भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन दुनिया के दूसरे बड़े बाजारों खासकर एशियाई बाजारों के मुकाबले काफी खराब रहा है। इसकी बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली है। सवाल है कि आखिर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लगातार क्यों बिकवाली कर रहे हैं? इस सवाल का जवाब मॉर्गन स्टेनली इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर रिद्धम देसाई ने दिया। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने इस बारे में कई खास बातें बताईं।
एआई-लिंक्ड बाजारों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी
देसाई ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी काफी कम रह गई है। इसकी वजह यह है कि अर्निंग्स ग्रोथ के मामले में भारतीय बाजार एआई लिंक्ड बाजारों से काफी पिछड़ गए हैं। एआई थीम वाले बाजारों में दक्षिण कोरिया, ताइवान, जापान और अमेरिका के बाजार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बात सिर्फ इतनी नहीं है कि इंडिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सीधे तौर पर जुड़ी कंपनियां नहीं हैं। यह तो सिर्फ एक बहाना है। असल मसला ग्रोथ का है।
इंडिया में अर्निंग्स ग्रोथ दूसरे बाजारों से काफी कम
देसाई ने कहा कि इंडिया अभी भी वैल्यूएशंस के लिहाज से अट्रैक्टिव है। लेकिन, इसकी अर्निंग्स ग्रोथ दूसरे बाजारों के मुकाबले काफी कम है। इंडिया की अर्निंग्स ग्रोथ करीब 12-14 फीसदी है। दक्षिण कोरिया, ताइवान, जापान, अमेरिका और यूरोप के कुछ बाजारों की अर्निंग्स ग्रोथ इससे काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इंडियन मार्केट की डीरेटिंग करीब सितंबर 2024 में शुरू हुई थी। तब इंडिया में ग्रोथ और वैल्यूएशंस पीक पर थे। उसके बाद से ग्रोथ घटने लगी, जिससे दूसरे बाजारों के मुकाबले इंडिया पिछड़ता चला गया।
ग्रोथ बढ़ने पर ही होगी विदेशी निवेशकों की वापसी
उन्होंने कहा कि दिसंबर तिमाही में ग्रोथ बढ़ी। मार्च में इसमें और इम्प्रूवमेंट दिखा। कंपनियां मिडिलईस्ट में टेंशन और ग्लोबल अनिश्चितता के बावजूद पॉजिटिव हैं। लेकिन, जहां तक विदेशी निवेशकों का सवाल है तो वे तभी भारतीय बाजार में लौटेंगे जब ग्रोथ की तस्वीर बदलेगी। इसके लिए जरूरी है कि भारत में या तो ग्रोथ बढ़ेगी या एआई लिंक्ड मार्केट्स में ग्रोथ में कमी आएगी। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी उन कंपनियों में है, जो मेमोरी चिप, कंप्यूट और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली की टेक्निकल वजह भी
विदेशी निवेशकों की बिकवाली की एक दूसरी वजह भी उन्होंने बताई। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडों की बिकवाली की एक टेक्निकल वजह भी है। जब किसी बाजार का प्रदर्शन खराब रहता है तो इंडेक्स में उसका वेट (हिस्सेदारी) घट जाता है। फिर पैसिव फंडों को इंडेक्स के हिसाब से अपने इनवेस्टमेंट में बदलाव करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि 2024 में पैसिव फ्लो की वजह से भारतीय बाजार की वैल्यूएशन बढ़ गई थी, क्योंकि तब भारतीय बाजार का प्रदर्शन अच्छा था। अब प्रदर्शन खराब होने की वजह से स्थिति उलट हो गई है।