शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी खराब रहा। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी में 1 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। पूरे हफ्ते की बात की जाए तो दोनों प्रमुख सूचकांकों में 2 से 2.5 फीसदी तक की गिरावट आई। इसकी वजह क्रूड की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत शुरू होने में देर रही। सवाल है कि अगले हफ्ते बाजार चढ़ेगा या गिरेगा?
इंफोसिस के कमजोर गाइडेंस ने बढ़ाया दबाव
एनालिस्ट्स का कहना है कि Infosys के कमजोर गाइडेंस ने आईटी सेक्टर को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस वजह से आईटी शेयरों में बड़ी बिकवाली दिखी है। इससे न सिर्फ निफ्टी आईटी इंडेक्स बल्कि पूरे बाजार पर दबाव बढ़ा है। Nifty 23,900 के अपने सपोर्ट लेवल से नीचे आ गया है। यह लेवल निफ्टी का 20-डे एक्स्पोनेंशियल मूविंग एवरेज था। इस लेवल से निफ्टी के नीचे जाने का मतलब है कि आने वाले दिनों में बाजार का सेंटीमेंट कमजोर रह सकता है।
इन वजहों से बाजार का सेंटिमेंट काफी कमजोर
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने कहा, "इस हफ्ते भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट में घरेलू और विदेशी दोनों कारणों का हाथ रहा। अमेरिका-ईरान में बातचीत में गतिरोध, क्रूड का 100 डॉलर के पार निकलना, रुपये में कमजोरी और विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली की वजह से बाजार पर दबाव बढ़ गया।" उन्होंने कहा कि आरबीआई ने इकोनॉमिक स्लोडाउन के शुरुआती संकेत दिए हैं। इसके अलावा विदेशी ब्रोकरेज फर्मों ने इंडियन इक्विटी आउटलुक को डाउनग्रेड किया है।
बाजार की नजरें अमेरिका-ईरान की बातचीत पर
24 अप्रैल को अमेरिकी बाजारों में मिलाजुला रुख दिखा। हालांकि, प्रमुख तीन में से दो सूचकांकों में अच्छी मजबूती दिखी। इधर, गिफ्ट निफ्टी में भी 0.75 फीसदी की तेजी रही। अच्छी खबर यह है कि ईरान के विदेशमंत्री बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान पहुंचने वाला है। अगर दोनों पक्षों की बातचीत सफल रहती है तो इससे मध्यपूर्व में तनाव घटेगा। इससे क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। क्रूड में गिरावट आने पर भारत सहित दुनियाभर के शेयर बाजारों में बड़ी तेजी दिख सकती है।
आपको फिलहाल क्या करना चाहिए?
27 अप्रैल को शेयर बाजार की चाल पाकिस्तान में होने वाली बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में फिलहाल स्ट्रेंथ नहीं दिख रहा। इंडिया वीआईएक्स 19.71 पर है। इसमें 6 फीसदी तेजी आई है। यह इस बात का संकेत हैं कि बाजार में डर का माहौल है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे में निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। अभी कोई बड़ा निवेश करना ठीक नहीं होगा। हालांकि, लंबी अवधि के इनवेस्टर्स गिरावट पर मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियों में इनवेस्ट कर सकते हैं। लेकिन, शॉर्ट टर्म के लिए खरीदारी करने में बड़ा रिस्क है।