भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले काफी खराब रहा है। हालांकि, कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ बढ़ी है और लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। यह कहना है मॉर्गन स्टेनली का। मॉर्गन स्टेनली के एनालिस्ट्स रिद्धम देसाई और नयंत पारेख ने इंडियन मार्केट्स के बारे में कई अहम बातें बताई हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी थीम का अभाव
मॉर्गन स्टेनली के एनालिस्ट्स का कहना है कि इंडिया में डायरेक्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी थीम का अभाव है। इसका असर ऐसे वक्त निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ा है जब दुनियाभर के निवेश एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी शेयरों में निवेश में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "डायरेक्ट एआई थीम का अभाव फिलहाल इंडियन स्टॉक मार्केट्स के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है।"
एआई का असर आउटसोर्सिंग सेक्टर पर पड़ सकता है
ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में AI के पड़ने वाले असर के बारे में भी बताया है। उन्होंने कहा कि इसका बड़ा असर इंडिया के सर्विसेज एक्सपोर्ट्स खासकर आईटी आउटसोर्सिंग सेक्टर पर पड़ सकता है। यह सेक्टर का करीब रिश्ता दुनिया में टेक्नोलॉजी पर होने वाले साइक्लिकल स्पेंडिंग से है। हालांकि, मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि इंडिया को एआई से बढ़ने वाली प्रोडक्टिविटी का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।
भारतीय बाजार के लिए स्थितियां बदलने के संकेत
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि भले ही भारतीय बाजार का प्रदर्शन कमजोर है, लेकिन कई चीजें अब भारतीय बाजार के पक्ष में जाती दिख रही हैं। 12- महीनों में रोलिंग कॉर्पोरेट बायबैक रिकॉर्ड हाई की तरफ बढ़ रहा है। यह जल्द 10 अरब डॉलर के ट्रेलिंग अमाउंट को पार कर सकता है। शेयरों की वैल्यूएशंस में भी कमी आई है। MSCI India में अभी 3.4 गुना प्राइस-टू-बुक मल्टीपल पर ट्रेडिंग हो रही है। वैल्यूएशन का यह लेवल बताता है कि 10 साल का फॉरवर्ड एनुअल रिटर्न करीब 11 फीसदी रह सकता है।
अर्निंग्स ग्रोथ 22 फीसदी तक जा सकती है
ब्रोकरेज फर्म ने अगले दो सालों में अर्निंग्स ग्रोथ भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद जताई है। उसका मानना है कि अर्निंग्स ग्रोथ FY26 में 10 फीसदी से बढ़कर FY28 में 22 फीसदी तक जा सकती है। इसमें डोमेस्टिक इनवेस्टमेंट एक्टिविटी और सेक्टोरल एक्सपैंशन का बड़ा हाथ होगा। हालांकि, उसका मानना है कि पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन इंडिया की संभावनाओं के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
सेंसेक्स 100,000 तक जा सकता है
मॉर्गन स्टेनली ने रिपोर्ट में कहा है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमत गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ जाती है और कॉर्पोरेट अर्निंग्स का CAGR FY26 और FY29 के बीच 19 फीसदी रहता है तो सेंसेक्स के 1,00,000 तक पहुंच जाने की 25 फीसदी संभावना है। अगर क्रूड 120 डॉलर से ऊपर बना रहता है तो सेंसेक्स के गिरकर 66,000 पर आ जाने की भी 25 फीसदी आसार हैं।
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