भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक JPMorgan का मानना है कि सरकार के टैक्स और नीतिगत बदलावों की वजह से अब इक्विटी में निवेश पहले से ज्यादा आकर्षक हो गया है। यही कारण है कि पिछले दो साल में बाजार की रिटर्न ज्यादा दमदार नहीं रहने के बावजूद घरेलू निवेशकों का पैसा लगातार शेयर बाजार में आ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG), डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स से जुड़े टैक्स नियमों में हुए बदलावों से इक्विटी की स्थिति मजबूत हुई है। इससे लोगों का रुझान धीरे-धीरे पारंपरिक बचत की जगह वित्तीय निवेश की ओर बढ़ रहा है।
टैक्स नियमों से इक्विटी को फायदा कैसे?
JPMorgan के मुताबिक, फिलहाल इक्विटी पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। वहीं, डेट म्यूचुअल फंड पर इंडेक्सेशन का फायदा खत्म हो चुका है। कुछ इंश्योरेंस पॉलिसियों की मैच्योरिटी रकम पर भी टैक्स लागू हो गया है।
ब्रोकरेज का कहना है कि इन बदलावों से दूसरे निवेश विकल्पों के मुकाबले इक्विटी ज्यादा आकर्षक बन गई है।
रिपोर्ट का कहना है कि घरेलू निवेशकों की सबसे बड़ी ताकत अब सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बन गया है। पिछले दो साल में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी घटाई। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों ने SIP के जरिए लगातार निवेश जारी रखा। इससे बाजार को मजबूत सहारा मिला।
JPMorgan का मानना है कि यह सिर्फ बाजार की चाल से जुड़ा निवेश नहीं है, बल्कि लोगों की बचत की आदत में स्थायी बदलाव का संकेत है। मतलब कि अब लोग तेजी की गिरावट की परवाह किए बगैर निवेश जारी रख रहे हैं।
घरेलू निवेशक सबसे बड़ा सहारा
ब्रोकरेज का कहना है कि घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा सहारा बन गया है। इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर काफी हद तक संतुलित हो जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भी घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा वित्तीय निवेश और इक्विटी की ओर जा सकता है।
JPMorgan ने यह भी कहा कि उसकी यह उम्मीद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी पर टिकी है। अगर लंबे समय तक हर महीने SIP निवेश 250 अरब रुपये (25,000 करोड़ रुपये) से नीचे रहता है, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा, अगर किसी नियामकीय बदलाव की वजह से डेरिवेटिव कारोबार में 20% से ज्यादा गिरावट आती है, तो इसका असर पूरे शेयर बाजार की गतिविधियों पर पड़ सकता है।
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