HDFC Mutual Fund का बड़ा फैसला, अब Gold ETF का पूरा पैसा फिजिकल गोल्ड में जरूरी नहीं, ये हुए बदलाव

अगर आप गोल्ड ईटीएफ में पैसे लगाते हैं तो एचडीएफसी म्यूचुअल फंड (HDFC Mutual Fund) के गोल्ड ईटीएफ में निवेश से पहले बदलावों के बारे में जान लें। ऐसा इसलिए क्योंकि ये बदलाव काफी अहम है और अगर मौजूदा निवेशकों को यह पसंद नहीं आ रहा है तो बिना एग्जिट लोड चुकाए इस तारीख तक पैसा निकालने का विंडो खुला है। डिटेल्स में पढ़ें

अपडेटेड Mar 29, 2026 पर 8:47 AM
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HDFC Mutual Fund का कहना है कि गोल्ड ईटीएफ के तहत अधिक से अधिक पैसा फिजिकल गोल्ड में लगाने की कोशिश की जाएगी।

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड (HDFC Mutual Fund) ने अपने गोल्ड ईटीएफ के ढांचे में बदलाव किया है जो 22 अप्रैल से प्रभावी होगा। म्यूचुअल फंड ने इसे फंडामेंटल एट्रीब्यूट चेंज की कैटेगरी में रखा है। रिवाइज्ड प्रोविजंस के तहत इस स्कीम का 95-100% पैसा तो गोल्ड में लगता रहेगा लेकिन इसमें अब गोल्ड से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स जैसे कि गोल्ड डिपॉजिट स्कीम्स (GDS), गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम्स (GMS), औक एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCDs) में भी पैसा लगाया जा सकेगा। फ्रेमवर्क में गोल्ड से जुड़े इन इंस्ट्रूमेंट्स में नेट एसेट्स के अधिकतम 50% तक का एक्सपोजर की बात कही गई है। इसमें भी जीडीएस और जीएमएस के लिए 20% की लिमिट है। वहीं बाकी 0–5% पैसा डेट म्यूचुअल फंड यूनिट के साथ-साथ डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाएगा।

कमोडिटी डेरिवेटिव्स में जरूरत पड़ने पर ही लगेगा पैसा

फ्रेमवर्क में कमोडिटी डेरिवेटिव्स से जुड़े रिस्क का खुलासा शामिल किया गया है, जैसे कि वोलैटिलिटी, कम लिक्विडिटी, फिजिकल गोल्ड के मुकाबले भाव में अंतर, और सेटलमेंट से जुड़े रिस्क। 24 मार्च को जारी स्पष्टीकरण में फंड ने कहा कि ETCDs में निवेश का प्रावधान योजना की नियमित रणनीति का हिस्सा नहीं है बल्कि सिर्फ एक एनेबलिंग मेजर है यानी कि अगर निवेश करना हो तो किया जा सके। म्यूचुअल फंड का कहना है कि इसमें निवेश सिर्फ रेयर टाइम में किया जाएगा जैसे कि फिजिकल गोल्ड की खरीदारी या बिक्री में अस्थायी तौर पर दिक्कतें आ रही हैं। म्यूचुअल फंड का कहना है कि मार्केट की परिस्थितयां सामान्य होने पर इसे समाप्त कर दिया जाएगा।


मौजूदा निवेशकों के लिए 21 अप्रैल तक फ्री एग्जिट विंडो

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड का कहना है कि गोल्ड ईटीएफ स्कीम के तहत अधिक से अधिक पैसा फिजिकल गोल्ड में लगाने की कोशिश की जाएगी। 28 फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक इसके एसेट्स का करीब 98.65% पैसा फिजिकल गोल्ड में है। अब इससे जुड़े प्रावधानों में अगले महीने से बदलाव हो रहे हैं तो मौजूदा निवेशकों को 21 अप्रैल से बिना एग्जिट लोड के निवेश निकालने की सहूलियत दी जा रही है। अगर ऐसा नहीं कर पाते हैं तो नए ढांचे को निवेशकों को मानना पड़ेगा। इन बदलावों को एएमसी और ट्रस्टीज की मंजूरी मिल चुकी है और सेबी ने नोट कर दिया है।

क्यों हो रहा यह बदलाव?

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने इस बदलाव की वजह तो नहीं स्पष्ट की है लेकिन इसे रेगुलेटरी प्रोविजंस और जिन इंस्ट्रूमेंट्स को लेकर मंजूरी मिली हुई है, उनके हिसाब से अपडेट के तौर पर इसे पेश किया गया है। इससे यह होगा कि म्यूचुअल फंड फिजिकल गोल्ड के अलावा गोल्ड से जुड़े अन्य विकल्पों का भी सीमित इस्तेमाल कर सकेगा।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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