MF Investment : मार्च में हुई बिकवाली के बीच म्यूचुअल फंड्स ने फाइनेंशियल स्टॉक्स में किया ₹55,413 करोड़ का निवेश
MF Investment : इस खरीदारी के बावजूद म्यूचुअल फंड्स में हुआ कुल निवेश फरवरी के 51.29 लाख करोड़ रुपए से घटकर 46.6 लाख करोड़ रुपए रह गया। म्यूचुअल फंड्स ने मार्च में फाइनेंशियल स्टॉक्स में 55,413 करोड़ रुपए का निवेश किया। अमेरिका-ईरान-इजरायल के बीच तनाव के चलते भारतीय बाजारों में भारी गिरावट आई
FII Selling : विदेशी संस्थागत निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली करते नजर आए। उन्होंने मार्च के महीने में सेकेंडरी मार्केट में लगभग 1.26 लाख करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेच दिए
MF Investment : म्यूचुअल फंड्स ने मार्च में लगभग 55,413 करोड़ रुपये के फाइनेंशियल स्टॉक्स खरीदे, जो इस महीने सेकेंडरी मार्केट में उनके कुल निवेश का 49 प्रतिशत है। इस अवधि में US-ईरान-इज़राइल संघर्ष के चलते बढ़ते तनाव के बीच भारतीय बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली है।
कुल मिलाकर देखें तो मार्च में म्यूचुअल फंड सेकेंडरी मार्केट में सक्रिय खरीदार रहे। इस अवधि में उन्होंने लगभग 1.13 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस खरीदारी के बावजूद,म्यूचुअल फंड की कुल संपत्ति फरवरी के 51.29 लाख करोड़ रुपये से घटकर 46.6 लाख करोड़ रुपये रह गई। हालांकि,कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी एक महीने पहले के 11.1 प्रतिशत से बढ़कर 11.3 प्रतिशत पर आ गई।
फाइनेंशियल शेयरों में ज़ोरदार खरीदारी
बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली के बावजूद फाइनेंशियल शेयरों में ज़ोरदार खरीदारी देखने को मिली। मार्च में निफ्टी बैंक 17 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़ में 15.6 प्रतिशत की गिरावट आई। दोनों इंडेक्स ने मार्च 2020 के बाद से अपनी सबसे बड़ी मंथली गिरावट दर्ज की।
फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दबाव बना रहा। बाजार को इस बात की चिंता रही कि सॉवरेन बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी से बैंकों के सरकारी सिक्योरिटीज़ पोर्टफोलियो पर मार्क-टू-मार्केट नुकसान हो सकता है। मार्च में भारत की 10-साल की बॉन्ड यील्ड 37 बेसिस प्वाइंट्स से ज़्यादा बढ़कर 7 प्रतिशत के पार पहुंच गई, जो एक साल का उच्चतम स्तर है।
लिक्विडिटी पर भी पड़ा असर
बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव,अमेरिका-ईरान-इज़राइल के बीच चल रहा संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें यील्ड में बढ़ोतरी की मुख्य वजहें रहीं। इन सभी कारणों से महंगाई को लेकर बनी चिंता फिर से बढ़ गई है। फाइनेंशियल सेक्टर का आउटलुक भी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा बाज़ार में की गई कार्रवाइयों और एनर्जी की बढ़ती लागत के प्रभाव के कारण कमज़ोर हुईं हैं। इससे मुनाफ़े की उम्मीदों को भी झटका लगा है। रुपये को उसके अब तक के सबसे निचले स्तर के आस-पास बचाने के लिए RBI द्वारा किए गए प्रयासों के कारण,बाज़ार में लिक्विडिटी (नकदी) का प्रवाह भी सीमित हो गया है,जिससे वित्तीय स्थितियां और भी सख्त हो गई हैं।
कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी स्टॉक्स में भी ज़ोरदार खरीदारी
फाइनेंशियल सेक्टर के अलावा, म्यूचुअल फंड्स ने कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी स्टॉक्स में भी ज़ोरदार खरीदारी की। इस सेक्टर में उन्होंने 16,366 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। टेलीकॉम स्टॉक्स में 14,656 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला। जबकि IT स्टॉक्स में 5,717 करोड़ रुपये का निवेश आया। म्यूचुअल फंड्स की खरीदारी वाले अन्य अहम सेक्टरों में कमोडिटीज़ (4,883 करोड़ रुपये की खरीदारी), हेल्थकेयर (4,178 करोड़ रुपये)और इंडस्ट्रियल्स (4,139 करोड़ रुपये) शामिल रहे। FMCG स्टॉक्स में 3,795 करोड़ रुपये का निवेश हुआ,जबकि सर्विसेज़ सेक्टर में 3,548 करोड़ रुपये का निवेश आया।
बाजार में आया भारी करेक्शन
मार्च में, भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय बाज़ारों में बड़े पैमाने पर करेक्शन देखने को मिला। बेंचमार्क BSE Sensex और Nifty दोनों में 11.5 प्रतिशत की गिरावट आई। BSE MidCap 150 में 10.8 प्रतिशत की गिरावट आई,जबकि BSE SmallCap 250 में 10.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने की भारी बिकवाली
इसके विपरीत,विदेशी संस्थागत निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली करते नजर आए। उन्होंने मार्च के महीने में सेकेंडरी मार्केट में लगभग 1.26 लाख करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेच दिए। इसमें से,लगभग 60,000 करोड़ रुपये के शेयर फाइनेंशियल सेक्टर से बेचे गए। इसके बाद 12,500 करोड़ रुपये के ऑटो शेयर बेचे गए। कंस्ट्रक्शन और मेटल सेक्टर में FII की तरफ से 9,154 करोड़ रुपये और 3,165 करोड़ रुपये की निकासी देखने को मिली। FMCG और कंज्यूमर सर्विसेज़ में 5,419 करोड़ रुपये और 2,141 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई, जबकि रियल्टी और हेल्थकेयर सेक्टर में 4,693 करोड़ रुपये और 4,638 करोड़ रुपये की निकासी हुई।
भारतीय इक्विटीज़ में FII की हिस्सेदारी फरवरी के 15.5 प्रतिशत से घटकर मार्च में 15.14 प्रतिशत पर आई
टेलीकॉम और कंस्ट्रक्शन मटीरियल में FII ने 5,603 करोड़ रुपये और 3,144 करोड़ रुपये की बिकवाली की। जबकि सर्विसेज़,ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 2,575 करोड़ रुपये,4,129 करोड़ रुपये और 2,900 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज किया गया। कुल मिलाकर,भारतीय इक्विटीज़ में FII की हिस्सेदारी फरवरी के 15.5 प्रतिशत से घटकर मार्च में 15.14 प्रतिशत रह गई,जबकि इनकी कस्टडी में मौजूद कुल एसेट्स 71.78 लाख करोड़ रुपये से घटकर 62.46 लाख करोड़ रुपये रह गए।