F&O में हुआ बड़ा बदलाव, अब ज्यादा समय तक चलेगी ट्रेडिंग; जानिए क्या हैं नए नियम

F&O Trading: शेयर बाजार में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। NSE ने F&O ट्रेडिंग का समय बढ़ाने का फैसला किया है। इसके साथ ही क्लोजिंग ऑक्शन सेशन भी लागू होगा। जानिए नए नियम क्या हैं और निवेशकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

अपडेटेड May 30, 2026 पर 7:17 PM
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NSE ने साफ किया है कि F&O कॉन्ट्रैक्ट्स का क्लोजिंग प्राइस निकालने के मौजूदा तरीके में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

F&O Trading: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट के ट्रेडिंग समय में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। एक्सचेंज ने घोषणा की है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद F&O बाजार का सामान्य कारोबार 10 मिनट और चलेगा। यानी अब यह सेगमेंट शाम 3:30 बजे की बजाय 3:40 बजे बंद होगा।

शुक्रवार को जारी सर्कुलर में NSE ने कहा कि यह बदलाव कैश मार्केट में शुरू किए जा रहे नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के साथ तालमेल बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि प्री-ओपन सेशन और ट्रेड मॉडिफिकेशन विंडो समेत बाकी सभी समय पहले की तरह ही रहेंगे।

आखिर क्या है क्लोजिंग ऑक्शन सेशन?


क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS बाजार बंद होने से ठीक पहले का एक खास ट्रेडिंग सेशन होता है। इस दौरान निवेशक खरीद और बिक्री के ऑर्डर डालते हैं। उन्हीं ऑर्डर्स के आधार पर किसी शेयर का अंतिम क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है।

इस व्यवस्था का मकसद शेयरों की क्लोजिंग कीमत को ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। दुनिया के कई बड़े शेयर बाजारों में पहले से ऐसी व्यवस्था लागू है।

F&O बाजार पर भी लागू होंगे नए नियम

NSE ने कहा है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के लिए जो प्राइस बैंड और प्री-ट्रेड रिस्क कंट्रोल नियम बनाए गए हैं, वे F&O सेगमेंट पर भी लागू होंगे।

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाजार बंद होने के समय कैश और F&O दोनों सेगमेंट में एक जैसी व्यवस्था बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

प्राइस रेंज बदलने पर निवेशकों को मिलेगी सूचना

एक्सचेंज ने बताया कि जब कैश मार्केट में क्लोजिंग ऑक्शन शुरू होगा और उसके बाद स्टॉक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की ऑपरेटिंग प्राइस रेंज में बदलाव किया जाएगा, तो इसकी जानकारी बाजार सहभागियों को भेजी जाएगी।

अगर किसी निवेशक के लंबित ऑर्डर नई प्राइस रेंज से बाहर पाए जाते हैं, तो वे मौजूदा एक्सचेंज नियमों के हिसाब से अपने आप रद्द हो जाएंगे।

क्लोजिंग प्राइस निकालने का तरीका नहीं बदलेगा

NSE ने साफ किया है कि F&O कॉन्ट्रैक्ट्स का क्लोजिंग प्राइस निकालने के मौजूदा तरीके में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

हालांकि बाजार बंद होने का समय बढ़ा दिया गया है। इसके चलते क्लोजिंग प्राइस तय करने में इस्तेमाल होने वाले वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) की गणना भी बदलेगी। अब यह 3:10 बजे से 3:40 बजे के बीच हुए ट्रेड्स के आधार पर निकाला जाएगा। पहले इसके लिए कम समय की अवधि को शामिल किया जाता था।

ब्रोकर्स को करना होगा सिस्टम अपडेट

एक्सचेंज ने कहा कि इन बदलावों से जुड़े तकनीकी सुधारों की टेस्टिंग आगामी मॉक ट्रेडिंग सेशनों में की जाएगी।

NSE ने कहा कि इन बदलावों की टेस्टिंग आगामी मॉक ट्रेडिंग सेशनों में की जाएगी। एक्सचेंज ने ब्रोकर्स को भी जरूरी तैयारी करने को कहा है। उन्हें नई व्यवस्था लागू होने से पहले अपनी ट्रेडिंग एप्लिकेशंस में जरूरी कॉन्ट्रैक्ट फाइल्स अपडेट करनी होंगी। इससे कारोबार के दौरान तकनीकी समस्याओं से बचने में मदद मिलेगी।

SEBI के निर्देश पर लागू हो रही नई व्यवस्था

16 जनवरी को जारी SEBI के सर्कुलर के तहत क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

शुरुआत में यह नई व्यवस्था केवल उन शेयरों पर लागू होगी, जिनमें F&O ट्रेडिंग होती है। इन शेयरों का क्लोजिंग प्राइस अब क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के जरिए तय किया जाएगा। वहीं बाकी शेयरों के लिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनका क्लोजिंग प्राइस पहले की तरह बाजार बंद होने से पहले के आखिरी 30 मिनट के औसत भाव (VWAP) के आधार पर तय होता रहेगा।

कैसे काम करेगा क्लोजिंग ऑक्शन सेशन?

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन हर कारोबारी दिन शाम 3:15 बजे से 3:35 बजे तक कुल 20 मिनट चलेगा। 3:15 बजे से 3:20 बजे तक ट्रांजिशन फेज होगा, जिसमें कंटीन्युअस ट्रेडिंग सेशन (CTS) से क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में बदलाव किया जाएगा। इस दौरान 3:00 बजे से 3:15 बजे के बीच हुए ट्रेड्स के VWAP के आधार पर रेफरेंस प्राइस तय किया जाएगा।

इसके बाद 3:20 बजे से 3:25 बजे तक निवेशक मार्केट ऑर्डर और लिमिट ऑर्डर दोनों डाल सकेंगे। 3:25 बजे से 3:30 बजे तक केवल लिमिट ऑर्डर स्वीकार किए जाएंगे। इस दौरान मार्केट ऑर्डर में बदलाव या उन्हें रद्द करने की अनुमति नहीं होगी।

ऑर्डर एंट्री विंडो 3:28 बजे से 3:30 बजे के बीच किसी भी समय रैंडम तरीके से बंद कर दी जाएगी। इसका उद्देश्य आखिरी क्षणों में कीमतों को प्रभावित करने की कोशिशों को रोकना है।

निवेशकों को क्या फायदा होगा?

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शेयरों का क्लोजिंग प्राइस ज्यादा निष्पक्ष तरीके से तय हो सकेगा। अभी कई बार बाजार बंद होने से ठीक पहले होने वाले कुछ बड़े सौदे कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। नई व्यवस्था से ऐसी आशंका कम होगी।

इसके अलावा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और क्लोजिंग प्राइस वास्तविक मांग और आपूर्ति के ज्यादा करीब होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार की व्यवस्था वैश्विक बाजारों के मुताबिक होगी। निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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