर है।
ऊपर की तरफ 23,500–23,600 का लेवल काफी अहम है। यह वीकली चार्ट पर आखिरी 'स्विंग हाई' है और इंडेक्स इसके नीचे लोअर टॉप्स और लोअर बॉटम्स का पैटर्न बना रहा है। इस जोन के पार जाने पर ही निफ्टी में नई तेजी आ सकती है। इसके बाद,24,000 के लेवल पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस होगा। वास्तव में जब तक कि मैक्रो हालात में कोई बड़ा सुधार नहीं होता,शॉर्ट से मीडियम टर्म में यह लक्ष्य पाना मुश्किल लग रहा है। इसके लिए जरूरी है कि US-Iran के बीच तनाव कम हो,US के 10-ईयर यील्ड में कमी आए और कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल के आस-पास पहुंचने के बजाय उससे काफी नीचे बनी रहे। तब तक, किसी रैली को जोखिम कम करने के मौके के तौर पर देखना चाहिए,न कि उसके पीछे भागना चाहिए।
FIIs की पोजीशनिंग पर बात करते हुए राहुल घोष ने कहा कि इस मोर्चे पर थोड़ी राहत की बात है। पिछले महीने की तुलना में FIIs की बिकवाली कम हुई है और सितंबर में अब तक विदेशी निवेशक नेट बायर रहे हैं। लंबे समय तक विदेशी पैसे की निकासी के बाद यह एक अच्छा बदलाव है।
लेकिन मैं अभी से इसका बहुत ज़्यादा मतलब निकालने की जरूरत नहीं है। अगर ग्लोबल मैक्रो हालात और खराब होते हैं,खासकर कच्चे तेल और ब्याज दरों को लेकर,तो यह उम्मीद करना सही नहीं होगा कि खरीदारी का यह ट्रेंड जारी रहेगा या और तेज़ होगा। फिलहाल,इसे बिकवाली में एक ठहराव के तौर पर देखना बेहतर होगा,न कि भरोसे के साथ विदेशी पैसे की वापसी के तौर पर।
राहुल घोष का कहना है कि बाजार में कमजोर के बावजूद HDFC बैंक अच्छी स्थिति में दिख रहा है और ₹650–680 के अहम सपोर्ट बैंड पर बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि MD के इस्तीफे की घोषणा के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ रही है कि नई लीडरशिप से नई रणनीतिक पहल हो सकती है। कई लोग इसे समय के साथ स्टॉक की री-रेटिंग का संभावित कारण भी मान रहे हैं।
दूसरा थीम कैपिटल मार्केट है। यह सेक्टर NSE के IPO से जुड़ी खबरों की वजह से चर्चा में है। इसमें एंजेल वन (Angel One) अपने हालिया कंसोलिडेशन रेंज से बाहर निकलने (ब्रेकआउट)की तैयारी में दिख रहा है। जबकि BSE लिमिटेड ने अपने 50-हफ्ते के EMA के पास लगातार दो लोअर-विक कैंडल बनाए हैं, जो अक्सर यह संकेत देते हैं कि खरीदार किसी अहम सपोर्ट लेवल पर एंट्री कर रहे हैं। इन दोनों ही शेयरों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
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