Nifty फिर 20000 के पार, म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश पर अब क्या हो रणनीति?
बाजार जानकारों का कहना है कि एसआईपी के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों के लिए कुछ भी नहीं बदलता है, क्योंकि यह निवेश रणनीति निवेशकों को लंबी अवधि में रुपये की औसत लागत का लाभ उठाने की सुविधा देती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि एसआईपी रिटर्न की गारंटी नहीं देते हैं। हालांकि, इस बात की उम्मीद रहती है कि लंबे समय में बाजार में तेजी आएगी। जिससे अंततः एसआईपी निवेशकों को मुनाफा होगा
बाज़ार में ऐसे मील के पत्थर देखने को मिलते रहेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपनी रणनीति को बदलते रहना होगा क्योंकि हमने कुछ उद्देश्यों के लिए निवेश किया
एनएसई बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स ने 29 नवंबर को 20,000 के स्तर को फिर से हासिल कर लिया। यह तेजी कुछ निवेशकों को अपनी म्यूचुअल फंड निवेश रणनीति को बदलने के लिए प्रेरित कर रहा है। पिछले तीन सालों में, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों ने लार्ज-कैप शेयरों से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। उधर बाजार में आज भी तेजी बरकरार रही। निफ्टी आज 20,100 के पार निकल गया। 18 सितंबर के बाद पहली बार निफ्टी 20100 के पार जाता दिखा। हालांकि कारोबार के अंत में ये 206.90 अंक यानी 1.04 फीसदी की बढ़त के साथ 20,096.60 के स्तर पर बंद हुआ है। लगातार 10वें दिन मिडकैप इंडेक्स नए शिखर पर बंद हुए हैं।
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के संतोष मीना का कहना है कि “अमेरिका में ब्याज दरें चरम पर हैं, और डॉलर इंडेक्स में गिरावट आ रही है, जिससे भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) का निवेश आने की उम्मीद है। मजबूत फंडामेंटल्स के बावजूद, राज्यों के चुनाव परिणामों की वजह से बाजार में वोलैटिलिटी की आशंका है। हालांकि, इसके कारण आने वाले किसी भी करेक्शन में खरीदारी का अच्छा मौका होगा। ऐसा लगता है कि होता है कि बाज़ार चुनाव पूर्व रैली के लिए तैयार है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि निफ्टी जल्द ही 21,000 को पार कर जाएगा। 19,500 का स्तर अब सपोर्ट स्तर के रूप में काम करेगा”।
निफ्टी 50 इंडेक्स इस साल 11 सितंबर को पहली बार इस स्तर पर पहुंचा था। साल-दर-साल आधार पर, निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स (टीआरआई) 47 फीसदी बढ़ा है, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 टीआरआई 105.9 फीसदी बढ़ा है। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 250 टीआरआई 117.3 फीसदी बढ़ा है।
पीपीएफएएस एसेट मैनेजमेंट कंपनी के राजीव ठक्कर ने कहा, "हाल के इक्विटी रिटर्न ऊंचे रहे हैं। हमें यह मान कर नहीं चलना चाहिए कि आगे भी ऐसे ही रिटर्न मिलेंगे। भविष्य के इक्विटी रिटर्न के लिए एक कंजर्वेटिव रवैया ही रखें। इससे निवेशक किसी भी वित्तीय आपात स्थिति का आसानी ले मुकाबला कर पाएंगे।"
बाजार के कुछ हिस्सों में बेहतर प्रदर्शन ने ओवरहीटिंग को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। तो, क्या आपको बाजार की स्थितियों को देखते हुए अपनी म्यूचुअल फंड रणनीति में बदलाव करना चाहिए? आइए इस जानते हैं बाजार जानकारों की राय।
जब कोई इंडेक्स ऑलटाइम हाई पर पहुंच जाता है तो निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि वैल्यूएशन महंगा है या नहीं? बाजार की तेजी में पिछले दो सालों में स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में म्यूचुअल फंडों के जरिए हुए निवेश का बड़ा योगदान रहा है।। इसके अलावा इन कंपनियों पर महंगाई का असर बहुत गहरा नहीं पड़ा है। साथ ही अर्थव्यवस्था में मांग में मजबूती रही है। जिससे छोटी और मिड-कैप कंपनियों को मदद मिली है। इसके साथ ही विदेशी निवेशक भी बाजार की ओर लौटते दिखे हैं।
क्वांटम म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर क्रिस्टी मथाई ने कहा कि स्पष्ट रूप से इस समय लार्ज-कैप शेयर, स्मॉल और मिड-कैप की तुलना में बहुत बेहतर स्थिति में दिखते हैं। छोटे-मझोले शेयर इस समय महंगे दिख रहे हैं।
वहीं, राजीव ठक्कर का मानना है कि कॉरपोरेट नतीजे अच्छे रहे हैं, लेकिन वैल्यूएशन कुछ हद तक ऊंचे हैं। निकट अवधि में बाजार की चाल अप्रत्याशित रह सकती है। यह कहना संभव नहीं है कि आने वाले दिनों में क्या होगा। राजीव ने आगे कहा कि घरेलू खपत पर आधारित शेयरो पिछले कुछ समय से महंगे लग रहे हैं और पिछले साल के दौरान इनमें से कुछ शेयरों में करेक्शन के बावजूद यह अभी महंगे बने हुए हैं।
बाजार के नजरिए से देखें तो एनर्जी की कीमतें फिर से बढ़ना शुरू हो गई हैं। इसके अलावा, भारत एक चुनावी वर्ष में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में निवेश किनारे पर रहने के लिए मजबूर हो सकते हैं। क्वांटम म्यूचुअल फंड का कहना है की इस समय, फाइनेंशियल, बैंक आईटी कंपनियों और चुनिंदा ऑटो कंपनियों का वैल्यूएशन अच्छा दिख रहा है।
निफ्टी का 20,000 अंक के स्तर पर पहुंचना एक बड़ी बात। हालांकि, निवेशकों को अपनी म्यूचुअल फंड निवेश रणनीति बदलनी चाहिए या नहीं, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इसमें उनके फाइनेंशियल गोल, जोखिम उठाने का क्षमता और वर्तमान निवेश पोर्टफोलियो की स्थिति जैसे फैक्टर शामिल हैं।
बाजार जानकारों का कहना है कि एसआईपी के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों के लिए कुछ भी नहीं बदलता है, क्योंकि यह निवेश रणनीति निवेशकों को लंबी अवधि में रुपये की औसत लागत का लाभ उठाने की सुविधा देती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि एसआईपी रिटर्न की गारंटी नहीं देते हैं। हालांकि, इस बात की उम्मीद रहती है कि लंबे समय में बाजार में तेजी आएगी। जिससे अंततः एसआईपी निवेशकों को मुनाफा होगा। हालांकि, बाजार की स्थितियों को देखते हुए एकमुश्त निवेशक अपने निवेश को कुछ समय के लिए टालने का फैसला कर सकते हैं।
रुषभ इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक, रुषभ देसाई ने कहा "लार्ज-कैप में मिड-कैप और स्मॉल-कैप जितनी तेजी से बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन सभी तीन खंडों का वैल्यूएशन उनके लॉन्गटर्म औसत से ऊपर है। बाजार बुलबुले में नहीं हैं, लेकिन या निश्चित रूप से महंगा है। ऐसे कम से कम इस समय, मैं अपना पैसा और अपने ग्राहकों का पैसा बाजार में एकमुश्त लगाने में सहज नहीं हूं"।
इसके अलावा रुषभ की राय है कि यह उन निवेशकों के लिए अच्छा समय है, जिनका लक्ष्य छह महीने से एक साल में मुनाफावसूली करना है। ऐसे निवेशकों को अपना मुनाफा बुक करके इसको फिक्स्ड इनकम में डाल देना चाहिए।
वहीं, प्लानरुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अमोल जोशी की सलाह है जो निवेशक तीन से पांच साल के लिए एकमुश्क निवेश करना चाहते हैं उनको बैलेंस्ड एडवांटेज फंड या मल्टी-एसेट फंड में पैसे डालने चाहिए।
पिछले कुछ महीनों में बाजार में अच्छी तेजी आई है। ये पोर्टफोलियो को वापस लाने अपने इच्छित एसेट एलोकेशन लेवल पर लाने का सही समय है। उदाहरण के लिए, आपका लक्षित एसेट एलोकेशन लेवल 70-30 है और आप 70 फीसदी इक्विटी रखना चाहते हैं लेकिन इस बाजार रैली ने आवंटन को 85-15 तक शिफ्ट कर दिया है, तो आप इसे लक्षित सीमा के भीतर वापस लाने के लिए बाजार रैली का उपयोग कर सकते हैं।
मैंगलोर स्थित एमएफ डिस्ट्रीब्यूटर Simplesolution4u की फाउंडर और निवेश एक्पर्ट पूर्णिमा काटपाडी ने कहा, "बाज़ार में ऐसे मील के पत्थर देखने को मिलते रहेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपनी रणनीति को बदलते रहना होगा क्योंकि हमने कुछ उद्देश्यों के लिए निवेश किया। हमें फंड से तभी बाहर निकलना चाहिए जब हमने उन वित्तीय लक्ष्यों को हासिल कर लिया हो। अगर हम अभी बाहर निकल जाते हैं और बाद में वापस लौटने की कोशिश करते हैं तो हम बाजार में मौके खो सकते हैं। साथ ही यह भी ध्यान में रखें कि म्यूचुअल फंड निवेश से बाहर निकलने पर एग्जिट लोड शुल्क और टैक्स का बोझ पड़ता है, जो आपके रिटर्न पर असर डाल सकता है। ऐसे में पोर्टफोलियो मंथन की रणनीति अच्छी तरह से सोची-समझी होनी चाहिए।"
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