N Chandrasekaran: एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे से टाटा ग्रुप के शेयरों पर कितना असर पड़ेगा, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

N Chandrasekaran: एन चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया है कि वह 20 फरवरी, 2027 तक टाटा संस का चेयरमैन बने रहेंगे। इसके बावजूद 12 अगस्त को टाटा समूह की ज्यादातर कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। सबसे ज्यादा गिरावट टीसीएस के शेयर में आई

अपडेटेड Aug 12, 2026 पर 2:16 PM
एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त की सुबह टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफे का ऐलान किया।

N Chandrasekaran: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को पद छोड़ने का ऐलान किया। हालांकि, वह 20 फरवरी, 2027 तक कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे। उनके फैसले का असर टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। समूह की दिग्गज कंपनियों टीसीएस, टाटा स्टील, टाइटन, टाटा पावर, टाटा मोटर्स पीवी के शेयरों में बड़ी गिरावट दिखी। सवाल है कि क्या शेयर की कीमतों में यह गिरावट जारी रहेगी?

शॉर्ट टर्म में शेयरों पर दिख सकता है शेयर 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट टर्म में एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे का असर टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर दिख सकता है। लेकिन, टाटा समूह के स्ट्रॉन्ग मैनेजमेंट और कंपनियों की अपनी अच्छी लीडरशिप की वजह से शेयरों में ज्यादा गिरावट नहीं आएगी। इसलिए निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।


निवेशकों को डरने की जरूरत नहीं 

कंप्लिट सर्किल के मैनेजिंग पार्टनर और सीआईओ गुरमीत चड्ढा ने कहा कि चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर टाटा ग्रुप के लिए निगेटिव है। लेकिन, इससे निवेशकों को डरना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, "शॉर्ट टर्म में शेयरों पर निगेटिव असर दिख सकता है। लेकिन, शेयरहोल्डर्स की वैल्यू में ज्यादा गिरावट आने का अनुमान नहीं है।"

समूह के सामने कुछ चुनौतियां 

उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप के लिए कुछ चुनौतियां दिख रही हैं। इनमें टाटा संस की लिस्टिंग, शापोरजी पालोनजी की हिस्सेदारी और टाटा डिजिटल और एयर इंडिया जैसे नए बिजनेसेज में लॉस शामिल हैं। इसके बावजूद चड्ढा का मानना है कि शेयरहोल्डर्स की वैल्यू में बड़ी गिरावट नहीं आएगी।

छह महीने तक पद पर रहेंगे चंद्रशेखरन

उन्होंने कहा कि चड्ढा ऐसे बिजनेस लीडर हैं, जिन्हें व्यापक अनुभव है। उनकी लीडरशिप तब और अहम हो जाती है जब समूह आर्टफिशियल इंटेलिजेंस के असर का सामना कर रहा है। हालांकि, चंद्रशेखरन अगले छह महीनों तक ग्रुप के साथ बने रहेंगे। उनका नेतृत्व ग्रुप और इसकी कंपनियों को मिलता रहेगा।

चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी पर निगाहें

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगले साल 20 फरवरी के बाद टाटा संस में चंद्रशेखरन की जगह कौन लेगा? चंद्रशेखरन ने बोर्ड को उनके उत्तराधिकारी के बारे में जल्द फैसला लेने को कहा है ताकि लीडरशिप में बदलाव की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाए। उनका यह भी मानना है कि टाटा समूह का कोई एग्जिक्यूटिव ग्रुप को स्थिरता प्रदान कर सकता है और स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन में मतभेद से जुड़ी चिंता दूर सकता है।

नए बिजनेस के मुनाफे में आने पर सवाल

चड्ढा ने ग्रुप के कुछ नए बिजनेसेज खासकर Tata Digital और Air India को लेकर बढ़ रहे दबाव का जिक्र किया। ग्रुप ने इन बिजनेसेज में काफी निवेश किया है। ऐसे में इनके मुनाफे में आने का मसला काफी अहम है। पिछले साल बड़े हादसे से एयर इंडिया को काफी झटका लगा था। अब भी एयरलाइंस के सामने कई चुनौतियां हैं।

समूह की कंपनियों की अपनी स्ट्रॉन्ग लीडरशिप

इनगवर्न के फाउंडर और एमडी श्रीराम सुब्रमणियन ने कहा कि चंद्रशेखरन के इस्तीफे ने चौंकाया। लेकिन, यह ग्रुप के अंदर चल रहे मतभेद और चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति में हो रही देर के बाद आया है। हालांकि, उनका मानना है कि टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों के निवेशकों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि कंपनियों के अपने बोर्ड हैं और अपनी मैनेजमेंट टीम है।

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