अगस्त की 11 तारीख को Nifty Bank पुट ऑप्शंस के 45,700 के स्ट्राइक पर कुछ अचानक ट्रेड (Freak Trades) की वजह से ट्रेड स्कावयर-अप होने से पहले थोड़े समय के लिए प्रीमियम में 90 फीसदी से ज्यादा गिरावट आ गई। इस ट्रेड्स से जुड़े ब्रोकर्स और क्लाइंट्स की पहचान नहीं हो पाई है। लेकिन, मनीकंट्रोल को डेरिवेटिव मार्केट प्लेयर्स से पता चला है कि ट्रेड के ये ऑर्डर कई क्लाइंट्स की तरफ से दिए गए थे। इनमें से सभी एक ही स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर रहे थे। ये क्लाइंट्स पुट ऑप्शंस 90 रुपये प्रीमियम पर बेचने (या राइट करने) में कामयाब हो गए, जबकि उस समय मार्केट में करीब 1,300 रुपये प्रीमियम चल रहा था। उस दिन सबसे ज्यादा प्रीमियम 1,371 रुपये था।
पुट ऑप्शन एक फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट है। यह ऑप्शन के खरीदार को कोई खास एसेट (जैसे स्टॉक या इंडेक्स) पहले से तय कीमत पर बेचने को अधिकार देता है। वह पुट के राइटर को यह खास एसेट बेच सकता है। उपर्युक्त मामले में बैंक निफ्टी के 45,700 का पुट खरीदने वाला व्यक्ति पुट के राइटर को 45,700 का पुट बेच सकता है, भले ही मार्केट में बैंक निफ्टी इस लेवल से कम या ज्यादा चल रहा हो।
डेरिवेटिव प्लेयर्स को हुआ होगा बड़ा लॉस
डेरिवेटिव प्लेयर्स का कहना है कि इस पुट ऑप्शन को बेचने वाले क्लाइंट्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा होगा, क्योंकि उन्हें अपनी पॉजिशन काफी ज्यादा कीमत पर कवर करना पड़ा होगा। फ्यूचर्स मार्केट में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) फर्मों का दबदबा होता है, जो एल्गो स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ऐसे में प्रतिद्वंद्वी एल्गोज ने इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए अपने खुद के ट्रेड्स एनिशिएट किए होंगे, जिससे गलत पुट ट्रेड से जुड़े लोगों का नुकसान बढ़ गया होगा।
पुट राइटर को कब होता है फायद?
पुट के राइटर को तभी फायदा होता है, जब वह सबसे ज्यादा मुमकिन प्रीमियम कलेक्ट करता है। इसकी वजह यह है कि ऑप्शन राइटर्स (कॉल और पुट दोनों) के लिए सिद्धांतत: लॉस असीमित हो सकता है, अगर अंडरलाइंग (एसेट) का प्राइस विपरीत दिशा में जाता है। ऑप्शन सेलर (बेचने वाले) का प्रॉफिट उतना ही होता है, जितना वह प्रीमियम के रूप में कलेक्ट करता है।
गलती की वजह अब तक साफ नहीं
यह साफ नहीं है कि इस गलती की वजह क्या थी। लेकिन, डेरिवेटिव प्लेयर्स का कहना है कि एक्चुअल स्ट्रेटेजी (असल मकसद) बैंक निफ्ठी का 45,700 का स्ट्राइक कॉल ऑप्शन बेचने की रही होगी, जिसका प्रीमियम 90 रुपये चल रहा था। इसकी जगह एल्गोज (Algos) में गलती से उस प्राइस का निफ्टी बैंक पुट बेचने का ऑर्डर चला गया होगा। अभी यह भी साफ नहीं है कि यह एक मानवीय गलती थी या Algo के गलत behave की वजह से ऐसा हुआ। इस तरह की मानवीय गलती को मार्केट में आम तौर पर फैट फिंगर ट्रेड (Fat Finger Trade) कहा जाता है।
इस साल अप्रैल में ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म Shoonya के ऐप का इस्तेमाल करने वाले ट्रेडर्स अपना ट्रेड नहीं कर पा रहे थे, जबकि उनके अकाउंट्स में ऐसे ट्रेड दिख रहे थे, जिसे उन्होंने नहीं किए थे।
दूसरे ट्रेडर्स को भी नुकसान की आशंका
निफ्टी बैंक के इस गलत ट्रेड के बारे में मार्केट प्लेयर्स का कहना है कि क्लाइंट्स के अलावा दूसरे ट्रेडर्स को भी नुकसान उठाना पड़ा होगा, क्योंकि प्रीमियम में फ्री-फॉल के दौरान उनके स्टॉपलॉसेज ट्रिगर हो गए होंगे। जब स्टॉपलॉस ट्रिगर होता है तो ट्रेड अपने आप स्कावयर-ऑफ हो जाता है।