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Daily Voice: वर्तमान परिस्थितियों में घरेलू डिमांड पर निर्भर कंपनियों में करें निवेश- संजय चावला, Baroda BNP Paribas MF

देश में रूरल सेक्टर में डिमांड में रिकवरी से भी ऑटो सेक्टर में तेजी नजर आयेगी और विशेषकर टू-व्हीलर सेगमेंट से इसे ज्यादा सपोर्ट मिलेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 16, 2022 पर 12:32 PM
Daily Voice: वर्तमान परिस्थितियों में घरेलू डिमांड पर निर्भर कंपनियों में करें निवेश- संजय चावला, Baroda BNP Paribas MF
स्टॉक्स स्पेसिफिक सलाह देते हुए संजय चावला ने कहा कि घरेलू डिमांड पर निर्भर कंपनियों, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और कैपिटल गुड्स सेक्टर की कंपनियों के स्टॉक्स पर नजर रखनी चाहिए

आगे आने वाले 2-3 सालों में ऑटो सेक्टर के लिए बाजार में तमाम अच्छे फैक्टर नजर आ रहे हैं। सेमीकंडक्टर की सप्लाई से जुड़ी परेशानी कम होती नजर आ रही है। जिससे आगे ऑटो कंपनियों के प्रोडक्शन में इजाफा नजर आयेगा। इसके अलावा रूरल डिमांड में रिकवरी से भी ऑटो सेक्टर को फायदा होगा। खासकर टू-व्हीलर सेगमेंट से इसे ज्यादा सपोर्ट मिलेगा। टू-व्हीलर सेगमेंट में आगे प्रीमियमाइजेशन यानी कि प्रीमियम सेगमेंट की गाड़ियों में अच्छी बिक्री भी देखने को मिलेगी। इसका फायदा टू-व्हीलर ऑटो इंडस्ट्री को मिलेगा।

ये बातें बड़ौदा बीएनपी पारिबा एमएफ के संजय चावला (Sanjay Chawla of Baroda BNP Paribas MF) ने मनीकंट्रोल को दिये गये एक इंटरव्यू में कही। संजय चावला को फंड मैनेजमेंट इक्विटी रिसर्च और मैनेजमेंट कंसल्टेंसी का तीन दशकों से ज्यादा का अनुभव है।

इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि बड़ौदा बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड इस समय उन कंपनियों में निवेश करने को वरीयता देता है जो घरेलू मांग पर ज्यादा निर्भर हैं। फंड हाउस का मानना है कि ऐसी कंपनियों को घरेलू बाजार में मांग में आ रही रिकवरी और उत्पादन लागत में हो रही गिरावट का फायदा मिलेगा। संजय चावला ने इस बातचीत में आगे कहा कि मध्यम अवधि के नजरिये से देखें तो भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस समय कई पॉजिटिव फैक्टर्स की वजह से धीरे-धीरे तेजी में आता नजर आ रहा है। दुनिया भर में चाइना प्लस वन पॉलिसी पर बढ़ रहे फोकस और सरकार द्वारा समर्थित पीएलआई स्कीम का फायदा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा।

यूरोप एवं अमेरिका में मंदी की संभावना से जुड़े सवाल पर चावला ने कहा कि इस समय आम धारणा है कि अमेरिका और यूरो जोन मंदी की तरफ बढ़ रहे हैं। 2023 में इनकी ग्रोथ में रेट में गिरावट देखने को मिल रही है। इस तरह का भय है कि महंगाई से निपटने के लिए सेंट्रल बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की गई बढ़ोत्तरी के कारण ग्रोथ में मंदी आ सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि रूस और युक्रेन की लड़ाई के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ग्रोथ के लिए ज्यादा बड़ा जोखिम है।

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