टैक्स, बैंकिंग से सोलर तक... जून में बदल रहे हैं कई नियम, जानिए आपकी जेब पर क्या होगा असर

जून में टैक्स, बैंकिंग, UPI, शेयर बाजार और सोलर सेक्टर से जुड़े कई बड़े नियम बदल रहे हैं। एडवांस टैक्स की डेडलाइन से लेकर क्रेडिट कार्ड शुल्क और UPI सुरक्षा तक, जानिए कौन से बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं।

अपडेटेड May 30, 2026 पर 8:10 PM
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जून में कई बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियां अपने शुल्क और रिवॉर्ड नियमों में बदलाव कर रही हैं।

जून आपके पैसों से जुड़े कई अहम बदलाव लेकर आने नावा है। चाहे आप टैक्स भरते हों, शेयर बाजार में निवेश करते हों या रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते हों, इस महीने कई नए नियम लागू हो रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन बदलावों का आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है।

15 जून है एडवांस टैक्स की पहली बड़ी डेडलाइन

जून की सबसे महत्वपूर्ण तारीख 15 जून है। जिन करदाताओं की अनुमानित टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से ज्यादा है, उन्हें वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की पहली किस्त जमा करनी होगी। इस किस्त में कुल अनुमानित टैक्स का 15% भुगतान करना जरूरी है। समय पर भुगतान नहीं करने पर हर महीने 1% ब्याज देना पड़ सकता है।


यह पहली एडवांस टैक्स किस्त है जो पूरी तरह नए आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 के तहत आएगी।

पुराने टैक्स सिस्टम में बढ़ी कई छूट

ओल्ड टैक्स रीजीम चुनने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को कुछ राहत भी मिली है। हॉस्टल अलाउंस पर मिलने वाली टैक्स छूट अब 9,000 रुपये प्रति माह हो गई है। वहीं बच्चों की शिक्षा भत्ता छूट 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह कर दी गई है।

इसके अलावा बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों को अब 50% HRA छूट वाली श्रेणी में शामिल किया गया है। इससे इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है।

F&O ट्रेडर्स के लिए मार्जिन नियम सख्त

शेयर बाजार के F&O सेगमेंट में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए SEBI का 50:50 मार्जिन नियम अब पूरी तरह लागू हो गया है।

नए नियम के तहत ट्रेडिंग मार्जिन का कम से कम 50% हिस्सा नकद या नकद के बराबर माने जाने वाले साधनों में रखना होगा। अब केवल गिरवी रखे गए शेयरों के भरोसे पूरा मार्जिन नहीं दिखाया जा सकेगा।

UPI में दिखेगा असली नाम

डिजिटल भुगतान को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए NPCI नया फीचर लागू कर रहा है। अब जब कोई व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन करेगा या किसी मोबाइल नंबर पर पैसे भेजेगा, तो स्क्रीन पर उसी व्यक्ति का बैंक में दर्ज सत्यापित नाम दिखाई देगा।

इस बदलाव से फर्जी नाम और भ्रामक पहचान का इस्तेमाल कर ठगी करने वाले लोगों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर EPFO भी UPI के जरिए तुरंत PF निकासी की सुविधा का परीक्षण कर रहा है। इससे कर्मचारियों को पहले की तुलना में तेजी से पैसा मिल सकेगा।

बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड यूजर्स पर बढ़ेगा खर्च

जून में कई बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियां अपने शुल्क और रिवॉर्ड नियमों में बदलाव कर रही हैं। कोटक महिंद्रा बैंक ने यूटिलिटी बिल, ईंधन, किराया और बीमा भुगतान पर मिलने वाले रिवॉर्ड प्वाइंट्स की सीमा तय कर दी है। इसके अलावा किराया और शिक्षा भुगतान पर 1% शुल्क लगाया जाएगा। कुछ अन्य श्रेणियों में तय सीमा पार करने पर भी 1% अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा 23 जून से अपने One Co-branded क्रेडिट कार्ड पर बकाया रकम की ब्याज दर 3.49% से बढ़ाकर 3.75% प्रति माह कर रहा है। दूसरी तरफ ICICI बैंक 18 जून से Amazon Pay क्रेडिट कार्ड पर किराया भुगतान के लिए मिलने वाला 1% रिवॉर्ड बेनिफिट बंद कर देगा।

HDFC बैंक भी 25 जून से SMS अलर्ट नियमों में बदलाव कर रहा है। इसके बाद 100 रुपये से अधिक के UPI भुगतान और 500 रुपये से अधिक की UPI रकम पर ही SMS अलर्ट भेजे जाएंगे। सभी ट्रांजैक्शन की जानकारी ईमेल के जरिए मिलती रहेगी।

सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए लागू हुआ नया नियम

स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भी जून से नया नियम लागू हो गया है। अब सरकारी सहायता, सब्सिडी या नेट मीटरिंग से जुड़ी सभी सोलर परियोजनाओं में केवल ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल सोलर मॉड्यूल का इस्तेमाल करना होगा।

सरकार का मकसद घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नियम के कारण कुछ समय के लिए सोलर सिस्टम लगाने की लागत बढ़ सकती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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