कोयला ट्रेडिंग के लिए मिलेगा नया डिजिटल प्लेटफॉर्म; कोल एक्सचेंज बनाएगी MCX, सेबी ने दी मंजूरी

SEBI की मंजूरी के बाद MCX कोल एक्सचेंज शुरू करने जा रही है। इससे कोयला ट्रेडिंग ज्यादा पारदर्शी और डिजिटल होगी। जानिए इससे जुड़ी पूरी डिटेल।

अपडेटेड Apr 19, 2026 पर 9:35 PM
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MCX ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 17 अप्रैल 2026 को SEBI से यह मंजूरी मिली है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) को एनर्जी सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बड़ा मौका मिला है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने MCX को प्रस्तावित कोल एक्सचेंज कंपनी में निवेश की मंजूरी दे दी है।

MCX ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 17 अप्रैल 2026 को SEBI से यह मंजूरी मिली है। इसके बाद आगे चलकर कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के पास लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा।

क्या है MCX का प्लान


इस मंजूरी के बाद MCX एक नई सहायक कंपनी बनाएगा, जो पूरी तरह उसकी ही होगी। इसका संभावित नाम MCX Coal Exchange Ltd. रखा जा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का मकसद कोयले की खरीद-बिक्री के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाना है, जो पूरी तरह रेगुलेटेड हो और टेक्नोलॉजी पर आधारित हो।

MCX इस नई कंपनी में शुरुआती तौर पर ₹100 करोड़ तक निवेश करेगा, ताकि जरूरी नेटवर्थ की शर्तें पूरी की जा सकें। शुरुआत में इस कंपनी में MCX की 100% हिस्सेदारी रहेगी। हालांकि आगे चलकर इसमें कुछ बड़े पार्टनर्स को भी शामिल किया जा सकता है।

इससे क्या बदलेगा

इस नए प्लेटफॉर्म के जरिए कोयले की ट्रेडिंग ज्यादा पारदर्शी और आसान हो सकेगी। यहां कोयले की खरीद-बिक्री डिजिटल तरीके से होगी और फिजिकल डिलीवरी की सुविधा भी रहेगी। इससे कीमत तय होने की प्रक्रिया (price discovery) बेहतर होगी और पूरे सेक्टर में एफिशिएंसी बढ़ेगी।

MCX का कहना है कि वह अपने मौजूदा अनुभव का इस्तेमाल करके एक मजबूत कोल ट्रेडिंग इकोसिस्टम तैयार करेगा। जैसे कि गवर्नेंस, सर्विलांस और क्लियरिंग सिस्टम। अब MCX को कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए वह तय नियम आने के बाद आवेदन करेगा।

NSE भी पीछे नहीं

MCX के साथ-साथ NSE भी इस रेस में शामिल है। NSE को भी अपने कोल एक्सचेंज प्रोजेक्ट के लिए SEBI से मंजूरी मिल चुकी है।

NSE अपनी नई कंपनी National Coal Exchange of India Limited में करीब ₹100 करोड़ तक निवेश करेगा। इसमें NSE की 60% हिस्सेदारी होगी, जबकि बाकी 40% हिस्सेदारी दूसरे निवेशकों को दी जाएगी।

कोल एक्सचेंज क्या बदलेगा

MCX और NSE दोनों का कोल एक्सचेंज में उतरना इस सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

  • एक ही प्लेटफॉर्म पर खरीदार और बेचने वाले आएंगे, जिससे कोयले की 'मार्केट कीमत' साफ दिखेगी।
  • कोयले को ग्रेड, क्वालिटी और डिलीवरी के हिसाब से स्टैंडर्ड किया जाएगा। जैसे कमोडिटी एक्सचेंज में होता है।
  • सारा लेन-देन एक सिस्टम से होगा, जिससे मैनुअल या ऑफलाइन डीलिंग कम होगी।
  • पावर, सीमेंट, स्टील कंपनियां आसानी से अपनी जरूरत के हिसाब से कोयला खरीद सकेंगी और बेहतर प्लानिंग कर पाएंगी।
  • शुरुआत फिजिकल ट्रेडिंग से होगी, लेकिन बाद में इसी के आधार पर फ्यूचर्स/हेजिंग जैसे प्रोडक्ट भी आ सकते हैं।

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