पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई का असर भारत में निवेश पर भी पड़ा है। इस साल की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्मों के निवेश में 22 फीसदी गिरावट आई। इस दौरान पीई और वीसी का का कुल निवेश 9.1 अरब डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 11.7 अरब डॉलर था। यह जानकारी रिसर्च फर्म वेंचर इंटेलिजेंस के डेटा पर आधारित है।
मार्च में पीई-वीसी निवेश में बड़ी गिरावट
इस साल मार्च में पीई और वीसी फंडों के निवेश में बड़ी कमी देखने को मिली है। मार्च में दोनों का कुल निवेश पिछले साल मार्च के 4.7 अरब डॉलर के निवेश से 19 फीसदी घटकर 3.8 अरब डॉलर रहा। इस साल की पहली तिमाही में बड़ी डील की संख्या में भी कमी देखने को मिली। पिछले साल की मार्च तिमाही में 29 डील के मुकाबले इस साल मार्च तिमाही में सिर्फ 17 बड़ी डील हुईं। बड़ी डील का मतलब 10 करोड़ डॉलर और इससे ज्यादा की डील से है।
बाजार का सेंटिमेंट काफी कमजोर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई की वजह से मार्केट का सेंटिमेंट कमजोर है। इसलिए इनवेस्टर्स डील में दिलचस्पी कम दिखा रहे हैं। इस लड़ाई की वजह से शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई है। इसका असर कंपनियों की वैल्यूएशंस पर पड़ा है। ज्यादातर कंपनियों की वैल्यूएशंस घटी है। प्रमोटर्स को कम वैल्यूएशंस पर डील करना घाटे का सौदा लग रहा है। प्रमोटर्स पूंजी जुटाने के लिए हालात सामान्य होने का इंतजार करना चाहते हैं।
बाजार में अनिश्चितता जारी है
अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। इसके बाद शेयर, सोना-चांदी और बॉन्ड सहित ज्यादतर एसेट की कीमतों में गिरावट आई है। हालांकि, इस लड़ाई की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतों में जबर्दस्त उछाल आया है। 27 फरवरी को क्रूड का भाव 72 डॉलर प्रति बैरल था। अभी ब्रेंट क्रूड का भाव 109 डॉलर प्रति बैरल है। पूरे मार्च में क्रूड का भाव 100 डॉलर से ऊपर बना रहा। महंगे क्रूड से महंगा बढ़ने का खतरा है।
अमेरिका ने दिखाया आक्रामक रुख
लड़ाई शुरू होने के एक महीने बाद भी इसके खत्म होने की उम्मीद नहीं दिख रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय समय के मुताबिक, 2 अप्रैल सुबह 6:30 बजे अपने संबोधन में ईरान पर हमले और तेज करने की धमकी दी। उधर, ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। इसका असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक यह अनिश्चितता खत्म नहीं हो जाती। इनवेस्टर्स निवेश नहीं करना चाहते।