मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki India) के चेयरमैन आरसी भार्गव (RC Bhargava) ने कंपनी के 'Maruti 3.0' योजना का खुलासा किया है। इस योजना को तहत अगले नौ सालों में कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता में 20 लाख इकाई प्रति वर्ष की बढ़ोतरी करने पर फोकस करेगी। इस विस्तार योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2031 के अंत तक लगभग 28 अलग-अलग तरह के मॉडल भी जारी किए जाएंगें। 2022-2023 की एनुअल रिपोर्ट में कंपनी के शेयरधारकों को संबोधित करते हुए आरसी भार्गव ने कहा कि कंपनी वर्तमान में एसयूवी की बढ़ती लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। कंपनी ये क्षमता विस्तार वर्तमान और भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए कर रही है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर की विकास दर 6 फीसदी पर रहेगी बरकरार
आरसी भार्गव ने आगे कहा कि हालांकि भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में चीन की तरह दोहरे अंकों की बढ़त की उम्मीद नहीं है लेकिन उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक इसमें 6 फीसदी की विकास दर बरकरार रहेगी। बता दें कि चीन में अतीत में ऑटोमोबाइल सेक्टर में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली थी।
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी की तरफ से उठाए गए कदमों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “विस्तार का हमारा पहला चरण तब था जब हम एक सरकारी कंपनी थे। दूसरा चरण COVID-19 महामारी के साथ पूरा हुआ और भारतीय कार बाजार दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया। देश की कार उत्पादन क्षमता बढ़ा 20 लाख यूनिट करने में हमें 40 साल लग गए। सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने गुजरात प्रोडक्शन यूनिट की स्थापना करके इस प्रक्रिया में अपना अहम योगदान दिया। मारुति सुजुकी इंडिया को अब अगले 9 वर्षों की अवधि में अपनी उत्पादन क्षमता में 20 लाख यूनिट सालना का इजाफा करना होगा।”
वित्त वर्ष 2030-31 तक एक्सपोर्ट बढ़कर 7.5 लाख से 8 लाख कारों तक पहुंचने की उम्मीद
मारुति सुजुकी को उम्मीद है कि एक्पोर्ट डिमांड आगे भी बढ़ती रहेगी और वित्त वर्ष 2030-31 तक एक्सपोर्ट बढ़कर 7.5 लाख से 8 लाख कारों तक पहुंच सकता है। चेयरमैन आरसी भार्गव ने कहा कि घरेलू मांग और एक्पोर्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी के लिए अतिरिक्त 20 लाख इकाई की उत्पादन क्षमता जोड़ना जरूरी हो गया है।
कंपनी के पुनर्गठन की जरूरत
भार्गव ने कहा, “पिछले साल हमारा एक्सपोर्ट बढ़कर 259,000 यूनिट हो गया। हमें उम्मीद है कि एक्सपोर्ट की मांग बढ़ती रहेगी और वित्त वर्ष 2030-31 तक एक्सपोर्ट मांग 750000-800000 कारों तक पहुंचने का अनुमान है।” उन्होंने आगे कहा कि सालाना 40 लाख इकाइयों के उत्पादन के प्रबंधन के लिए कंपनी के पुनर्गठन की जरूरत हो सकती है। जैसे ही इस बारे में कोी पक्का निर्णय लिया जाएगा, इसके बारे में शेयरधारकों को सूचित किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि चुनौती न केवल प्रति वर्ष 40 लाख कारों के उत्पादन है बल्कि कंपनी को इतनी ही संख्या में कारें बेचनी भी हैं। ऐ भी अपने में एक बड़ी चुनौती है। वित्त वर्ष 2030-31 तक कंपनी के पास लगभग 28 अलग-अलग मॉडल हो सकते हैं। स्पष्ट रूप से इतनी बड़ी संख्या में कारों को बेचने के लिए कंपनी के वर्तमान ढ़ाचे और चल रहे सिस्टम में बदलाव की जरूरत होगी। फिलहाल इस समय बाजार में कंपनी के 18 मॉडल बिक रहे हैं।
उन्होंने ये भी बताया कि 2030-31 तक कंपनी के पोर्टफोलियो में 6 ईवी मॉडल होने की उम्मीद है। इस समय तक कंपनी कुल बिक्री में इन मॉडलों की हिस्सेदारी 15-20 फीसदी तक होने की उम्मीद है।