ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले मार्केट्स में भी हो सकती है मोटी कमाई, शुभम अग्रवाल की इस गाइड का करें इस्तेमाल

बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव जहां रोमांच पैदा करता है वही यह डराता भी है। ज्यादातर नए इनवेस्टर्स इस बाजार में पैसे गंवाते हैं। इसकी वजह यह नहीं है कि बाजार में कमाई के मौके नहीं होते बल्कि नुकसान इसलिए होता है, क्योंकि वे किसी प्लान के बगैर दांव लगाते हैं

अपडेटेड Apr 25, 2026 पर 12:20 PM
जब उतार-चढ़ाव घट रहा हो तो ऑप्शंस बाइंग एक ट्रैप बन जाता है।

शेयर बाजार में इस साल (2026) खासकर फरवरी के बाद से काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा है। किसी-किसी दिन तो सत्र के दौरान निफ्टी में 500 प्वाइंट्स से ज्यादा का स्विंग दिखता है। बाजार बड़ी तेजी या गिरावट के साथ खुलता है। फिर, बाजार की चाल अचानक बदल जाती है। ऐसा दुनियाभर से आने वाली खबरों के चलते होता है। वैश्विक हालात अनिश्चित बने हुए हैं। खासकर जियोपॉलिटिकल टेंशन ने इंट्रा-डे ट्रेडिंग को हाई-स्टेक गेम बना दिया है।

बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव जहां रोमांच पैदा करता है वही यह डराता भी है। ज्यादातर नए इनवेस्टर्स इस बाजार में पैसे गंवाते हैं। इसकी वजह यह नहीं है कि बाजार में कमाई के मौके नहीं होते बल्कि नुकसान इसलिए होता है, क्योंकि वे किसी प्लान के बगैर दांव लगाते हैं।

बाजार में उथल-पुथल वाले दिनों के लिए एक स्ट्रक्चर्ड एप्रोच जरूरी है


प्री-मार्केट रूटीन के साथ करें शुरुआत

बाजार की घंटी बजने से पहले 10-15 मिनट तैयारी में लगाएं। ग्लोबल संकेतों को समझने की कोशिश करें। जैसे-अमेरिकी मार्केट्स, क्रूड ऑयल प्राइसेज। अगर खबरें खराब हैं, लेकिन क्रूड पर उसका ज्यादा असर नहीं दिख रहा तो इसका मतलब यह है कि स्थिति उतनी खराब नहीं है, जितनी लग रही है। दूसरा, ऑप्शंस ओपन इंटरेस्ट डेटा की मदद से सपोर्ट और रेसिस्टेंस के प्रमुख लेवल्स को समझने की कोशिश करें।

सबसे ज्यादा कॉल ओआई और पुट ओआई वाले स्ट्राइक्स आम तौर पर उस दिन के लिए नेचुरल सीलिंग और फ्लोर्स का काम करते हैं। इसके अलावा पिछले दिन के हाई और लो को भी ध्यान में रखें। बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले सत्र में डेली रेंजेज नाटकीय रूप से बढ़ जाते हैं और ये लेवल अहम रेफरेंश प्वाइंट्स बन जाते हैं। इस तैयार से आपको एक फ्रेमवर्क मिल जाता है।

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ट्रेड से पहले उतार-चढ़ाव को पढ़ने की कोशिश करें

उतार-चढ़ाव बढ़ने का मतलब है कि प्राइस मूवमेंट्स बहुत तेजी से होता है। लेकिन, उतार-चढ़ाव वाले सभी दिन एक जैसे नहीं होते हैं। और यह फर्क आपके ट्रेड को सफल और असफल बना सकता है।

जब इंडिया वीआईएक्स या आईवी डेटा उतार-चढ़ाव बढ़ने का संकेत देता है तो ऑप्शंस महंगे हो जाते हैं और अंडरलाइंग तेजी से मूव करते हैं। यह इंट्रा-डे ऑप्शंस बाइंग के लिए अच्छी टेरीटरी है। शर्त यह है कि आपको सेंसिबल रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो वाले प्वाइंट्स पर एंटर करना है। अगर आप सही प्वाइंट पर एंटर नहीं करते हैं तो वाइड स्टॉपलॉस तुरंत आपकी पूरी कैपिटल खत्म कर देगा।

जब उतार-चढ़ाव घट रहा हो तो ऑप्शंस बाइंग एक ट्रैप बन जाता है। अंडरलाइंग अब भी मूव कर सकते हैं लेकिन प्रीमियम घटने की रफ्तार बढ़ जाती है।

आप अच्छे सिग्नल के साथ ऑप्शन में एंटर करते हैं, इंडेक्स आपकी दिशा में मूव करता है और आप मुश्किल से कोई पैसा बनाते हैं या गंवाते हैं।

ऐसा ऑप्शंस प्रीमियम पर गिरते आईवी के असर की वजह से होता है। ऐसे दिनों में आपको नेकेड ऑप्शन बाइंग से पूरी तरह से बचना चाहिए।

एटीएम ऑप्शंस का चुनाव करें, न कि सस्ते ऑप्शंस का

अगर आपके पास सिग्नल और अच्छे रिस्क-रिवॉर्ड का सेट-अप है तो सवाल है कि फिर कौन सा ऑप्शन आपको खरीदना चाहिए। कई नए ट्रेडर्स आउट-ऑफ-द-मनी ऑप्शंस में दिलचस्पी दिखाते हैं क्योंकि वे सस्ते होते हैं। लेकिन, ऐसा करना महंगा सौदा होता है। खासकर उन दिनों में जब India VIX गिर रहा हो। एट-द-मनी ऑप्शन महंगे होते हैं, लेकिन वे ज्यादा भरोसेमंद तरीके से इंडेक्स के साथ मूव करते हैं। इंट्रा-डे स्कैल्पिंग में टिकट प्राइस से ज्यादा अहम भरोसेमंद मूवमेंट्स होता है।

आखिर में, चुस्त रिस्क मैनेजमेंट के बगैर कोई इंट्र-डे फ्रेमवर्क पूरा नहीं हो सकता। आपको प्रति ट्रेड अपने मैक्सिमम लॉस को तय करना होगा और ऐसा सेशन शुरू होने से पहले करना होगा। इसका पूरी शिद्दत से पालन करना होगा।

शुभम अग्रवाल

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