भारत का डेरिवेटिव या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) मार्केट फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। रेगुलेटर की तरफ से मिल रहे मिले-जुले संकेतों की वजह से निवेशक उलझन में हैं। दरअसल, पॉलिसीमेकर्स के लिए अटकलों के आधार पर उतार-चढ़ाव संबंधी गतिविधियों और मार्केट की मजबूती को बरकारर रखना चुनौती बना हुआ है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में बढ़ोतरी ने शेयर बाजार के रेगुलेटर्स और बाजार के भागीदारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में इस बात को लेकर भी बहस शुरू हो गई है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े जोखिम से कैसे निपटा जाए।
