शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 15 मई को गिरकर बंद हुए। इस हफ्ते दो दिनों की तेजी पर शुक्रवार को ब्रेक लग गया। इसकी बड़ी वजह यह है कि निफ्टी के लिए 23,800 के लेवल पर स्ट्रॉन्ग रेसिस्टेंस है। बाजार में तेजी के लिए इस लेवल का टूटना जरूरी है।
बाजार में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव
15 मई को बाजार में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बाजार खुलने पर सेंसेक्स एक समय करीब 470 अंक तक चढ़ गया था। फिर पूरे दिन चढ़ने और उतरने के बाद यह 160 अंक यानी 0.21 फीसदी गिरकर 75,237.99 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 0.19 फीसदी यानी 46 अंक की गिरावट के साथ 23,643 पर क्लोज हुआ। इससे पहले यह 23,839 अंक तक पहुंच गया था।
निफ्टी के लिए बहुत स्ट्रॉन्ग रेसिस्टेंस
ब्रोकरेज फर्म बोनांजा में सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट विराट जागड़ ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,800-23,950 की रेंज में बड़ा रेसिस्टेंस है। इसकी वजह यह है कि यह लेवल पिछले ब्रेकडाउन का रीजन है। बीते कुछ हफ्तों में इस रेंज को तोड़ने की कई बार कोशिश हुई है, जो नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि निफ्टी में शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेजेज के एक कलस्टर करीब ट्रेडिंग हो रही है, जो तेजी जारी नहीं रहने दे रहा। इस सप्लाई जोन के करीब ट्रेडर्स एक्विट हो जाते हैं। इससे आवर्ली चार्ट पर बार-बार रिजेक्शन के कैंडल्स दिखते हैं।
निफ्टी के लिए 23,450-23,500 पर सपोर्ट
उन्होंने कहा कि मोमेंटम इंडिकेटर्स सीमित दायरे में बने हुए हैं। इससे रेसिस्टेंस लेवल के ऊपर स्ट्रॉन्ग फॉलो-थ्रू बाइंग का अभाव दिखता है। निफ्टी के लिए अगला सपोर्ट 23,450-23,500 पर है। 23,150-23,200 के करीब स्ट्रॉन्ग डिमांड जोन दिख रहा है। निफ्टी के 23,950 को पार करने के बाद ही अच्छी तेजी दिखेगी, जिसमें निफ्टी 24,200 तक जा सकता है।
रियल्टी और मेटल स्टॉक्स पर दबाव
सेक्टर के लिहाज से देखा जाए तो आईटी, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में मजबूती दिखी है। रियल्टी और मेटल स्टॉक्स दबाव में दिख रहे हैं। उतार-चढ़ाव वाले बाजार में चढ़ने वाले शेयरों की संख्या गिरने वाले शेयरों की संख्या से कम है। मिडकैप इंडेक्स और स्मॉलकैप इंडेक्स पर भी दबाव दिख रहा है। दोनों ही इंडेक्स 0.5-0.5 फीसदी गिरकर बंद हुए।
फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह
इनवेस्टर्स को फिलहाल मार्केट में सावधानी बरतने की सलाह है। जब तक प्रमुख सूचकांक अपने रेसिस्टेंस लेवल को तोड़ नहीं देता, बाजार का सेंटीमेंट कमजोर बना रह सकता है। खासकर नए निवेशकों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। जब तक बाजार की दिशा को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिल जाते तब तक नई खरीदारी से बचना ठीक रहेगा।
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