SIP में निवेश से पहले जान लें ये 5 बड़े मिथ, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान!

म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आज करोड़ों निवेशकों के लिए पैसा जमा करने का सबसे लोकप्रिय और आसान जरिया बन चुका है। हर महीने छोटी-छोटी रकम निवेश करके लंबी अवधि में बड़े वित्तीय लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। लेकिन लोकप्रियता के बावजूद SIP को लेकर कई तरह की गलतफहमियां और मिथक आज भी निवेशकों के बीच प्रचलित हैं

अपडेटेड Jan 26, 2026 पर 5:23 PM
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सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का असली फायदा समय और अनुशासन में छिपा है

म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आज करोड़ों निवेशकों के लिए पैसा जमा करने का सबसे लोकप्रिय और आसान जरिया बन चुका है। हर महीने छोटी-छोटी रकम निवेश करके लंबी अवधि में बड़े वित्तीय लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। लेकिन लोकप्रियता के बावजूद SIP को लेकर कई तरह की गलतफहमियां और मिथक आज भी निवेशकों के बीच प्रचलित हैं। ये मिथक न केवल गलत उम्मीदें पैदा करते हैं, बल्कि कई बार निवेशकों के फैसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे लंबे समय में रिटर्न प्रभावित हो सकता है। आइए, SIP से जुड़े ऐसे ही पांच बड़े मिथकों और उनकी सच्चाई को समझते हैं।

मिथक 1: SIP से तुरंत और लगातार ऊंचा रिटर्न मिलता है

कई नए निवेशक यह मान लेते हैं कि SIP शुरू करते ही हर साल अच्छा और स्थिर रिटर्न मिलना तय है। सोशल मीडिया और कुछ फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स भी SIP को तेजी से अमीर बनने का जरिया बताकर पेश करते हैं। हकीकत यह है कि SIP कोई जादुई समाधान नहीं है।

SIP का असली फायदा समय और अनुशासन में छिपा है। रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने लंबे समय तक निवेश किया है, किस फंड में किया है और बाजार का साइकल क्या रहा है। अगर फंड का प्रदर्शन कमजोर है या उसकी रणनीति सही नहीं है, तो SIP के जरिए भी अच्छे नतीजे नहीं मिलेंगे। असल में SIP बाजार के उतार-चढ़ाव को औसत करने का काम करता है। वास्तविक और ठोस ग्रोथ आमतौर पर 7, 10 या 15 साल की अवधि में दिखती है, न कि कुछ महीनों में।


मिथक 2: हर लोकप्रिय या टॉप रेटेड फंड में SIP शुरू कर देना चाहिए

कई निवेशक यह सोचकर चल पड़ते हैं कि जितने ज्यादा फंड होंगे, उतना ज्यादा मुनाफा होगा। नतीजतन, वे 8–10 फंड्स में SIP शुरू कर देते हैं, जिनकी उन्हें खुद भी पूरी समझ नहीं होती। इसका उल्टा असर पड़ सकता है। बहुत ज्यादा फंड रखने से पोर्टफोलियो जटिल हो जाता है और अक्सर शेयरों में ओवरलैप हो जाता है, जिससे वास्तविक डायवर्सिफिकेशन नहीं मिल पाता। बेहतर रणनीति यह है कि 3 से 5 अच्छे फंड चुने जाएं। जैसे लार्ज कैप, फ्लेक्सी कैप, मिड कैप या हाइब्रिड। और उन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों जैसे बच्चों की शिक्षा, घर खरीदने या रिटायरमेंट से जोड़ा जाए।

मिथक 3: SIP कभी बंद नहीं करनी चाहिए

कई निवेशक मानते हैं कि SIP बीच में रोकना या बंद करना गलत है और इससे पूरा निवेश खराब हो जाता है। लेकिन जीवन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। नौकरी बदलती है, इनकम घट-बढ़ सकती है, आपात स्थिति आ सकती है या लक्ष्य बदल सकते हैं। SIP कोई कानूनी अनुबंध नहीं है। जरूरत पड़ने पर इसे रोका, बदला या बंद किया जा सकता है। कई एसेट मैनेजमेंट कंपनियां 3 से 6 महीने तक SIP को “पॉज” करने का विकल्प भी देती हैं। अगर कोई फंड लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहा है या आपकी निवेश रणनीति बदल गई है, तो बेहतर फंड में स्विच करना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

मिथक 4: बाजार गिरने पर SIP बंद कर देनी चाहिए

शेयर बाजार में गिरावट आते ही कई निवेशक घबरा जाते हैं। जब NAV गिरता है और पोर्टफोलियो लाल दिखता है, तो SIP बंद कर दी जाती है। जबकि सच्चाई यह है कि SIP के लिए बाजार की गिरावट सबसे अच्छा समय होती है। जब NAV कम होता है, तो उसी मंथली निवेश से ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। उदाहरण के लिए, अगर NAV का भाव 100 रुपये चल रहा है, तो 5000 रुपये लगाने पर आपको इसकी 50 यूनिट मिलेंगी। लेकिन NAV का भाव गिरकर 80 रुपये होने से आपको उतने ही रुपये में 62.5 यूनिट मिल जाएंगी। इससे औसत खरीद लागत कम हो जाती है। जब बाजार दोबारा ऊपर जाता है, तो यही अतिरिक्त यूनिट्स बेहतर रिटर्न देती हैं। इसलिए गिरते बाजार में SIP बंद करना फायदे के मौके गंवाने जैसा है।

मिथक 5: SIP अपने आप मुनाफा दिला देती है

कई लोग SIP को बैंक की एफडी जैसा सुरक्षित प्रोडक्ट समझ लेते हैं, जहां रिटर्न लगभग तय होता है। यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। SIP खुद कोई निवेश प्रोडक्ट नहीं, बल्कि निवेश करने का तरीका है। असली रिटर्न उस म्यूचुअल फंड पर निर्भर करता है, जिसमें आप पैसा लगा रहे हैं। उस म्यूचुअल फंड का पोर्टफोलियो, फंड मैनेजर की रणनीति, जोखिम स्तर और रिटर्न देने इतिहास। इसलिए SIP शुरू करने से पहले फंड की पूरी जांच करना निवेशक की जिम्मेदारी है।

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